हार-जीत तो होती रहती है, लेकिन MP में इस बात का BJP को हमेशा रहेगा मलाल

publiclive.co.in[Edited by Ranjeet]
राजनीतिक दल चुनाव में ज्यादा से ज्यादा वोट पाना चाहते हैं क्योंकि ज्यादा वोट पाने वाले को ही जीत मिलती है, क्योकि अगर कोई ज्यादा वोट पाकर भी हार जाए, तो इसे आप क्या कहेंगे. ऐसा ही हुआ है मध्य प्रदेश में बीजेपी और अब तक मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान के साथ.

मध्य प्रदेश में बीजेपी ज्यादा वोट पाने के बावजूद हार गई है और उसे कांग्रेस के मुकाबले पांच सीट कम मिली हैं. कांग्रेस पार्टी को 114 सीटों पर जीत हासिल हुई है, जबकि बीजेपी को 109 सीटों से संतोष करना पड़ा है. राज्य में कांग्रेस को सीट भले ही ज्यादा मिली हैं लेकिन वोट बीजेपी को ज्यादा मिले हैं.

बीजेपी को 15642980 वोट मिले हैं, जो कुल मतदान का 41% है. दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी को 15595153 वोट मिले हैं, जो 40.9% है. इस तरह बीजेपी को 0.1% या 47827 वोट ज्यादा मिले हैं. बीजेपी को इससे पहले कर्नाटक चुनाव में भी ऐसा ही ट्रेंड देखा गया था, जहां वोट कांग्रेस को ज्यादा मिले थे, जबकि सीटें बीजेपी से ज्यादा जीती थीं.

कांग्रेस के लिए खुले सत्ता के रास्ते
इस तरह बीजेपी से कम वोट पाने के बावजूद कांग्रेस के लिए सत्ता के रास्ते खुल गए हैं. इस बात का जिक्र चुनाव परिणाम आने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने भी किया. कई सीटों पर वोटों का बंटवारा इस तरह हुआ कि उससे फायदा कांग्रेस को हुआ. इसी तरह करीब 10 सीटों पर जीत-हार का अंतर बहुत कम रहा. इसमें से ज्यादातर सीट कांग्रेस के खाते में गईं.

मध्य प्रदेश में बीजेपी 15 साल से सरकार में है. ऐसे में अधिक वोट पाने के बावजूद राज्य की कमान हाथ से निकलने का मलाल उसे जरूर होगा. इसी तरह कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को बीजेपी के मुकाबले करीब दो प्रतिशत वोट ज्यादा मिले थे, जबकि उसकी सीटें बीजेपी से 26 कम थीं.

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