अब स्मार्टफोन से पानी की शुद्धता कितनी है होगी जांच,बीमारियों से मिलेगी निजात

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वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने स्मार्टफोन एवं इंकजेट प्रिंटर से बनाए गए एक लैंस का इस्तेमाल करते हुए कम दम वाली एक प्रणाली विकसित की है जो नल के पानी में सीसे (लैड) के उस स्तर का पता लगा पाने में सक्षम है जिसे आम तौर पर खतरनाक माना जाता है. इस प्रणाली में नैनो-कलरीमेट्री (रंग द्वारा रासायनिक विश्लेषण) और स्मार्टफोन माइक्रोस्कोप प्लेटफॉर्म में समेकित डार्क-फील्ड माइक्रोस्कोपी को साथ जोड़ा गया है जो अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों से नीचे के स्तर को मालूम करते हैं. अमेरिका के ह्यूस्टन विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर वे चुआन शिह ने कहा कि यह प्रणाली तेज, कम कीमत वाली है और पेयजल में सीसे की मात्रा का पता लगाने में सक्षम है.

सीसे की कम मात्रा भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है खासकर कि छोटे बच्चों में तंत्रिका संबंधी समस्या पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है. ईपीए मानकों के हिसाब से सीसे का स्तर पेयजल में प्रति अरब 15 हिस्से से नीचे होना चाहिए और शिह ने कहा कि वर्तमान में उपलब्ध जांच किट उस स्तर तक सीसे की मौजूदगी का सटीक पता लगाने में सक्षम नहीं हैं. इस प्रणाली का विस्तृत ब्यौरा ‘एनालिटिकल केमिस्ट्री’ पत्रिका में दिया गया है.

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