सीलिंग मामला: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई झाड़, मांगी रिपोर्ट

publiclive.co.in [EDITED BY SIDDHARTH SINGH]

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी इलाकों में इंडस्ट्री चलाये जाने को लेकर नाराजगी जताई है. 2004 के आदेश को लागू करने में हुई कोताही पर रिपोर्ट मांगी है और दिल्ली के CP तीनों MCD के कमिश्नर और DDA के VC से कहा कि रिपोर्ट पेश कर बताएं की इंडस्ट्री को रिहायशी इलाके से कहीं और स्थान्तरित करने पर क्या कार्रवाई हुई है.

दिल्ली में सीलिंग मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, डीडीए और दक्षिण दिल्ली नगर निगम को कड़ी झाड़ लगाई है. जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आप अवैध निर्माणों को नियमित करने की आशा दिलाकर जिंदगियों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. लोग मर रहे हैं. लगता है आप लोगों ने कमला मिल हादसे से सबक नहीं लिया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी इलाकों में इंडस्ट्री चलाये जाने को लेकर नाराजगी जताई कोर्ट ने 2004 के आदेश को लागू करने में हुई कोताही पर रिपोर्ट मांगी है. नाराज कोर्ट ने आदेश दिया था कि दिल्ली के CP तीनो MCD के कमिश्नर और DDA के VC से कहा कि रिपोर्ट पेश कर बताये की इंडस्ट्री को रिहायशी इलाके से कही और स्थान्तरित करने पर क्या कार्रवाई हुई.

कोर्ट मित्र ने जब अदालत को बताया कि SDMC सरकुलर जारी कर संशोधित मास्टर प्लान को 28 अगस्त से लागू करने जा रही है. इस पर कोर्ट ने कहा कि DDA और SDMC के वकील तक तो कोर्ट में पेश नहीं ही रहे हैं. उन्हें अदालत की परवाह तक नहीं है. अदालत के सख्त रुख को भांपते हुए ASG नाडकर्णी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि शहरी विकास मंत्रालय के सेक्रेटरी को वह सलाह देंगे कि वह अगली सुनवाई तक इसे लागू न करें.

इससे पहले मोनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई. रिपोर्ट में कहा गया कि बुराड़ी, विश्वास नगर और कड़कड़डूमा मेट्रो स्टेशनों के पास DDA की जमीन पर जो अतिक्रमण हुआ है. उस पर कार्रवाई की गई है और अतिक्रमण हटा दिया गया है.

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