अरुणाचल प्रदेश ने तैयार की चाय की सबसे कीमती किस्म, कीमत उड़ा देगी आपके होश

नई दिल्ली/गुवाहाटी : चाय की सामान्य किस्मों और उनकी कीमतों से तो हम सभी परिचित हैं. लेकिन देश के पूर्वी हिस्से में ऐसी चाय भी बिकती है, जिसकी कीमत सुनकर अच्छे अच्छे हैरान हो सकते हैं. अरुणाचल प्रदेश के दोन्यी पोलो टी एस्टेट ने दुनिया की सबसे कीमती चाय की किस्म ”गोल्डन नीडल्स टी” तैयार की है. इसकी कीमत का अंदाजा तब हुआ जब गुरुवार को गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर (जीटीएसी) ने वर्ल्ड रिकॉर्ड कीमत पर इसे बेचा. इस बेशकीमती चाय को 40 हजार रुपये प्रति किलोग्राम में बेचा गया. एक महीने में ये दूसरी बार है, जब जीटीएसी ने चाय की कीमत का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 जुलाई को ऑक्शन सेंटर ने असम में डिब्रूगढ़ के मनोहारी टी स्टेट में पैदा हुई विशेष आर्थोडॉक्स टी को 39001 रुपए प्रति किलोग्राम में बेचा था. इसी रिकॉर्ड को जीटीएसी ने गुरुवार (23 अगस्त 2018) को गोल्डन नीडल्स टी को 40 हजार प्रति किलोग्राम में बेचकर तोड़ दिया.

करीब 4700 वर्ष पहले हुई थी चाय की शुरुआत…

अपनी कीमत से दुनिया भर को हैरान कर देने वाली इस चाय को असम टी ट्रेडर्स को बेचा गया. ये असम के सबसे बड़े शहर गुवाहाटी सबसे पुरानी चाय की दुकानों में से है. इसके मालिक ललित कुमार जालान बताते हैं, अच्छी चाय की मांग बढ़ रही है और ऐसी चाय उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है. अब ये ”गोल्डन नीडल्स टी” ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट Absolutetea.in के जरिए बेची जाएगी.

गोल्डन नीडल्स टी, ऐसे तैयार होती है
”गोल्डन नीडल्स टी” की कीमत इतनी ज्यादा क्यों है. इसका जवाब हमें तब मिलता है, जब हमें इसे तैयार करने की विधि पता चलती है. इस टी को सिर्फ नई अंकुरित पत्तियों से बनाया जाता है. इस तरह की चाय की उत्पत्ति के लिए अरुणाचल से लगा चीन का युनान प्रांत को पहचाना जाता है. इस चाय को तैयार करने के लिए नई बड्स को बहुत ही सावधानी से तोड़ा जाता है. इनकी गोल्डन परत वाली पत्तियां मुलायम और मखमली होती हैं. इस गोल्डन टी बनने वाली चाय मीठी होती है. साथ ही इसकी खुशबू बेहद मोहक होती है.

दोन्यी पोलो टी एस्टेट के मैनेजर मनोज कुमार बताते हैं, ‘ऐसी चाय तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की जरूरत होती है. इसी टी की एक और किस्म सिल्वर नीडल्स वाइट टी 17,001 रुपये प्रति किलो बिकती है. ऐसी चाय तभी तैयार हो सकती है, जब चाय के बागान में सटीक कार्यकुशलता के साथ प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल हो.’

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