राजस्थानः राजनैतिक यात्राओं का दौर शुरू, सिरफुटव्वल और सत्ता विरोधी लहर का आसरा

publiclive.co.in [EDITED BY SIDDHARTH SINGH]

मनोज माथुर, जयपुर: राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस के रणनीतिकारों ने चुनावी समर के लिए कमर कस ली है. दोनों पार्टी के रणनीतिकार इस जुगत में हैं कि पार्टी को आगामी बढ़त किस प्रकार दिलाई जा सकती है. हालांकि फिलहाल चुनावी रंग अपने चरम पर नहीं पहुंचा है. लेकिन, माना जा रहा है कि आगामी 4 तारीख से जब मुख्यमंत्री अपनी ‘रथ यात्रा’ शुरू करेंगी तो प्रदेश की राजनीति अपने चरम पर होगी. बीजेपी की काट के लिए कांग्रेस ने अगस्त के पहले पखवाड़े से शेखावटी में ताल ठोंकने की रणनीति बनाई है.

वागड़ बनाम शेखावटी
बीजेपी ने अपनी राजस्थान गौरव यात्रा की शुरूआत के लिए वागड़ क्षेत्र को चुना है. आदिवासी बाहुल्य वाले इस क्षेत्र में तमाम सीटें आरक्षित हैं, ऐसा मानना है कि जो पार्टी इस क्षेत्र से बढ़त लेती है वही राज्य में सत्ता पर काबिज भी होती है. उदयपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़, डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे जिलों से पिछले चुनावों में बीजेपी को अच्छी खासी बढ़त मिली थी. जिसका परिणाम यह रहा कि कांग्रेस के इस परंपरागत वोट बैंक पर उनकी पकड़ मजबूत होती चली गई.

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भी अपनी जीत के लिए रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. आजकल में प्रदेश नेतृत्व राहुल गांधी की चुनावी सभाओं का कार्यक्रम दिल्ली से अप्रूव कराने की कोशिश में है. माना जा रहा है कि कांग्रेस वागड़ की काट के रूप में शेखवटी से चुनावी उद्घोष करना चाह रही है. शेखावटी का वोटबैंक कांग्रेस के पक्ष में रहा है और खास कर जाट समुदाय की बहुलता पार्टी को मजबूत आधार देती है. झुंझुनु, सीकर, चूरू, नागौर जैसे जिलों में कांग्रेस अपने पुराने वोट बैंक की ‘घर वापसी’ कराना चाह रही है. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी अगस्त माह में यहीं से अपनी चुनावी रणभेरी फूंक सकते हैं.

चारभुजा और खाटू श्याम
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी चुनावी शुरुआत चारभुजा नाथ मंदिर से करने की योजना बनाई है. किवदंती है कि चारभुजा नाथ इस धरा के स्वामी हैं और यहां के वाशिंदों के लिए आराध्य का स्थान रखते हैं. वसुंधरा राजे की यह तीसरी ‘रथ यात्रा’ है, इससे पहले वे परिवर्तन यात्रा और सुराज संकल्प यात्रा निकाल चुकी हैं, लेकिन वे दोनों उनके विपक्ष में रहते हुए निकाली गई थीं. सत्ता में रहते हुए राजे की यह पहली यात्रा है. और वे पिछली बार की ही तरह इसे भी चारभुजा से शुरू करने जा रही हैं. सूत्रों का मानना है कि पिछले चुनावों में मिली भारी जीत के कारण खुद राजे इस स्थान को सौभाग्यशाली मानती हैं.

वहीं कांग्रेस के रणनीतिकार राजस्थान में भी राहुल गांधी का धार्मिक चेहरा सामने लाने का प्लान तैयार कर रहे हैं. कर्नाटक से शुरू हुआ यह सिलसिला अब राहुल की टीम का प्रमुख हथियार बन गया है. अगस्त के पहले पखवाड़े में शुरू होने वाली यात्रा खाटू श्याम जी के आशीर्वाद से शुरू होगी. किवदंति है कि जो सभी जगह से हारा हुआ हो, उसे खाटू श्याम जी सहारा देते हैं. रणनीतिकार मानते हैं कि अगर खाटू श्याम का सहारा मिला और शेखावटी के वोटर ने साथ दिया तो प्रदेश की सत्ता उनसे दूर नहीं रह पाएगी.

सिरफुट्टवल बनाम एंटीइकमबेंसी
मौसम भले ही सावन का हो लेकिन राजनैतिक तौर पर राजस्थान में आने वाले महिने खासे गर्माहट भरे रहने वाले हैं. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और बीजेपी इस जुगत में है कि कांग्रेस की सिरफुट्टवल के बीच अगर जनता के बीच बढ़त बना ली गई तो सत्ता की राह आसान हो जाएगी. वहीं कांग्रेस को आसरा एंटीइनकमबेंसी का है, पार्टी के रणनीतिकार मानते हैं कि उपचुनावों में बीजेपी की हार लिटमस टेस्ट थी और जनता अब सत्ता परिवर्तन चाहती है.

बीजेपी चारभुजा में अमित शाह को बुला रही है, कांग्रेस शेखावटी में राहुल गांधी को… तीसरे विकल्प का फिलहाल कहीं अस्तित्व नहीं दिख रहा. ऐसे में शह और मात के इस खेल में यह दोनों पार्टी ही मैदान में ताल ठोंक रही हैं. हालांकि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है, लेकिन प्रदेश का यह चुनाव कांग्रेस की सिरफुट्टवल और बीजेपी की एंटीइनकम्बेंसी के इर्दगिर्द ही घूमने वाला है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Type in
Details available only for Indian languages
Settings
Help
Indian language typing help
View Detailed Help