राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018ः सियासत में जिन्हें अदब और प्यार से कहा गया ‘बाबोसा’

publiclive.co.in[Edited by Ranjeet]राजस्थान की सियासत में बीजेपी को संघर्ष से सत्ता तक पहुंचाने में किसी शख्स का सबसे ज्यादा योगदान है तो उनका नाम है भैरों सिंह शेखावत. राजस्थान की राजनीति में कई दशकों तक सक्रिय रहने वाले इस नेता ने अपने राजनीति जीवन की शुरुआत जनसंघ से साल 1952 में की. राजस्थान में भैरों सिंह कितने बड़े कद के नेता रहे हैं इसका अंदाजा इस कहावत से लगाया जा सकता है जो राजस्थान में मशहूर है, ‘राजस्थान का एक ही सिंह, भैरों सिंह, भैरों सिंह’. भैरों सिंह को लोगो बाबोसा कहकर पुकारते थे. राजस्थान में बाबोसा का मतलब परिवार का मुखिया होता है.

शेखावत पहली बार (1952) रामगढ़ विधानसभा से विधायक चुने गए. इसके बाद साल 1957 में वह श्रीमाधोपुर और 1962 व 1967 में शेखावत किशन पोल से विधायक रहे. 1972 में हुए विधानसभा चुनाव में भैरों सिंह शेखावत को हार का सामना करना पड़ा था. 1973 में पार्टी ने उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए भेजा.

1975 में आपातकाल के दौरान शेखवात को जेल जाना पड़ा, इस दौरान उन्हें रोहतक जेल में रहना पड़ा. आपातकाल के बाद 1977 में हुए विधानसभा चुनाव में भैरों सिंह शेखावत छबड़ा सीट से विधायक चुने गए. इन चुनावों में जनता पार्टी ने राज्य की 200 में से 151 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इस दौरान पहली बार राजस्थान में गैर कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ और भैरों सिंह शेखावत पहली बार मुख्यमंत्री बने. लेकिन भैरों सिंह अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. केंद्र की इंदिरा गांधी सरकार ने राजस्थान की सरकार को 1980 में बर्खास्त कर दिया.

1980 में ही भैरों सिंह शेखावत ने बीजेपी ज्वाइन कर ली और वह छबड़ा से विधायक चुने जाने के साथ ही विधानसभा में विपक्ष के नेता बने. 1985 में भैरों सिंह निम्बहेरा से विधायक चुने गए. 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी जनता दल गठबंधन ने 25 और 1990 में विधानसभा की 138 सीटों पर जीत दर्ज की. 4 मार्च, 1990 को भैरों सिंह शेखावत ने दूसरी बार राज्य के सीएम के तौर पर शपथ ली. शेखावत उस समय धौलपुर से विधायक चुने गए थे. लेकिन ये सरकार भी पांच साल पूरे नहीं कर सकी और 15 दिसम्बर, 1992 को राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया.

साल 1992 में बीजेपी की एक बार फिर से सरकार बनी और 15 दिसम्बर, 1992 को भैरों सिंह ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इस सरकार ने अपने पांच साल पूरे किए और शेखावत 31 दिसम्बर 1998 तक राजस्थान के सीएम रहे.

भारत के उपराष्ट्रपति
भैरोंसिंह शेखावत 12 अगस्त 2002 को भारत के ग्यारहवें उपराष्ट्रपति बने. उनका कार्यकाल 19 अगस्त, 2002 से 21 जुलाई, 2007 तक रहा था. साल 2007 में शेखावत ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की तरफ से राष्ट्रपति पद का चुनाव भी लड़ा था. लेकिन वह यूपीए की प्रतिभा पाटिल से चुनाव हार गए थे.

भैरों सिंह शेखावत का निधन 15 मई 2010 को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में हुआ, वह कैंसर से भी पीडि़त थे. उनके अंतिम संस्कार में प्रसिद्ध राजनेताओं के अलावा हजारों लोग शामिल हुए.

संघर्षों से भरा जीवन
भैरोंसिंह शेखावत का जन्म तत्कालिक जयपुर रियासत के गांव खाचरियावास में हुआ था. यह गांव अब राजस्थान के सीकर जिले में है. इनके पिता का नाम श्री देवी सिंह शेखावत और माता का नाम श्रीमती बन्ने कंवर था. गांव की पाठशाला में अक्षर-ज्ञान प्राप्त किया. हाई-स्कूल की शिक्षा गांव से तीस किलोमीटर दूर जोबनेर से प्राप्त की, जहां पढ़ने के लिए पैदल जाना पड़ता था. हाई स्कूल करने के पश्चात जयपुर के महाराजा कॉलेज में दाखिला लिया ही था कि पिता का देहांत हो गया और परिवार के आठ प्राणियों का भरण-पोषण का भार किशोर कंधों पर आ पड़ा, फलस्वरूप हल हाथ में उठाना पड़ा. बाद में पुलिस की नौकरी भी की; पर उसमें मन नहीं रमा और त्यागपत्र देकर वापस खेती करने लगे.

पुरस्कार और सम्मान
भैरों सिंह शेखावत को उनकी कई उपलब्धियों और विलक्षण गुणों के चलते आंध्र विश्वविद्यालय विशाखापट्टनम, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी और मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय, उदयपुर ने डीलिट की उपाधि प्रदान की. एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई ने उन्हें फैलोशिप से सम्मानित किया तथा येरेवन स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी अर्मेनिया द्वारा उन्हें गोल्ड मेडल के साथ मेडिसिन डिग्री की डॉक्टरेट उपाधि प्रदान की गई.

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