लोकसभा चुनाव 2019: 16 साल बाद मुजफ्फरनगर में खत्म हुआ था BJP का ‘वनवास’

publiclive.co.in[Edited by Ranjeet]
भारत में ‘चीनी का कटोरा’ नाम से प्रसिद्ध शहर उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा क्षेत्रों में से एक मुजफ्फरनगर है. ये देश की राजधानी दिल्ली के करीब होने की वजह से यूपी का सबसे विकसित और समृद्ध शहरों में से एक माना जाता है. मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की तीसरा लोकसभा सीट है. 41 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता वाली इस सीट पर 2013 के दंगों के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के संजीव बालियान ने करीब 4 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी.

ऐसे बसा शहर
इतिहास और राजस्व प्रमाणों के मुताबिक, दिल्ली के बादशाह, शाहजहां ने सरवट (SARVAT) नाम के परगना को अपने एक सरदार सैयद मुजफ्फर खान को जागीर में दिया था, जहां पर 1633 में उसने और उसके बाद उसके बेटे मुनव्वर लश्कर खान ने मुजफ्फरनगर नाम का ये शहर बसाया. 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद इस सीट ने राजनीतिक पार्टियां सहां सक्रीय हो गई. 2013 से पहले ये आरएलडी की गढ़ माना जाता था, लेकिन, मुजफ्फरनगर दंगों के बाद यहां बीजेपी ने पकड़ बनाई.

क्या है जातीय समीकरण
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर 51 प्रतिशत आबादी हिंदू और 41 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है. 2014 के लोकसभा चुनाव में 15,88,475 लोगों ने मतदान किया. मतदान में 55 प्रतिशत पुरुष और 44 प्रतिशत महिलाओं की भागेदारी रही.

क्या है राजनीतिक इतिहास
1957 कांग्रेस के सुमत प्रसाद यहां से सांसद बने. 1967 में सीपीआई के एलए खान, 1971 में सीपीआई के विजयपाल सिंह, 1977 में बीएलडी के सईद मुर्तजा, 1980 में जेएमपी (एस) के घयूर अली खान, 1984 में कांग्रेस के धर्मवीर सिंह, 1989 में जेडी के मुफ्ती मोहम्मद सईद यहां से सांसद बने. साल 1991 से 1998 तक इस सीट पर बीजेपी का राज रहा. 199 में फिर कांग्रेस के ने इस सीट पर कब्जा किया. 2004 और 2009 में सपा और बसपा के सांसद यहां से चुने गए. 2014 में 2009 में सांसद रहे बसपा के कादीर राणा को चुनावी रण में हराकर बीजेपी के डॉ. संजीव कुमार बालियान यहां से सांसद चुने गए. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सपा, बसपा और कांग्रेस प्रत्याशियों को मिलाकर भी करीब दो लाख ज़्यादा वोट हासिल किए थे. तब कांग्रेस और रालोद का गठबंधन था, फिर भी इनके हिस्से सिर्फ 14.52 प्रतिशत वोट आए थे.

कौन हैं संजीव बालियान
मुजफ्फरनगर के मौजूदा भाजपा सांसद डॉ. संजीव बालियान 2014 से 2017 तक केंद्र सरकार में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय में राज्य मंत्री रहे. संजीव बालियान साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी भी हैं, जिसको लेकर नवंबर 2015 में उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किए गए थे. इसके बाद दिसंबर 2015 में बालियान ने मुजफ्फरनगर की एक अदालत में आत्मसमर्पण कर जमानत प्राप्त की थी. इस दौरान संजीव बालियान ने दंगों में अपनी भागीदारी से इनकार करते हुए और दावा किया था कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है. लोगों के मत से संसद तक पहुंचे बालियान सांसद बनने के बाद उन्होंने सदन में करीब 89 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की.

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