World Cup 2019: टूर्नामेंट में नजर आएंगी ये 5 खास बातें, कई प्लेयर्स की होगी मुसीबत

publiclive.co.in[Edited by Arti singh]
आईसीसी क्रिकेट विश्व कप के शुरु होने में अब केवल 13 दिन बाकी रह गए हैं. दुनिया की लगभग सारी टीमें क्रिकेट के इसी महाकुंभ की तैयारी में लगी हैं. वहीं क्रिकेट विशेषज्ञ और दिग्गज इस विश्व कप के बारे में अपनी राय दे रहे हैं और स्टेटीशियन्स आंकड़े का विश्लेषण कर इस बार के विजेता का अंदाज लगा रहे हैं.
हर क्रिकेट मैच से पहले यह कौतूहल केवल मैच खेलने वाली टीम ही नहीं बल्कि दर्शकों से लेकर सट्टेबाजों तक में रहता है कि पिच कैसी है. पिच के मिजाज को देख कर ही टीम के कप्तान टॉस जीतने के बाद इस बात का फैसला करते हैं कि पहले बल्लेबाजी लेना ठीक होगा कि गेंदबाजी. इसके बाद ही फैंस इस बात का अंदाजा लगाते हैं कि किसके जीतने की संभावना प्रबल हैं. इस बार समय और मौसम को देखते हुए सभी लोग मान रहे हैं कि पिच सपाट ही होगी.

आमतौर पर इंग्लैंड की पिच तेज, उछाल भरी और स्विंग को मदद करने वाली होती है, लेकिन ऐसा ठंड के मौसम में ज्यादा होता है जब इंग्लैंड में नमी ज्यादा होती है. ऐसे में दिन भर गेंद को स्विंग मिलना आम बात हो जाती है. इस बार विश्व कप के सारे मैच गर्मी में होने वाले हैं. इस दौरान इंग्लैंड की पिचें पाटा पिचें हो जाती हैं और मैच हाई स्कोरिंग हो जाते हैं. ऐसे में टॉस जीतने वाली टीम चेज करना चाहेगी. जिससे उसे पता हो कि उसका लक्ष्य क्या है और उसे हासिल करना आसान हो.

इस तरह सपाट पिचों पर गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान होता है. उन्हें स्विंग नहीं मिलती है. गेंद बल्ले पर आसानी से आती है और रन बहुत ज्यादा बनते हैं. ऐसे में तेज गेंदबाज के पेस का फायदा बल्लेबाज उठाने में कामयाब हो जाते हैं. गेंदबाजों के पास पेस में वेरिएशन के अलावा बहुत विकल्प रह नहीं जाते. इसके अलावा उनके लिए बल्लेबाज को पेस का झांसा देना आसान नहीं होता. यहां तेज गेंदबाज तो फायदा केवल इतना मिलता है कि बल्लेबाज पेस का अनुमान आसानी ने नहीं लगा सकता. वहीं मीडियम पेसर के लिए मुश्किल बढ़ जाएंगी क्योंकि आमतौर पर वह स्विंग पर ज्यादा निर्भर होता है.

सपाट पिचों के बारे में कहा जाता है कि गेंदबाजों की मुसीबत होती है, लेकिन असल में होता उल्टा है. इसकी वजह यह है कि मैच का हाई स्कोरिंग जाना तय होता है तो बल्लेबाजों पर बड़ा स्कोर बनाने का अतिरिक्त दबाव बन जाता है. ऐसे में उनके आउट होने की संभावना भी बनी रहती है. वे रन बनाने के लिए समय नहीं ले सकते. भारतीय बल्लेबाज खासकर रोहित शर्मा और एमएस धोनी जैसे दिग्गजों को पहले बल्लेबाजी करने में दिक्कत होगी क्योंकि वे बड़ा लक्ष्य हासिल करने के लिए समय नहीं ले सकते. इसीलिए वे चेस करते समय बेहतर होते हैं. रोहित शुरूआत में धीमें होते हैं और बाद में रफ्तार पकड़ते हैं वहीं धोनी का खेल पूरी तरह से लक्ष्य पर निर्भर होता है.

जो बल्लेबाज आते ही तेज से रन बनाने के आदी हैं उनके इस टूर्नामेंट में सफल होने की संभावना सबसे ज्यादा होगी, जबकि यह नियम के तौर पर नहीं होगा. काफी कुछ विरोधी टीम के गेदंबाजों पर भी निर्भर करता है. जोस बटलर, जॉनी बेयरस्टॉ, डेविड वार्नर जैसे बल्लेबाजों की सफलता की संभावनाएं ऐसे में बढ़ जाएंगी. खेल वैसे तो अनिश्चितता का हमेशा ही रहता है और यहां भी रहेगा ही, लेकिन इतना तय है कि शुरुआत में जो हावी हो गया, चाबी उसी के हाथ में आ जाएगी. इस बात की संभावना इस बार ज्यादा होगी.

इस टूर्नामेंट में स्पिन गेंदबाजों की चांदी हो सकती है, लेकिन उनके लिए आसान नहीं होगा. अगर वे होशयारी से बॉलिंग करें तो विरोधी टीम के बल्लेबाजों को मुसीबत डाले देंगे और मैच में उनकी निर्णायक भूमिका होगी. इनमें अफगानिस्तान के राशिद खान, दक्षिण अफ्रीका के इमरान ताहिर, भारत के कुलदीप यादव, बांग्लादेश के शाकिब उस हसन और ऑस्ट्रेलिया के नाथन लियोन खास नाम हैं. इसके अलावा कई और स्पिनर्स भी हैं जो अपने प्रदर्शन से विरोधी टीम को चौंका सकते हैं.

अब 50 ओवर के मैच लंबा प्रारूप हो गया है. टी20 के आने के बाद से अब इस मैच में रणनीति की बहुत अहमियत हो गई है. वहीं हाल के कुछ सालों में टीम प्रबंधन और रणनीतिकारों की भूमिका का भी मैच में दखल बढ़ता दिख रहा है. हर खिलाड़ी पर उसके पुराने खेल के मुताबिक रणनीति बनती है. इसके बाद भी मैच का रुख मैदान पर खिलाड़ियों का अंतिम प्रदर्शन ही निर्णायक होगा.

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