जब मुसाफिरों की जान बचाने के लिए RPF के जवानों ने जिंदगी लगा दी दांव पर…

publiclive.co.in[Edited by Arti singh]
भारतीय रेलवे से सफर करने वाले मुसाफिर कई बार अपनी लापरवाही के चलते अपनी जिंदगी को दाव पर लगा देते हैं. कई बार ऐसे भी मौके आए हैं, जब इन लापरवाह मुसाफिरों की जान बचाने के लिए रेलवे प्रोटेक्‍शन फोर्स यानी आरपीएफ के जवानों ने न केवल अपनी जिंदगी गवाई है, बल्कि अपनी जिंदगी को दाव पर लगाने से नहीं कतराए हैं. भारतीय रेलवे के आंकड़ों के अनुसार 2017 से मार्च 2019 तक आरपीएफ के जवानों ने अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर करीब 174 मुसाफिरों की जान बचाई है. इसमें 2019 में आरपीएफ ने करीब 74 मुसाफिरों की जिंदगी को सुरक्षित किया है. वहीं 2017 में 98 और 2018 में 69 मुसाफिरों की जिंदगी आरपीएफ के जवानों के प्रयास से बचाई जा सकी है.

भारतीय रेलवे के वरिष्‍ठ अधिकारी के अनुसार, भारतीय रेलवे से रोजाना करीब 23 मिलियन यानी 2.3 करोड़ मुसाफिर सफर करते हैं. इनमें बहुत से यात्री ऐसे भी हैं जो चलती हुई ट्रेन में बोर्ड या डिबोर्ड होते समय दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. कई बार चलती हुई ट्रेन में चढ़ने या उतने के प्रयास में मुसाफिर ट्रेन और प्‍लेटफार्म के बीच फंस जाते हैं. इसके अलावा, कई यात्री लापरवाही से ट्रैक पार करते समय या ट्रेन की छत पर बैठकर सफर करने के दौरान दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. उन्‍होंने बताया कि दुर्घटना की इस तरह की सभी संभावनाओं को रोकने के लिए आरपीएफ के जवान लगातार प्रयास कर रहे हैं. कई बार ऐसा भी हुआ है कि इन प्रयासों के दौरान आरपीएफ के जवानों ने अपनी जिंदगी गंवाई है या अपनी जिंदगी को दांव पर लगा दिया है.
हाल की एक घटना का जिक्र करते हुए रेलवे के वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि 22 अप्रैल को तीन बच्‍चों और एक महिला की जिंदगी बचाने की कोशिश में आरपीएफ के कांस्‍टेबल जगबीर सिंह राणा को अपनी जिंदगी न्‍यौछावर करनी पड़ गई. उन्‍होंने बताया कि कांस्‍टेबल जगबीर सिंह राणा आरपीएफ की आदर्श नगर (दिल्‍ली) पोस्‍ट पर तैनात थे. 22 अप्रैल को उन्‍होंने देखा कि दिल्‍ली के आजादपुर-आदर्शनगर सेक्‍शन के बीच एक ट्रेन बेहद तेज रफ्तार से चली आ रही है. इसी दौरान, उनकी निगाह ट्रैक पार कर रहे तीन बच्‍चों सहित एक महिला पर पड़ी. किसी अनहोनी की आहट पाते ही कांस्‍टेबल जगबीर सिंह राणा बिना समय गंवाए इस महिला और बच्‍चों की तरफ दौड़ पड़े. अपने इस साहसिक प्रयास के जरिए कांस्‍टेबल जगबीर सिंह राणा इस महिला और बच्‍चों की जिंदगी बचाने में तो सफल रहे, लेकिन खुद दुर्घटना का शिकार हो गए. इस दुर्घटना में कांस्‍टेबल जगबीर सिंह राणा को अपनी जिंदगी का त्‍याग करना पड़ा.

रेलवे के वरिष्‍ठ अधिकारी ने 23 मार्च 2019 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि मुंबई के विरार रेलवे स्‍टेशन पर 55 वर्षीय सुरेंद्र झा चलती हुए ट्रेन में चढ़ने का प्रयास कर रहे थे. इसी बीच, उनका पैर फिसल गया और वे ट्रेन-प्‍लेटफार्म के बीच आ गए. इस दौरान, मौके पर मौजूद आरपीएफ के हेड कांस्‍टेबल मुकेश त्‍यागी ने अपनी जान पर खेलकर सुरेंद्र झा की जान बचाई. कुछ इसी तरह की एक घटना 31 जनवरी 2019 को मुंबई के बोरीवली रेलवे स्‍टेशन पर हुई. जहां एक मुसाफिर रफ्तार पकड़ चुकी गोल्‍डन टेंपल एक्‍सप्रेस में चढ़ने का प्रयास कर रहा था. इसी बीच, इस यात्री का पैर फिसल गया. यह मुसाफिर पूरी तरह से प्‍लेटफार्म और ट्रेन के बीच फंसता, इससे पहले मौके पर मौजूद आरपीएफ के कांस्‍टेबल पृथ्‍वीराज मीणा ने अपनी जान पर खेलकर इस मुसाफिर को अपनी तरफ खींच लिया. आरपीएफ कांस्‍टेबल पृथ्‍वीराज मीणा के इस साहसिक प्रयास से इस मुसाफिर की जान बचा ली गई.

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