तिरुमाला मंदिर में चढ़ावे की राशि में भारी गिरावट, 3 करोड़ की जगह चढ़ रहे 73 लाख

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तिरुपति (आंध्र प्रदेश): तिरुमाला के भगवान वेंकेटेश्वर मंदिर में चल रहे छह दिवसीय वैदिक अनुष्ठान ने यहां पवित्र ‘हुंडी’ में चढ़ने वाली दान राशि को बेहद प्रभावित किया है. रोजाना यहां करीब तीन करोड़ की दान राशि मिलती थी जिसमें रिकॉर्ड गिरावट देखी गई. रविवार को यह राशि महज 73 लाख रुपये पर सिमट गई.

मंदिर के अधिकारियों ने बताया कि मंदिर की हुंडी में सोने के आभूषणों और अन्य सामग्रियों के अलावा तीन करोड़ की नकद राशि नियमित तौर पर मिल जाती थी. लेकिन यहां चल रहे ‘अष्टबंधन बालालया महा समप्रोक्षणम’ अनुष्ठान की वजह से श्रद्धालुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया है. यह अनुष्ठान 12 साल में एक बार होता है और इसमें बड़े पुजारी ही हिस्सा लेते हैं.

घोटाला
इस बीच पिछले दिनों भारत के सबसे अमीर मंदिरों में से एक विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर में घोटाले के आरोप लगे हैं. मौजूदा मंदिर प्रशासन पर करोड़ों रुपए का घोटाला करने के आरोप लगे हैं. इन्हीं आरोपों के बीच मंदिर के मुख्य पुजारी को हटा दिया गया है. पुजारी रमन्ना दीक्षितुलु ने आरोप लगाया था कि तिरुपति मंदिर प्रशासन मंदिर में चढ़ावे का दुरुपयोग करता है.

मुख्य पुजारी रमन्ना ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मन्दिर के बोर्ड सदस्यों को सीएम चुनते हैं. रमन्ना का आरोप है कि मंदिर के रसोईघर जहां हजार साल से प्रसाद बन रहा था, उसे तुड़वाकर करोड़ों के प्राचीन आभूषण और जेवर-जवाहरात गायब कर दिये गये हैं. पुजारी रहे रमन्ना ने आरोप लगाया कि तिरुपति मंदिर के सौ करोड़ की राशि चंद्रबाबू नायडू ने मन्दिर के नियम विरुद्ध अपने राजनीतिक फैसले के लिये खर्च करवा दिए. इसी आरोप के बाद पुजारी रमन्ना दीक्षितुलु को हटा दिया गया है.

मालूम हो कि इस प्राचीन मंदिर में गरीबों के साथ बड़े-बड़े कारोबारी, फिल्मी सितारे और राजनेता दर्शन के लिए पहुंचते हैं. हर साल लाखों लोग तिरुमाला की पहाड़ियों पर उनके दर्शन करने आते हैं. तिरुपति के इतने प्रचलित होने के पीछे कई कथाएं और मान्यताएं हैं. इस मंदिर से बहुत सारी मान्यताएं जुड़ी हैं.

मान्यता है कि तिरुपति बालाजी इस मंदिर में अपनी पत्नी पद्मावती के साथ तिरुमला में रहते हैं. तिरुपति बालाजी मंदिर के मुख्य दरवाजे के दाईं ओर एक छड़ी है. कहा जाता है कि इसी छड़ी से बालाजी की बाल रूप में पिटाई हुई थी, जिसके चलते उनकी ठोड़ी पर चोट आई थी. मान्यता है कि बालरूप में एक बार बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था. इसके बाद से ही बालाजी की प्रतीमा की ठोड़ी पर चंदन लगाने का चलन शुरू हुआ.

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