ISRO जासूसी मामले में केरल के पुलिस वालों को कोट में घसीटेगी ये मालदीव की महिला

publiclive.co.in[Edited by RANJEET]
इसरो की जासूसी के आरोपों से इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायण को सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त करार दिए दिया है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने वैज्ञानिक को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए जाने का आदेश दिया है. न्यायालय के इस आदेश के बाद इसी मामले में 1994 में गिरफ्तार की गई मालदीव की नागरिक मरियम रशीदा ने अंग्रेसी के अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को फोन कर के कहा कि वो भी जल्द ही इस मामले में उन्हें गिरफ्तार करने वाले पुलिस वालों के खिलाफ मुकदमा करेंगी और मुआवजे की मांग करेंगी. हालांकि वह इस समय कहां रह रही हैं और क्या कर रही हैं इस बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी.

कस्टडी में ले कर काफी टॉर्चर किया गया
उन्होंने फोन पर बताया कि नंबी नारायण का नाम लेने के लिए उन्हें कस्टडी में ले कर काफी टॉर्चर किया गया. उन्होंने कहा कि मैं उन पुलिस वालों को नहीं छोडुंगी. मरियम और उनके साथ अन्य छह लोगों को सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1998 में भारत के रॉकेट सीक्रेट पाकिस्तान को बेचने के आरोप से मुक्त करते हुए बरी कर दिया था. वहीं शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर से नारायण को मुआवजा देने के आदेश पर राशिदा ने कहा कि नारायाण के करियर को जो नुकसान हुआ है और उन्होंने जो यातनाएं झेली हैं उसके लिए यह मुआवजा बेहद कम है.

सीबीआई ने दे दी थी क्लोजर रिपोर्ट
वहीं सीबीआई की ओर से केंद्र और केरल सरकार को यह सुझाव दिए गए थे कि ऐसे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए जिन्होंने नारायण व अन्य आरोपियों को टॉर्चर किया. इस मामले में राशिदा को भी लगभग साढ़े तीन साल केरल की जेल में बताने पड़े थे. राशिदा सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के आदेश के पहले लगभग 1994 से 1998 तक जेल में थीं. इस मामले में सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट 1998 में दाखिल कर दी थी. इसके बावजूद राशिदा को जेल में रहना पड़ा क्योंकि केरल सरकार ने राशिदा पर अन्य आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में फिर से अपील की थी. राशिदा कहती हैं कि केरल पुलिस और आईबी के लोगों ने मुझे काफी यातनाएं दीं.

मामले की जांच कर रहे टीम के प्रमुख पर फंसाने का आरोप
ममाले की जांच कर रही टीम के प्रमुख सिबी मैथ्यूज जो बाद में केरल के डीजीपी भी हो गए थे और पुलिस की स्पेशल ब्रांच के इंस्पेक्टर एस विजयन पर राशिदा ने उन्हें फंसाने का आरोप लगाया. राशिदा ने कहा कि उनका वकील जल्द ही इस मामले में न्यायालय में अपील करेगा. हालांकि उन्होंने कहा कि वो फिलहाल भारत नहीं आने वाली हैं. उन्होंने कहा कि वो फिलहाल कानूनी सलाह ले रही हैं.

इलाज कराने भारत आईं थीं राशिदा
राशिदा बताती हैं कि वो उस दौरान स्वास्थ्य सेवाओं और अपने एक मित्र की बेटी की पढ़ाई के लिए भारत आईं थीं. उसी दौरान राशिदा ने इंस्पेक्टर विजयन से मिल कर कहा था कि मालदीव में फैले प्लेग के चलते वो फिलहाल वहां नहीं जाना चाहती हैं. ऐसे में विजयन ने उनका पासपोर्ट ले लिया और उन्हें जासूसी के आरोप में फंसा दिया. उन्होंने बताया कि उन्हें कस्टडी में काफी बुरी तरह से पीटा गया.

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