BJP नेता प्रियंका के वकील फि‍र पहुंचे SC, तो सरकारी वकील ने कहा- हमने तो उन्‍हें सुबह ही रिहा कर दिया

publiclive.co.in[Edited by DIVYA SACHAN]
नई दिल्‍ली : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विरूपित तस्वीर कथित रूप से सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में गिरफ्तार भाजपा की महिला कार्यकर्ता प्रियंका शर्मा के वकील बुधवार को फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. उन्‍होंने अदालत को सूचित किया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक प्रियंका को रिहा नहीं किया गया है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आदेश के बावजूद प्रियंका को रिहा नहीं किया गया है तो हम पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी करेंगे.

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने कोर्ट को जानकारी दी कि BJP कार्यकर्ता प्रियंका शर्मा को सुबह करीब 9.40 पर रिहा कर दिया गया है. कल कोर्ट ने तुरंत रिहाई के आदेश दिया था. गिरफ्तारी के खिलाफ प्रियंका के परिवार की याचिका अभी लंबित रहेगी. जुलाई के पहले हफ्ते में सुनवाई होगी.

उल्‍लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट प्रियंका शर्मा को मंगलवार को जमानत पर तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था. न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अवकाश कालीन पीठ ने भाजपा युवा मोर्चा की नेता प्रियंका शर्मा को जमानत देते हुए कहा था कि जेल से रिहाई के वक्त् उन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विरूपित तस्वीर कथित रूप से साझा करने ने के लिये लिखित में माफी मांगनी होगी. पीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी वहां खत्म हो जाती है जब वह दूसरे के अधिकारों का अतिक्रमण कर रही हो.

तृणमूल कांग्रेस के नेता विभास हाजरा की शिकायत पर भाजपा कार्यकर्ता प्रियंका शर्मा को पश्चिम बंगाल पुलिस ने 10 मई को भारतीय दंड संहिता की धारा 500 (मानहानि) और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत गिरफ्तार किया था. हावड़ा की स्थानीय अदालत ने प्रियंका को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था.

इस मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने शुरू में कहा कि प्रियंका शर्मा की माफी जमानत की शर्त होगी परंतु बाद में उसने स्पष्ट किया कि यह जमानत के लिये शर्त नहीं होगी लेकिन उसे यह पोस्ट साझा करने के लिये रिहाई के वक्त माफी मांगनी चाहिए.

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘हिरासत में प्रियंका शर्मा को तत्काल जमानत पर रिहा किया जायेगा. हिरासती, हालांकि, रिहाई के समय अपने फेसबुक अकाउन्ट पर तस्वीरे साझा करने के लिये लिखित में माफी मांगेगी. यह स्पष्ट किया जाता है कि यह आदेश इस मामले की विशेष तथ्यों और परिस्थितयों में दिया जा रहा है और यह नजीर के रूप में नहीं लिया जायेगा.’’

न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से भी जवाब मांगा है कि क्या किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करने पर गिरफ्तार किया जा सकता है और इस मामले को अवकाश के बाद सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया.

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