चुनौती बनी ग्लोबल वार्मिंग, फसल चक्र के बाद अब जीव भी हो रहे प्रभावित

publiclive.co.in[Edited by Ranjeet]
पिछली एक सदी से जारी वैश्विक तापमान में वृद्धि (ग्लोबल वॉर्मिंग) का असर जलवायु परिवर्तन के रूप में सामने आया है. इससे मौसम के मिजाज में बदलाव से फसल चक्र पर असर के बाद जानवरों के साथ ही इंसानों के जीवन चक्र पर भी प्रभाव पड़ने की चुनौती के बारे में पेश हैं मौसम विभाग के महानिदेशक केजे रमेश से भाषा के पांच सवाल-

प्रश्न : जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और इसकी चुनौतियों को किस रूप में देखते हैं?
उत्तर : वैसे तो जैव जगत की सामान्य गतिविधियां, साल दर साल मौसम चक्र में बहुत मामूली बदलाव का एक सहज कारण होती हैं. जैव गतिविधियों में सबसे अधिक हिस्सेदारी इंसानी गतिविधियों की है. प्रकृति के साथ इंसानी दखल की अधिकता के कारण 1970 के बाद मौसम चक्र में बदलाव की दर बढ़ी है. यह बदलाव भीषण गर्मी, कड़ाके की सर्दी, मूसलाधार बारिश और आंधी-तूफान की तीव्रता में इजाफे के रूप में दिखता है. यहीं से जलवायु परिवर्तन और ‘ग्लोबल वॉर्मिंग’ की चुनौती शुरू होती है.

प्रश्न : मौसम चक्र के बदलाव से जीवन चक्र में बदलाव को किस रूप में देखते हैं?
उत्तर : पिछले लगभग चार दशक में मौसम चक्र के क्रमिक बदलाव के कारण भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड, आंधी, बारिश औैर तूफान जैसी मौसम की चरम स्थितियों का शुरुआती असर फसल चक्र में बदलाव के रूप में दिखता है. यह असर प्रमुख फसलों की उत्पादकता में कमी या बढ़ोतरी और गुणवत्ता में बदलाव का कारण बनता है. इसके अगले चरण में ग्लोबल वार्मिंग का फल-फूल और सब्जियों सहित अन्य प्राकृतिक उत्पादों पर असर दिखना शुरू होता है.

प्रश्न : ग्लोबल वार्मिंग जनित जलवायु परिवर्तन के कारण जीवन चक्र में बदलाव को किस रूप में देखते हैं?
उत्तर : ग्लोबल वार्मिंग के कारण वातावरण में ज्यादा नमी को अवशोषित रखने की क्षमता बढ़ती है. नतीजतन 1901 से अब तक औसत वैश्विक तापमान 1.04 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है. भारत में यह बढ़ोतरी 0.85 डिग्री सेल्सियस रही है. भारत जैसे गर्म जलवायु वाले देश में तापमान की यह बढ़ोतरी तमाम तरह से शारीरिक क्षमताओं में बदलाव की वजह बनती है. इसमें सर्दी, गर्मी की सहनशीलता और काम करने की क्षमता में बदलाव पर सीधा असर होता है. ग्लोबल वार्मिंग से कार्यक्षमता में कमी आना एक बड़ी चुनौती है. इस चुनौती के कारण कार्यक्षमता संबंधी असर को अब महसूस किया जाने लगा है. ग्लोबल वार्मिंग का यह प्रभाव प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली जन-धन की हानि से बिल्कुल अलग है.

प्रश्न : ग्लोबल वार्मिंग के इस असर का भविष्य में संभावित स्वरूप कैसा होगा?
उत्तर : मौसम और फसल चक्र में बदलाव, ग्लोबल वार्मिंग का एक सदी में दिखने वाला प्राथमिक असर है. अब इसके दूसरे चरण में कार्यक्षमता संबंधी असर, मानवीय जीवन पर देखने को मिलेगा. मौसम चक्र के वैश्विक बदलाव को देखते हुए भारत में इस साल गर्मी अधिक समय रही. इससे विस्तारित मानसून देखने को मिला और अब सर्दी भी देर से शुरू हुई. भविष्य में इस बदलाव की तीव्रता में संभावित इजाफा निसंदेह जीवन शैली पर असर डालेगा.

प्रश्न: लाभ और नुकसान के लिहाज से आप इस प्रभाव को किस रूप में देखते हैं?
उत्तर: जीवकोपार्जन के नजरिये से यह मिश्रित प्रभाव वाला बदलाव है. यह सही है कि बदलाव के इस संक्रमणकाल में नुकसान का जोखिम ज्यादा होता है. हालांकि मौसम में संभावित बदलाव के मद्देनजर अधिक बुआयी का जोखिम लेने वालों को बदलाव के अनुकूल मौसम रहने पर अधिक पैदावार के रूप में लाभ होता है. अनुकूल बदलाव नहीं होने पर नुकसान का जोखिम भी रहता है.

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