यूएस आर्मी के पूर्व कर्नल का बड़ा बयान, कहा- पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में अमेरिका की पींठ में छुरा घोंपा

publiclive.co.in [EDITED BY SIDDHARTH SINGH]

वॉशिंगटन: पिछले काफी सालों में अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों में कई बड़े हिचकोले आए हैं. अमेरिकी सेना के एक रिटायर्ड कर्नल ने पाकिस्तान के खिलाफ बयान देकर फिर चर्चा को गरमा दिया है. कर्नल लॉरेंस सेलिन ने एक अमेरिकी समाचार पोर्टल द डेली कॉलर की वेबसाइट के एक लेख में लिखा है कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान ने अमेरिका को हमेशा धोखा ही दिया है. यूं कहें कि पाकिस्तान ने अमेरिका की पीठ में छुरा भोंका है. उनका कहना है कि अक्टूबर 2001 में अफगानिस्तान में अमेरिका द्वारा बमबारी करने के तुरंत बाद पाकिस्तान की आईएसआई ने तालिबान लड़ाकों को हथियार और गोला-बारूद मुहैया कराए थे.

मुशर्रफ ने की थी बैठक
सेलिन, जो कि अफगानिस्तान, उत्तरी इराक और पश्चिम अफ्रीका के मानवीय मिशन में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, ने पोर्टल में लिखा है कि पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने आईएसआई के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट जनरल महमूद मोहम्मद और सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई थी, जिसमें इस बात पर सहमति हुई कि पाकिस्तान को अमेरिका को उसके तालिबान और अलकायदा के खिलाफ युद्ध में मदद नहीं करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का दोगलापन बीते 17 सालों से चला आ रहा है. मिलिट्री और आर्थिक मदद के रूप में अरबों डॉलर लेने वाले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और आतंकी गुटों का समर्थन कर अमेरिका का खून बहाया है.

पूर्व आईएसआई डायरेक्टर ने बताई थी रणनीति
पाकिस्तान के पूर्व आईएसआई डायरेक्टर लेफ्टिनेंट जनरल हामिद गुल, जिन्हें तालिबान के गॉडफादर के रूप में जाना जाता है, ने वर्ष 2015 में अपनी मौत से कुछ समय पहले एक उर्दू टीवी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में इसकी विस्तार से चर्चा की थी कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान की क्या रणनीति थी.

उसमें उन्होंने कहा कि एक दिन इतिहास यह बताएगा कि आईएसआई ने ही अमेरिका की मदद से अफगानिस्तान से रूस को बाहर किया और कहा कि एक दिन आईएसआई ने अमेरिका की मदद से अफगानिस्तान से अमेरिका को बाहर कर दिया. इस पर पाकिस्तान के दर्शकों ने अमेरिका की हंसी उड़ाई और एक तरह से आईएसआई की सराहना की.

तालिबान को पाकिस्तानी मदद खतरनाक
सेलिन आगे लिखते हैं कि जबतक पाकिस्तान में तालिबान की संरचना मौजूद रहेगी, तबतक अमेरिका या सीआईए का कोई भी विशेष अभियान तालिबान को अफगानिस्तान में नहीं हरा सकेगा. उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 के उलट तालिबान का अफगानिस्तान में खुलासा नहीं हुआ, बल्कि इसके पाकिस्तान में इसके फलने-फूलने, भर्ती, प्रशिक्षण, वित्तीय मदद और नियंत्रण केंद्र होने का खुलासा हुआ.

यह किसी से छुपा नहीं है कि आईएसआई कर्मचारी, स्थानीय निवासी और अन्य समूह अफगान सीमा पर तालिबान की मदद कर रहे थे. अफगानिस्तान के गजनी प्रांत में हुए हाल के तालिबान हमले में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक मारे गए. माना जा रहा है कि ये लोग बड़ी संख्या में तालिबान के साथ लड़ रहे थे.

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