C-60 कमांडो बने नक्सलियों के लिए काल, सभी नक्सल प्रभावित राज्यों में उतारने की योजना

publiclive.co.in [EDITED BY SIDDHARTH SINGH]

नई दिल्ली : देश में सुरक्षाबलों के लिए सबसे बड़ी समस्या और खतरा नक्सलवाद बना हुआ है. देश के अर्धसैनिक बलों को आतंकवाद से ज्यादा नुकसान नक्सली ऑपरेशन में उठाना पड़ा है. लेकिन C-60 कमांडो अब नक्सलियों की कमर तोड़ रहे हैं. इनकी रणनीति इतनी मारक है कि सिर्फ दो ऑपरेशन में इन्होंने बिना किसी नुकसान के 39 नक्सलियों को मार गिराया है. महाराष्ट्र में अभी सिर्फ जिला स्तर पर इनका गठन किया गया है, लेकिन इनके नतीजों ने सभी को चौंका कर रख दिया है. इसलिए अब केंद्र की ओर से कहा जा रहा है कि देश के बाकी के नक्सल प्रभावित इलाकों में इसी तर्ज पर नक्सलियों से लड़ा जाए.

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक इसके लिए गृह सचिव राजीव गौबा ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात अर्धसैनिक बलों के डीजी और डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि वह C-60 कमांडो की रणनीति पर पर काम करें और नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाएं. C-60 कमांडो एक जिला स्तर पर गठित की गई फोर्स है. महाराष्ट्र पुलिस ने 1989-90 में नक्सलियों से लड़ने के लिए एक विशेष टीम बनाई थी. राज्य के सबसे ज्यादा नक्सली प्रभावित इलाका गढ़चिरौली में स्थानीय लोगों को चुनकर इसका गठन किया गया.

करीब 29 साल पहले आया था ये विचार
इस जिला स्तरीय फोर्स का आइडिया सबसे पहले 1989-90 में आईपीएस अधिकारी केपी रघुवंशी ने दिया था. इनके परिणाम अब मिलने शुरू हुए हैं. इन कमांडो ने इसी साल अप्रैल में दो अलग-अलग मुठभेड़ में 39 नक्सलियों को मार गिराया था और इस अभियान में इस बल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था. गृहमंत्रालय इस फोर्स से इतना प्रभावित है कि उसने अब सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी से कहा है कि वह भी इस दिशा में काम शुरू करे. इस विचार को देने वाले केपी रघुवंशी अब रिटायर हो चुके हैं. वह कहते हैं कि इस सेना में स्थानीय आदिवासी युवाओं को मौका देने का बड़ा फायदा है. वह उस इलाके से अच्छे से परिचित होते हैं. इसके अलावा वह स्थानीय भाषा भी समझते हैं. वह कहते हैं कि इस फोर्स में ऐसे लेागों को भर्ती किया जाता है, जिन्होंने अपनों को नक्सली ऑपरेशन में खो दिया है. इसी कारण सी-60 को स्थानीय लोगों का भी सपोर्ट मिलता है. वह उनके साथ जुड़ाव महसूस करते हैं.

तेलंगाना, आंध्रप्रदेश की ग्रेहाउंड्स और ओडिशा की एसपीजी भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में ऑपरेशन की दक्षता रखती है, लेकिन वह राज्य स्तर की फोर्स है. सीआरपीएफ ने छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, ओडिशा जैसे राज्यों के लिए कोबरा बटालियन बनाई है. इसके अलावा अभी हाल में छत्तीसगढ़ में बस्तरिया बटालियन का गठन किया गया है. इसमें 534 लोगों को भर्ती किया गया है. इसमें 189 महिलाएं हैं. इन्हें विशेष गोरिल्ला युद्ध की के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है.

क्या है C-60 कमांडो
इसकी शुरुआत महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित क्षेत्र गढ़चिरोली से हुई. इसमें पहले 60 आदिवासी लोगों को भर्ती किया गया. अब इसकी यूनिट में 800 लोग शामिल हैं. C-60 के कमांडो को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है. ये सभी स्थानीय भाषा जैसे गोंडी तथा मराठी बोलते हैं. इन कमांडो को आधुनिक हथियार और गैजेट्स चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है. ये अपने गांव, संस्कृति और भाषा से परिचित होते हैं, इसलिए इनकी खुफिया क्षमता भी कमाल की होती है. स्थानीय लोगों के बीच आने जाने में इन्हें परेशानी नहीं होती. C-60 बल का मुखिया भी आदिवासी ही होता है.

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