रात 1 बजे 3 सीनियरों को नजरअंदाज कर जूनियर को बनाया गया CBI का बॉस

publiclive.co.in [edited by RANJEET]

सीबीआई के इतिहास में यह पहला मौका है कि नंबर-1 और नंबर-2 की हैसियत रखने वाले अधिकारियों में मचे घमासान के बीच सरकार ने इनको जबरन छुट्टी पर भेज दिया. सूत्रों के मुताबिक रात एक बजे जारी हुए सरकारी आदेश के बाद सीबीआई के नए अंतरिम निदेशक के रूप में एम नागेश्‍वर राव की नियुक्ति के साथ ही तकरीबन एक दर्जन अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारियों का ट्रांसफर कर दिया गया.

1. उस सरकारी आदेश में कहा गया कि प्रधानमंत्री की अगुआई वाली नियुक्ति समिति ने मंगलवार की रात संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को तत्काल प्रभाव से सीबीआई निदेशक के पद का प्रभार दिया. इस आदेश का मतलब यह है कि सरकार ने सीबीआई के पदानुक्रम में संयुक्त निदेशक से वरिष्ठ स्तर यानी अतिरिक्त निदेशक रैंक के तीन अधिकारियों को दरकिनार कर नागेश्वर राव को एजेंसी के निदेशक का प्रभार दिया.

2. जिन तीन अतिरिक्त निदेशकों को दरकिनार किया गया है उनमें एके शर्मा भी शामिल हैं. राकेश अस्थाना की ओर से की गई शिकायत में शर्मा का नाम सामने आया था. उसके बाद सीबीआई हेडक्‍वार्टर को सील कर दिया गया.

3. केंद्र सरकार ने विवादों में उलझे सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से सारे अधिकार वापस ले लिए.

4. सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने छुट्टी पर भेजने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. उनकी अर्जी पर कोर्ट 26 अक्टूबर को सुनवाई करने पर सहमत हो गया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने वर्मा की इस दलील पर विचार किया कि केंद्र की ओर से उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले के खिलाफ दायर अर्जी पर तुरंत सुनवाई किए जाने की जरूरत है. सीबीआई निदेशक वर्मा ने संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को जांच एजेंसी का अंतरिम प्रमुख नियुक्त किए जाने के फैसले को भी चुनौती दी है.

5. इसके साथ ही सीबीआई ने अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही टीम में बड़े बदलाव कर दिए हैं. अब इस जांच टीम में बिल्कुल नए चेहरे शामिल किए गए हैं. जांच अधिकारी से लेकर पर्यवेक्षण स्तर तक के अधिकारी बदल दिए गए हैं.

6. सीबीआई प्रमुख का प्रभार संभालने वाले 1986 बैच के ओड़िशा कैडर के आईपीएस अधिकारी एम. नागेश्वर राव ने पुलिस अधीक्षक के रूप में सतीश डागर को अस्थाना के खिलाफ दर्ज मामले की जांच का जिम्मा सौंपा है. डागर इससे पहले डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ मामलों की जांच कर चुके हैं.

7. पुलिस अधीक्षक डागर की ओर से की जाने वाली जांच के पहले पर्यवेक्षण अधिकारी होंगे डीआईजी तरुण गाबा, जिन्होंने व्यापमं घोटाले के मामलों की जांच की थी. संयुक्त निदेशक स्तर पर वी. मुरुगेशन को लाया गया है. अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाले की जांच में मुरुगेशन पर भरोसा जताया था. पिछले जांच अधिकारी डीएसपी एके बस्सी को ”जनहित” में ”तत्काल प्रभाव” से पोर्ट ब्लेयर भेज दिया गया है. अस्थाना ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) से की गई शिकायत में आरोप लगाया था कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के निर्देश पर बस्सी उनके खिलाफ ‘‘भटकाने वाली जांच’’ कर रहे हैं.

8. एक अन्य आदेश में सीबीआई ने संयुक्त निदेशक (नीति) अरुण कुमार शर्मा का तबादला कर उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड की जांच कर रही मल्टी-डिसिप्लीनरी मॉनिटरिंग एजेंसी (एमडीएमए) के संयुक्त निदेशक पद पर तैनात किया है. वरिष्ठ अधिकारी ए. साई मनोहर का तबादला कर उन्हें चंडीगढ़ जोन का संयुक्त निदेशक बनाया गया है जबकि डीआईजी आर्थिक अपराध-तीन के पद पर कार्यरत अमित कुमार संयुक्त निदेशक (नीति) का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे.

9. सरकार का पक्ष रखते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बुधवार को कहा कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को हटाने का निर्णय सरकार ने सीवीसी की सिफारिशों के आधार पर लिया. उन्होंने इस बात पर जोर देकर कहा कि एजेंसी की संस्थागत ईमानदारी और विश्वसनीयता को कायम रखने के लिए यह अत्यंत आवश्यक था. जेटली ने बताया कि केंद्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी) ने ये सिफारिश बीती शाम को की थी.
जेटली ने कहा कि देश की अग्रणी जांच एजेंसी के दो शीर्ष अधिकारियों के आरोप-प्रत्यारोप के कारण बहुत ही विचित्र तथा दुर्भाग्यपूर्ण हालात बने हैं.

