मध्‍य प्रदेश: आदिवासी वोटों पर कांग्रेस की नजर, इन पार्टियों से करना चाहती है गठबंधन

publiclive.co.in [EDITED BY SIDDHATH SINGH]

नई दिल्‍ली: आदिवासियों के बदले हुए रुख ने मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के सियासी समीकरणों को बिगाड़ दिया है. इस बिगड़े हुए सियासी समीकरण ने कांग्रेस ही नहीं, बीजेपी की चिंता भी बढ़ा रखी है. बीजेपी को चिंता यह है कि ब‍ड़ी मुश्किल से उनके पक्ष में आया यह बड़ा वोट बैंक कहीं इन चुनावों में उनसे छिटक न जाए. वहीं कांग्रेस किसी भी कीमत पर अपने पुराने वोट बैंक को वापस हासिल करना चाहता है. उधर, बीजेपी और कांग्रेस के माथे पर पड़ी चिंता की लकीरों को आदिवासी नेता पढ़ने में कामयाब रहे हैं. लिहाजा, उन्‍होंने समर्थन के एवज में मोलभाव करना शुरू कर दिया है. कांग्रेस अभी भी इस मोलभाव के जरिए आदिवासी नेताओं को अपने पक्ष में लाने की कवायद कर रही है. वहीं, बीजेपी ने आदिवासी वोटों को अपने पक्ष में बनाए रखने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया है.

2003 में कांग्रेस से दूर हुआ आदिवासी वोट बैंक
मध्‍य प्रदेश विधानसभा की करीब 47 सीटों पर आदिवासी वर्ग का बोलबाला है. 2003 के विधानसभा चुनावों से पहले तक इन सीटों पर कांग्रेस के उम्‍मीदवार जीत दर्ज करते आए हैं. लेकिन, 2003 के विधानसभा के चुनावों में समीकरण बदल गए. कांग्रेस के इस गढ़ में बीजेपी सेंध लगाने में कामयाब रही. बीजेपी ने आदिवासी बाहुल्‍य वाली अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज की. 2008 और 2013 के मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनावों में आदिवासी इलाकों से बीजेपी का विजय अभियान लगातार जारी रहा. बीते चुनावों की बात करें तो कांग्रेस आदिवासी बाहुल्‍य इलाकों के अंतर्गत आने वाली महज 15 सीटों पर ही जीत दर्ज कर सकी. 2018 के मध्‍य प्रदेश विधान सभा चुनावों में कांग्रेस अपने पुराने गढ़ में एक बार फिर वापसी करना चाहती है. लिहाजा, उसने आदिवासी बाहुल्‍य इलाकों में प्रभाव रखने वाले राजनैतिक दलों के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है.

कांग्रेस इन दो दलों के साथ करना चाहती है गठबंधन
आदिवासी इलाकों में वापसी करने के लिए कांग्रेस जय आदिवासी युवा संगठन (जयस) और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से गठबंधन करने की कवायद में लगी हुई है. इन दोनों दलों का साथ पाकर कांग्रेस बालाघाट, बैतूल, अमरिया, छिंदवाड़ा, मंडला, शहडोल, डिंडोली और अनूपपुर विधानसभा में अपनी दावेदारी मजबूत करना चाहती है. वहीं, कांग्रेस की मजबूरी को भांपते हुए दोनों दलों ने कांग्रेस के साथ मोलभाव शुरू कर दिया है. गठबंधन के लिए शुरू हुई प्रारंभिक बातचीत में जय आदिवासी युवा संगठन ने कांग्रेस से 47 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने 50 सीटों की मांग कर दी है. फिलहाल, कांग्रेस न ही दोनों दलों को 97 सीटें देने के लिए तैयार है और न ही गठबंधन की संभावनाओं को खत्‍म करने के पक्ष में है.

गठबंधन के लिए समाधान निकालेंगे ये दो कांग्रेसी नेता
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि आदिवासी इलाकों में जीत हासिल किए बगैर सत्‍ता तक पहुंचना मुमकिन नहीं है. लिहाजा, कांग्रेस किसी भी कीमत में दोनों राजनैतिक दलों को अपने साथ लाना चाहती है. लिहाजा, कांग्रेस आला कमान ने दोनों राजनैतिक दलों को मनाने की जिम्‍मेदारी अनुसूचित जनजाति विभाग के अध्‍यक्ष अजय शाह और सांसद कांतिलाल भूरिया को सौंपी है. अजय शाह, जय आदिवासी युवा संगठन के नेताओं से संपर्क कर बीच का रास्‍ता निकालेंगे, वहीं सांसद कांतिलाल भूरिया गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के नेताओं से संपर्क करेंगे. दोनो कांग्रेसी नेताओं की कोशिश होगी कि दोनों दलों को मनाकर कांग्रेस के पक्ष में ला सकें. जिससे आगामी विधानसभा चुनावों में आदिवासी वोटों का रुझान कांग्रेस की तरफ किया जा सके.

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