पटियाला में त्रिकोणीय मुकाबले में एडवांटेज डॉ. गांधी को

publiclive.co.in[Edited by Arti singh]
पटियाला पैग और पटिलायी सलवार के लिए देशभर में मशहूर पंजाब के पटियाला में इस बार चुनावी लड़ाई बड़ी दिलचस्प है. एक तरफ तो रानी परणीत कौर हैं, जोकि कांग्रेस से चुनाव लड़ रही हैं. दूसरी ओर पिछले चुनावों में आम आदमी पार्टी के टिकट पर सांसद बने डॉ. धर्मवीर गांधी हैं, इस बार वो पंजाब एकता पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं. तीसरी तरफ अकाली और बीजेपी के संयुक्त उम्मीदवार सुरजीत सिंह रखड़ा हैं, जोकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर पर इस किले को फतह करना चाहते हैं.

इन तीनों उम्मीदवारों के बीच ही पटियाला लोकसभा की बिसात बिछ गई हैं. हालांकि इस बिसात में आम आदमी पार्टी की नीना मित्तल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. डॉ धर्मवीर गांधी को मिलने वाले वोटों को काटने का काम नीना मित्तल कर सकती है. लिहाजा जब कल दोपहर दोनों दलों के उम्मीदवार नांमाकन के लिए पहुंचे तो दोनों उम्मीदवारों के कार्यकत्ताओं ने एक दूसरे के सामने जोरों से नारे लगाने शुरू कर दिए.

आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार नीना मित्तल के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता भगवंत मान भी नामांकन के लिए पहुंचे थे. बाहर निकल कर भगवंत मान ने सीधा निशाना कांग्रेस के उम्मीदवार परणीत कौर पर साधा. कहा कि वो चुनाव आचार संहिता का उलंघघन कर रही है. लेकिन जैसे ही डॉ. गांधी का काफिला मिनी सेक्रेटियेट पहुंचा तो भगवंत मान और नीना मित्तल दोनों अपने समर्थकों के साथ वहां से निकल लिए. कभी पंजाब में अपने दम पर सरकार बनाने की स्थिति में रही आम आदमी पार्टी अपने नेताओं के झगड़ों में इतना उलझ गई है कि दो पुराने साथी एक दूसरे की शक्ल भी नहीं देखना चाहते.

कभी डॉ. धर्मवीर गांधी के करीबी रहे आप के कार्यकर्त्ता अमरीक सिंह बताते हैं कि डॉ. गांधी ने पार्टी को धोखा दिया है. पंजाब के लिए बन रहे एक राजनैतिक विकल्प को गांधी जैसों ने कमज़ोर किया है. लिहाजा इस बार जनता उनको सबक सिखाएगी और हम इसका बीड़ा उठाए हुए हैं. दूसरी और पंजाब एकता पार्टी के साथ बीएसपी, सीपीआई (एम) जैसी छह पाटियों का समर्थन है. जिससे छोटे छोटे पॉकेट्स में पार्टी के प्रत्याशियों को कार्यकर्त्ता मिल रहे हैं. ख़ासकर दलित वर्ग का समर्थन इस बार पंजाब पार्टी को मिल रहा है.

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी और पटियाला में रानी कही जाने वाली परणीत कौर इस बार चुनाव जीतने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा देना चाहती हैं. तभी को नामाकंन के तुरंत बाद उन्होंने अपने महल में जनता दरबार लगाया और अफसरों को निर्देश दिए. ताकि जनता को ये समझ आ जाए कि काम करवाने के लिए किसकी जरूरत पड़ेगी. इस बारे में जब शहर के अदालत बाज़ार में पकौड़े बेचने वाले सोनू से पूछा तो उन्होंने कहा कि रानी के महल में जाने की इज़ाजत सबको नहीं है.

यहीं एक वाक्य रानी की स्थिति को बयां करने के लिए काफी है. इसलिए परणीत कौर को लोगों की इस सोच को खत्म करने के लिए काफी काम करना पड़ेगा. हालांकि इस सीट से पहले तीन बार सांसद रहने वाली परणीत कौर को इस बार राज्य में कांग्रेस की सरकार होने का फायदा मिल सकता है. पिछली बार कैप्टन रानी परणीत कौर के लिए चुनाव प्रचार नहीं कर पाए थे, क्योंकि वो खुद अमृतसर से चुनाव लड़ रहे थे. लेकिन इस बार वो पटियाला में चुनाव प्रचार में ख़ासा ज़ोर लगा सकते हैं. इस सबके बीच अकाली और बीजेपी के संयुक्त उम्मीदवार सुरजीत सिंह रखड़ा भी ग्रामीण क्षेत्रों में अकाली वोट बैंक और शहरों में मोदी के नाम पर अपनी नैया पार लगाने की कोशिश में लगे हुए हैं.

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