उन्होंने कहा कि आरोपों की जांच विशेष जांच दल करेगा और अंतरिम उपाय के तौर पर दोनों को अवकाश पर रखा जाएगा. मंत्री ने कहा कि यह हालात सामान्य नहीं हैं और आरोपियों को उनके ही खिलाफ की जा रही जांच का प्रभारी नहीं होने दिया जा सकता.

उन्होंने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के उन आरोपों को भी खारिज किया जिसमें कहा गया कि वर्मा को इसलिए हटाया गया क्योंकि वह राफेल लड़ाकू विमान सौदे की जांच करना चाहते थे. जेटली ने कहा कि इन आरोपों को देखते हुए लगता है कि उन्हें (विपक्षी दलों को) यह भी पता चल रहा था कि संबंधित अधिकारी के दिमाग में क्या चल रहा है. इससे उस व्यक्ति की ईमानदारी पर अपने आप ही सवाल खड़े होते हैं, जिसका कि वे समर्थन करने की कोशिश कर रहे हैं.

10. इससे पहले अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सीबीआई ने 15 अक्टूबर को राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि एक मामले के आरोपी को क्लीन चिट देने की एवज में उन्होंने उससे कथित तौर पर रिश्वत ली. कथित रिश्वत देने वाले सतीश सना के बयान पर यह केस दर्ज किया गया था. सना रिश्वतखोरी के एक अलग मामले में जांच का सामना कर रहा है, जिसमें मांस कारोबारी मोइन कुरैशी की कथित संलिप्तता है.
इससे करीब दो महीने पहले राकेश अस्थाना ने सीबीआई निदेशक वर्मा के खिलाफ की गई शिकायत में आरोप लगाया था कि सना ने राहत पाने के लिए वर्मा को रिश्वत के तौर पर दो करोड़ रुपए दिए.

सीबीआई ने अस्थाना की टीम में डीएसपी रहे देवेंदर कुमार को भी गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसी ने मंगलवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया था कि हाई-प्रोफाइल मामलों की आड़ में सीबीआई में एक ‘‘वसूली रैकेट’’ चलाया जा रहा था.

आलोक वर्मा Vs राकेश अस्‍थाना
1. सीबीआई के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि इसके दो सबसे बड़े अधिकारी कलह में उलझे हैं. दोनों आला अधिकारियों की कलह उस वक्त सामने आई जब आलोक वर्मा ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के समक्ष तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक अस्थाना की विशेष निदेशक पद पर तरक्की का विरोध किया.

2. आलोक वर्मा के विरोध को दर्ज तो किया गया, लेकिन सीवीसी ने एकमत से विशेष निदेशक पद के लिए अस्थाना के नाम को मंजूरी दे दी, जिससे वह जांच एजेंसी में दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी बन गए. एनजीओ कॉमन कॉज ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर अस्थाना को विशेष निदेशक बनाए जाने को चुनौती दी थी.

3. विजय माल्या, अगस्ता वेस्टलैंड और हरियाणा में जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामले सहित कई संवेदनशील केस की जांच कर रही एसआईटी के प्रभारी रहे राकेश अस्थाना ने 24 अगस्त को वर्मा के खिलाफ एक सनसनीखेज शिकायत कर आरोप लगाया कि उन्होंने एक मामले के आरोपी से दो करोड़ रुपए की कथित रिश्वत ली. अस्थाना ने वर्मा के खिलाफ 10 और मामलों में भ्रष्टाचार एवं अनियमितता के आरोप लगाए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि वर्मा ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के परिसरों पर छापेमारी रोकने की कोशिश की थी. सरकार ने यह मामला सीवीसी के हवाले कर दिया था जिसने अस्थाना की शिकायत में दर्ज मामलों की फाइलें तलब की.

4. अपने जवाब में वर्मा ने आयोग को बताया कि कम से कम छह मामलों में अस्थाना की भूमिका जांच के दायरे में है. इसमें एक मामला गुजरात स्थित स्टर्लिंग बायोटेक की ओर से कर्ज न चुकाने से संबंधित है. उन्होंने सीवीसी को यह भी बताया कि उनकी गैर-मौजूदगी में दूसरे सबसे वरिष्ठ अधिकारी अस्थाना सतर्कता आयोग की बैठकों में उनका प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते.

5. अस्थाना ने सरकार से दखल देने का अनुरोध किया था. उन्होंने कहा था कि वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच कराई जाए. वर्मा और अस्थाना से जुड़े मामलों की सूचनाओं का जब आधिकारिक स्तर पर आदान-प्रदान हो रहा था, उसी वक्त उन सूचनाओं को मीडिया में भी लीक किया जा रहा था जिससे दोनों अधिकारियों के बीच की कलह खुलकर सामने आ गई.

सीबीआई के पूर्व अधिकारियों ने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर बताया कि यह स्थिति ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ है और इससे विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण से जुड़े मामलों पर असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी के आला अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर अब आरोपी दलील दे सकते हैं कि उनके खिलाफ लगे आरोप प्रेरित हैं.

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