एयर इंडिया की फ्लाइट का सिस्टम हवा में फेल

publiclive.co.in [EDITED BY SIDDHARTH SINGH]

भोपाल: आप फ्लाइट में हो और उसका सिस्टम फेल हो जाए. मौसम भी खराब हो और प्लेन का ईंधन भी खत्म होने वाला हो, निश्चित आप ईश्वर को याद करेंगे. ऐसा ही कुछ नजारा एयर इंडिया की फ्लाइट में बैठे यात्रियों के लिए था. 11 सितंबर को एयर इंडिया की एक इंटरनेशनल फ्लाइट इन सभी समस्याओं से घिरी थी. यात्री अपनी जान को लेकर यकीनन ईश्वर से प्राथना कर रहे होंगे. लेकिन, एयर इंडिया के जाबांज पायलट ने 370 यात्रियों को सुरक्षित पहुंचा दिया. उड़ान के दौरान विमान में इलेक्ट्रिक खराबी आ गई. मौसम भी खराब था और विमान का ईंधन लगभग खत्म हो चुका था.

न्यूयॉर्क जा रही थी फ्लाइट
11 सितंबर को एयर इंडिया की फ्लाइट बोइंग 777-300 AI-101 नई दिल्ली से न्यूयॉर्क के जॉन एफ केनेडी हवाई अड्डे जा रही थी. यह फ्लाइट दुनिया के सबसे लंबे डायरेक्ट रूट के विमानों से एक है. 15 घंटे का सफर यह फ्लाइट बिना रुके करती है. 11 सितंबर को भी कुछ ऐसा ही था. फ्लाइट नई दिल्ली टेक ऑफ कर चुकी थी. 14 घंटे से ज्यादा बीत चुके थे. यात्रियों को अंदाजा भी नहीं था कि उन्हें आखिरी चंद मिनटों में मौत सामने दिखाई देगी. लैंडिंग से पहले के आखिरी 38 मिनट पायलट के लिए भी किसी चुनौती से कम नहीं रहे.

पायलट ने कहा ‘हम फंस गए हैं’
एयर इंडिया की नयूयॉर्क जा रही इस फ्लाइट के चीफ कैप्टन रुस्तम पालिया थे और उसके साथ सेंकंड कमांड इन चीफ सुशांत सिंह थे. रुस्तम पालिया ने विमान में आई खराबी के बाद न्यूयॉर्क एटीसी से संपर्क में थे. वक्त बीत रहा था और कोई समाधान नहीं. पायलट ने एटीसी से कहा ‘ऑटो लैंड उपलब्ध नहीं है, कई इंस्ट्रूमेंट फेल हो चुके हैं.’ एटीसी भी अपनी ओर से लगातार कोशिश कर रही थी. लेकिन, इस बीच पायलट रुस्तम ने कहा ‘हम फंस गए हैं, फ्यूल भी नहीं है’

लैंडिंग इंस्ट्रूमेंट हो गए थे फेल
एयर इंडिया का यह विमान (बोइंग 777-300) सबसे एडवांस्ड विमानों में से एक है. लेकिन, उस दिन बोइंग 777-300 के लैंडिंग सिस्टम के तीनों इंस्ट्रूमेंट फेल हो गए थे. हालांकि, पायलट ने रेडियो अल्टीमीटर और ट्रैफिक कोलिजन का इस्तेमाल कर कुछ देर तक विमान को बचाए रखा. लेकिन, पायलट के मुताबिक, ऑटो लैंड, विंडशियर सिस्टम, ऑटो स्पीड ब्रेक और ऑग्जिलरी पॉवर यूनिट्स ने भी काम करना बंद कर दिया था. मतलब यह था कि विमान को मैनुअली ही लैंड कराना होगा. क्योंकि, लैंडिंग में मदद के लिए बनाया गया हर सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका था.

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न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर नहीं हुई लैंडिंग
खराब मौसम की वजह से पायलट ने न्यूयॉर्क के जॉन एफ केनेडी एयरपोर्ट पर लैंडिंग की जगह नयूजर्सी के नेवार्क एयरपोर्ट पर विमान को लैंड कराने का फैसला किया. पायलट के सामने मुसीबत यह थी कि ईंधन कम होने की वजह से वह मौसम के सही होने का इंतजार नहीं कर सकते थे.

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सुरक्षित कराई लैंडिंग
पायलट रुस्तम पालिया ने इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम के बिना ही विमान के वर्टिकल और लेटरल नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए विमान को सुरक्षित नेवार्क एयरपोर्ट पर उतारा. यह बिल्कुल अलग ही तरह की लैंडिंग थी. लैंडिंग के यह तरीका पायलट्स को कहां से मिला कुछ पता नहीं, क्योंकि एयर इंडिया इसकी ट्रेनिंग नहीं देती. वहीं, विमान बनाने वाली कंपनी बोइंग की मैन्युफैक्चरिंग गाइडलाइन में भी इस तकनीक का जिक्र नहीं है.

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