केंद्र सरकार नहीं करेगी सोशल मीडिया की निगरानी, नहीं बनाया जाएगा सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब

publiclive.co.in [EDITED BY SIDDHARTH SINGH]

नई दिल्‍ली (महेश गुप्‍ता/सुमित कुमार) : केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में जानकारी देते हुए कहा कि वो सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब स्थापित करने के प्रस्ताव को वापस ले रही है. लिहाजा केंद्र सरकार सोशल मीडिया की‍ निगरानी नहीं करेगी. इस तरह सोशल मीडिया कम्युनिकेशन हब स्थापित करने के खिलाफ दाखिल याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने निस्तारण कर दिया.

SC ने कहा था, इससे देश सर्विलांस स्टेट में तब्दील हो सकता है
दरअसल, पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगते हुए कहा था कि इससे देश सर्विलांस स्टेट में तब्दील हो सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सोशल मीडिया हब बनाने के फैसले पर कड़ी टिप्पणी की थी. कोर्ट ने कहा था कि ऑनलाइन डाटा की निगरानी के लिए गठित किया जा रहा हब निगरानी जैसी व्यवस्था होगी. सरकार नागरिकों के वाट्स एप संदेश को टैप करना चाहती है. कोर्ट ने सरकार से दो सप्ताह में इसपर जवाब मांगा था.

TMC विधायक ने खड़े किए थे सवाल
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस की विधायक महुआ मोइत्रा का कहना था कि सोशल मीडिया की निगरानी के लिए केंद्र यह कार्यवाही कर रहा है. इसके बाद ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम व ईमेल में मौजूद हर डेटा तक केंद्र की पहुंच हो जाएगी, जोकि निजता के अधिकार का यह सरासर उल्लंघन है. इससे हर व्यक्ति की निजी जानकारी को भी सरकार खंगाल सकेगी. इसमें जिला स्तर तक सरकार डेटा को खंगाल सकेगी.

बीईसीआइएल ने जारी किया था टेंडर
गौरतलब है कि हाल में केंद्रीय मंत्रालय के तहत काम करने वाले पीएसयू ब्रॉडकास्ट कंसल्टेंट इंडिया लि. (बीईसीआइएल) ने एक टेंडर जारी किया है. इसमें एक सॉफ्टवेयर की आपूर्ति के लिए निविदाएं मांगी गई हैं. सरकार इसके तहत सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाओं को एकत्र करेगी. अनुबंध आधार पर जिला स्तर पर काम करने वाले मीडिया कर्मियों के जरिए सरकार सोशल मीडिया की सूचनाओं को एकत्र करके देखेगी कि सरकारी योजनाओं पर लोगों का क्या रुख है.

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