ड्वेन ब्रावो ने सुपर-50 मैच में टेनिस बॉल से कर दी बॉलिंग

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वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के खिलाड़ी ड्वेन ब्रावो ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट जगत को अलविदा कह दिया है. पिछली दो साल से वह टीम से बाहर थे. ब्रावो के संन्यास लेने के असली वजह सामने नहीं आई लेकिन वह बॉल कंट्रोवर्सी में जरूर फंस गए हैं. दो हफ्ते पहले उन्होंने वेस्टइंडीज के 50 ओवर के टूर्नामेंट सुपर 50 कप के दौरान क्रिकेट बॉल की बजाय टेनिस बॉल से बॉलिंग की थी. इस मामले की जांच जारी है. हैरान करने वाली बात यह है कि इस अजीबो-गरीब घटना के बारे में मैच के अधिकारियों ने कुछ नहीं कहा है.

11 अक्टूबर की बात है. त्रिनिदाद टोबैगो और वस्टइंडीज बी के बीच मैच चल रहा था. ड्वेन ब्रावो ने एक ओवर के दौरान क्रिकेट बॉल की बजाय सॉफ्ट गेंद (टेनिस की गेंद) से बॉल फेंकी. मैदानी अंपायर जैकलीन विलियम और वीएम स्मिथ ने इसको लेकर कोई ऐतराज नहीं जताया. इस गेंद को वैध गेंद माना गया. बल्लेबाज किमानी मेलियस ने जो दो रन इस गेंद पर लिए उन्हें भी गिना गया. हालांकि मेलियस ने ऐतराज जताया लेकिन अंपायर ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया.

बल्लेबाज किमानी मैलियस ने हल्के स्वर में विरोध जताया. कमेंटेटर ने हैरानी जताते हुए कहा, “यह व्हाइट गेंद नहीं है, यह टेनिस गेंद है. उन्होंने टेनिस गेंद से बॉलिंग की, यह ऑरिजिनल वॉइट बॉल नहीं है. इसीलिए बल्लेबाज ने कहा, ये क्या हो रहा है.” जब दूसरी गेंद फेंकी गई तो कॉमेंटेटर ने कहा, “यह असली क्रिकेट बॉल है, इससे पहली वाली गेंद टेनिस बॉल थी.” इस मैच को त्रिनिदाद टोबैगो ने 70 रन से जीत लिया. ड्वेन ब्रावो ने 8 ओवरों में 55 रन देकर 2 विकेट झटके.

वेस्टइंडीज क्रिकेट जांच करेगा
वेस्टइंडीज क्रिकेट (CWI) के सीनियर मैनेजर रोनाल्ड होल्डर ने कहा कि वे इस मामले की जांच कर रहे हैं और फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है. वहीं, इस मामले में आईसीसी ने कुछ भी कहने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह मैच अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं था, इसलिए आईसीसी इस पर टिप्पणी नहीं करेगा.

गौरतलब है कि 35 वर्षीय ब्रावो ने 2004 में पदार्पण के बाद 40 टेस्ट मैच, 164 वनडे और 66 टी-20 मैच खेले. ब्रावो हालांकि विश्वभर में टी-20 लीग में खेलना जारी रखेंगे. मीडिया को दिए बयान में ब्रावो ने कहा, “मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से आधिकारिक रूप से संन्यास ले लिया है. 14 साल पहले मैंने वेस्टइंडीज के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था और मुझे अब भी वह पल याद है, जब मुझे मरून कैप मिली थी.”

ब्रावो ने कहा, “साल 2004 में जुलाई में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर मुझे यह मरून कैप मिली थी. उस वक्त जो जुनून और प्रेरणा मुझे मिली, वह इतने साल के करियर के दौरान मेरे साथ रही.” उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि वह भी अन्य खिलाड़ियों की तरह युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने का मौका दें.

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