गाड़ियों के शोर से तेजी से बूढ़े हो रहे हैं पक्षी, शोध में ये तथ्य आए सामने

publiclive.co.in.[EDITED BY SIDDHARTH SINGH]

नई दिल्ली : शहरों में ट्रैफिक के चलते होने वाले वायु प्रदूषण से पक्षियों की उम्र सामान्य से अधिक तेजी से बढ़ने लगती है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में ये तथ्य सामने आए हैं. जेब्रा फिंच चिड़िया पर हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि जिन चिड़ियों को गाड़ियों के शोर के बीच रखा गया उनकी उम्र तेजी से बढ़ने लगी. इसी तरह कुछ समय पहले हुए एक शोध में पाया गया था कि शहरों में पाई जाने वाली चिड़ियों की उम्र उनकी ही प्रजाति की गांव में रहने वाली चिड़ियों से कम होती है.

आवाज के प्रति संवेदनशील होती है जेब्रा फिंज
जर्मनी स्थित मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के पक्षी विभाग व उत्तरी डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि गाड़ियों का शोर चिड़ियों की उम्र पर असर डालता है. शोधकर्ताओं ने मूलरूप से ऑस्ट्रेलिया में पाई जाने वाले पक्षी जेब्रा फिंच पर शोध किया. ‘ फ्रंटियर्स इन जूलॉजी ‘ शोधपत्र में छपे इस शोध में बताया गया है कि जब जेब्रा फिंच पक्षी को गाड़ियों के शोर के बीच रखा गया तो इस पक्षी ने मात्र 120 दिन में ही अपना घोसला छोड़ दिया. इस शोध में शामिल डॉक्टर एड्रियाना डोराडो-कोर्रिया ने कहा कि हमारा यह शोध साफ बताता है कि शहरों में होने वाला शोर, रौशनी और केमिकल प्रदूषण के चलते जेब्रा फिंज की आयु तेजी से बढ़ने लगती है. उन्होंने बताया कि इस पक्षी के अंड़े देने के बाद 120 दिन काफी महत्वपूर्ण होते हैं. इस दौरान यह चिड़िया गाड़ियों के शोर से सबसे अधिक प्रभावित होती है. जबिक यह अवधि इस पक्षी के लिए काफी अधिक महत्वपूर्ण होती है. इस दौरान यह चिड़िया गाना – गाना सीखती है. ऐसे समय में यह चिड़िया आवाजों के प्रति बेहद संवेदनशील होती है.

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ध्वनि के प्रदूषण से चेतावनी नहीं समक्ष पाते पक्षी
पिछले अध्ययनों में पाया गया है कि उद्योगों या ट्रैफिक से होने वाले ध्वनि प्रदूषण से इस चिड़िया का गाने का तरीका बदल जाता है. इससे इस चिड़िया के लिए अपने मेल साथी को आकर्षित करना और अपने इलाके को बचाना मुश्किल हो जाता है. वर्ष 2016 में हुए एक अध्ययन में पाया गया था कि ट्रैफिक से होने वाले ध्वनि प्रदूषण के चलते चिड़ियों के लिए अपने साथियों द्वारा दी गई खतरे की चेतावनी को समझ पाना भी मुश्किल हो जाता है.

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