ईरान पर चढ़ाई के मूड में अमेरिका, भारत में महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल

publiclive.co.in[Edited by DIVYA SACHAN]
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुके हैं. डोनाल्ड ट्रंप की सरकार जिस तरह के फैसले ले रही है उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि अमेरिका ईरान पर युद्ध के लिए चढ़ाई कर सकता है. दरअसल, सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला हुआ है. सऊदी अरब की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के जलक्षेत्र में उसके 2 तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया, जिससे काफी नुकसान हुआ. यह घटना ऐसे समय घटी है जब अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने अपनी मॉस्को की प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी और ईरान पर यूरोपीय अधिकारियों से चर्चा के लिए ब्रसेल्स गए हैं. अमेरिका को पूरा संदेह है कि यह हरकत ईरान ने की है. हालांकि ईरान सरकार इस हमले से लगातार इनकार कर रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के हालात से भारत में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने के संकेत हैं.

भारत को तेल सप्लाई करने वाला ईरान तीसरा बड़ा देश है. चीन के बाद भारत ईरान से तेल खरीदने वाला दूसरा बड़ा देश है. भारत तेल ज़रूरतों को पूरा करने के लिए 80 प्रतिशत ईरान पर निर्भर करता है. अमेरिका से क़रीबी के कारण भारत-ईरान रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है. अमेरिका लगातार दबाव बना रहा है कि भारत ईरान से तेल ना खरीदे. हालांकि अमेरिका ने आश्वासन दिया है कि वह भारत में तेल की सप्लाई सऊदी अरब से पूरा कराएगा. जानकार मान रहे हैं कि अमेरिकी दबाव में ईरान से तेल सप्लाई बाधित होने पर सऊदी अरब और यूएई तेल की कीमतें बढ़ा सकता है.

सऊदी के तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम लोग देख रहे हैं कि ईरान के साथ क्या होता है. अगर वो (ईरान) कुछ करते हैं तो ये उनकी बड़ी भूल होगी.

सुषमा स्वराज ने ईरान के विदेश मंत्री से रचनात्मक चर्चा की
तनाव के माहौल के बीच ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ भारत दौरे पर आए और मंगलवार को भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की. दोनों नेताओं की बातीचत में तय हुआ कि भारत ईरान से तेल आयात का फैसला लोकसभा चुनावों के बाद अपने वाणिज्यिक, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा हितों को ध्यान में रखकर करेगा. दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह बातचीत अमेरिका की ओर से भारत और सात अन्य देशों को ईरान से तेल खरीदने को लेकर दी गई छह माह की छूट की अवधि खत्म किये जाने के 12 दिन बाद हो रही है.

अमेरिका ने पिछले साल मई में ईरान के साथ परमाणु मुद्दे पर हुये समझौते से खुद को अलग कर लिया था. इसके बाद ईरान पर प्रतिबंध फिर से लागू हो गये. प्रतिबंधों के बाद अमेरिका ने भारत सहित आठ देशों को ईरान से तेल आयात में कमी लाने और धीरे-धीरे इसे बंद करने के लिये छह माह का समय दिया था.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और इस खाड़ी देश के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए जरीफ का यह दौरा हो रहा है. सूत्रों ने कहा कि बैठक में जरीफ ने राष्ट्रपति हसन रुहानी द्वारा आठ मई को किये गए फैसलों का जिक्र किया जिनमें संवर्धित यूरेनियम और भारी जल के निर्यात से संबंधित फैसला भी शामिल है. एक सवाल के जवाब में जवाद जरीफ ने कहा कि इज़राइल, बोल्टन, सऊदी अरब और UAE मिलकर ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना चाहते हैं.

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