कर्ज मे डूब रही है जेट एयरवेज ने मांगी मुकेश अंबानी और रतन टाटा से मदद, जानें क्या मिला जवाब

publiclive.co.in[edited by RANJEET]

वित्तीय संकट से घिरी जेट एयरवेज के प्रमुख नरेश गोयल ने एयरलाइंस को बचाने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का दरवाजा खटखटाया है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि नरेश गोयल ने टाटा ग्रुप के रतन टाटा से भी मदद मांगी है. जेट एयरवेज में नरेश गोयल की हिस्सेदारी 51 फीसदी है. वह कंपनी को बचाने के लिए इसका कुछ हिस्सा बेचना चाहते हैं. कंपनी की वित्तीय हालत इतनी खराब है कि पिछले कई महीनों से कर्मचारियों की सैलरी समय पर नहीं दे पा रही है.

मिंट की एक खबर के मुताबिक, मुकेश अंबानी ने गोयल के अनुरोध पर अभी तक कुछ भी जवाब नहीं दिया है. रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कई विदेशी एयरलाइंस से बातचीत जारी है. इससे पहले खबर आई थी कि टाटा ग्रुप जेट एयरवेज में हिस्सा खरीदना चाहता था पर बात नहीं बनी. टाटा ग्रुप पहले ही देश में एयर एशिया और सिंगापुर एयरलाइंस के साथ विस्तारा एयरलाइंस चला रहा है. विस्तारा में इसकी 41 फीसदी हिस्सेदारी है. विस्तारा टाटा और सिंगापुर एयरलाइंस का ज्वाइंट वेंचर है. हालांकि, टाटा ग्रुप के प्रवक्ता ने इस पर कुछ भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. इस खबर पर जेट एयरवेज़ के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी की नीति के मुताबिक हम अटकलबाजी पर टिप्पणी नहीं करते.

जेट एयरवेज में अबूधाबी की कंपनी एतिहात एयरवेज की 24 फीसदी हिस्सेदारी है. कंपनी को अपने कर्ज का ब्याज चुकाने और कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए पूंजी की सख्त जरूरत है. मुकेश अंबानी इससे पहले भी कई कंपनियों में हिस्सा खरीद कर उनकी मदद कर चुके हैं.

लगातार घाटे से जूझ रही जेट एयरवेज ने पायलटों, इंजीनियरों और प्रबंधंन में वरिष्ठ कर्मचारियों को अगस्त का बकाया वेतन भी देरी से दिया था. कंपनी ने कहा था कि सितंबर के वेतन में देरी होगी. कंपनी के मुताबिक अगस्त महीने के 50 फीसदी बकाया वेतन का भुगतान 26 सितंबर को हो जाना था लेकिन उस रकम में से सिर्फ आधे का भुगतान कर पाई थी. इसी बीच, जेट एयरवेज़ एयरक्राफ्ट लेसर को पेमेंट नहीं कर पाई है जिसके चलते एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने नोटिस जारी किया है.

कुछ समय पहले, जेट एयरवेज ने 20 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था जिसमें कुछ वरिष्ठ लेवल के एक्जक्यूटिव भी शामिल थे. एक दशक पहले कंपनी ने 1900 कर्मचारियों को कंपनी से बाहर का रास्ता दिखाया था लेकिन बवाल बढ़ने पर उन्हें वापस रख लिया था. इतना ही नहीं, चेयरमैन नरेश गोयल ने कर्मचारियों से माफी तक मांगी थी.

कुछ ऐसे बिगड़ती गई जेट एयरवेज की वित्तीय उड़ान
जेट एयरवेज को जनवरी-मार्च में कमाई गिरने और खर्च बढ़ने से जनवरी-मार्च (2018) तिमाही में करीब 1,040 करोड़ का घाटा हुआ. मई 2018 में जेट एयरवेज में इसकी सब्सिडियरी जेटलाइट के मर्जर को मंजूरी नहीं मिली, जिससे हालात और बिगड़ गए. अगस्त आते-आते कंपनी भारी नकदी संकट से जूझने लगी. एयरलाइंस को वरिष्ठ कर्मचारियों की सैलरी में 25 फीसदी कटौती करनी पड़ी. चालू वित्तीय साल 2018-19 की पहली तिमाही में घाटा 30 परसेंट से ज्यादा बढ़कर 1323 करोड़ रुपये पहुंच गया. कंपनी कर्मचारियों को अगस्त महीने की आधी सैलरी ही दे पाई. इनकम टैक्स अधिकारियों ने वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर कंपनी के मुंबई और दिल्ली दफ्तर पर सर्वे किया. सितंबर 2018 में भारी कर्ज से गुजर रही जेट एयरवेज ने इकोनॉमी क्लास में फ्री खाना न देने का फैसला किया.

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