कश्मीरी पंडितों के समर्थन में आईं मुफ्ती, PM मोदी से PoK स्थित शारदा पीठ खोलने की मांग

publiclive.co.in[Edited by Ranjeet]
पीपल डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूब मुफ्ती ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) स्थित शारदा पीठ को खोलने की मांग को लेकर पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी है. दरअसल, सिखों के धार्मिक स्थल करतारपुर कॉरिडोर के लिए रास्ता खुल जाने के बाद कश्मीरी पंडितों की मांग तेज हो गई है. कश्मीरी पंडितों के संगठन “रूट इन कश्मीर” के प्रवक्ता अमित रैना ने कहा कि हम लोग लंबे समय से दर्शन के लिए शारदा पीठ को खोले जाने की मांग कर रहे है, ऐसे में करतारपुर कॉरिडोर खुलने से हम लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं. रैना ने कहा कि हम अपनी मांग सरकार के पास फिर से रखेंगे और इसको लेकर हम लोग शुक्रवार को मीटिंग करने जा रहे है.उन्होंने ने कहा कि हम लोग सरकार से फिर कहना चाहते हैं कि शारदा पीठ को जल्द से जल्द कश्मीरी पंडितों के लिए खोला जाए, क्योंकि जिस तरह से हिंदुओं के लिए बनारस महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है,उसी तरह कश्मीरी पंडितों के लिए शारदा पीठ महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है.

पाकिस्तान 28 नवंबर को रखेगा करतारपुर कॉरिडोर की नींव
28 नवंबर यानि कल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान सरहद पार करतारपुर कॉरिडोर की नींव रखेंगे. करतारपुर साहिब पाकिस्तान में आता है लेकिन इसकी भारत से दूरी महज़ साढ़े चार किलोमीटर है.अब तक कुछ श्रद्धालु दूरबीन से करतारपुर साहिब के दर्शन करते रहे हैं. ये काम बीएसएफ की निगरानी में होता है.मान्यताओं के मुताबिक़, सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक 1522 में करतारपुर आए थे. उन्होंने अपनी ज़िंदगी के आख़िरी 18 साल यहीं गुज़ारे थे.माना जाता है कि करतारपुर में जिस जगह गुरु नानक देव की मौत हुई थी वहां पर गुरुद्वारा बनाया गया था.

कश्मीरी पंडित अपनी कुलदेवी तक पहुंचने के लिए लड़ रहे हैं लड़ाई
आस्था के केंद्र इस मंदिर तक पहुंचना और एक बार फिर से यहां पूजा करना कश्मीरी पंडितों की जिंदगी का सबसे बड़ा मकसद बन चुका है.अपनी कुलदेवी तक पहुंचने के लिए वो एक बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं.1947 यानी वो साल जब तक पाकिस्तान का कश्मीर के उस हिस्से पर (PoK) कब्जा नहीं था तब तक हर कश्मीरी पंडित कुलदेवी शारदा के दर्शन के लिए जाते थे.

शारदा पीठ में जयकारे गूंजते थे लेकिन पाकिस्तान ने जैसे ही कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा किया उस मंदिर का संपर्क हिंदुओं से खत्म हो गया.हालात ये है कि अब शारदा पीठ सिर्फ नाम के लिए मंदिर है क्योंकि वो खंडहर में तब्दील हो चुका है.

क्या है शारदा पीठ का महत्व
करीब 15 सौ साल पुरानी उस शारदा पीठ PoK में है.70 साल बीत चुके हैं वहां किसी हिंदू को जाने की इजाज़त नहीं मिली है. अब तो वो इलाका आतंकियों के कब्जे में है.शारदा शक्तिपीठ प्राचीन काल से ही पूरे विश्व में हिंदुओं और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए शिक्षा का एक बड़ा केंद्र रहा है.यह पीठ नीलम और मधुमति नदी के संगम पर पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद से 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.आजादी के पहले अगस्त में यहां वार्षिक यात्रा आयोजित होती थी.दोनों देशों के बीच 2004 में हुए एक समझौते के तहत नियंत्रण रेखा के दोनों ओर की आबादी को आने-जाने में रियायत दी गई ताकि वह अपने रिश्तेदारों से भी मिल सके और माता के दर्शन भी कर सकें.इस दौरान सेव शारदा संगठन ने इस समझौते में शारदा पीठ की यात्रा को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा था. तभी से ये मांग उठती आ रही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Type in
Details available only for Indian languages
Settings
Help
Indian language typing help
View Detailed Help