जीवनभर की पूंजी देने के बाद ग्रीनोपोलिस के बायर्स के हाथ खाली, इंसाफ का इंतजार

publiclive.co.in[Edited by Arti singh]
हरियाणा के गुरुग्राम में सात साल बाद भी ग्रीनोपोलिस प्रोजेक्ट के होम बायर्स के हाथ खाली हैं. जीवनभर की गाढ़ी कमाई देने के बाद बायर्स को अब 22 मई को हरियाणा रियल एस्टेट एपीलेट अथॉरिटी में फैसला आने का इंतजार है. दरअसल, ये वो घर खरीदार हैं जिन्होंने 80-90 प्रतिशत पैसा बिल्डर को दिया और बदले में मिले तो सिर्फ झूठे आश्वासन. 22 मई को ग्रीनोपोलिस के होम बायर्स चंडीगढ़ में इकट्ठे हो रहे हैं. उम्मीद यही है कि होम बायर्स के हक में फैसला आएगा और जल्द से घरों के पजेशन मिल पाएंगे. पढ़िए पूरा मामला…

साल 2012 में बिल्डर 3C और ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर ने मिलकर गुरुग्राम के सेक्टर-89 में ग्रीनोपोलिस प्रोजेक्ट लॉन्च किया. बिल्डर ने हर सुविधा देने का वादा किया जिससे घर खरीदारों को लगा कि यहां सपनों का आशियाना बनाने के बारे में सोचा जा सकता है. बिल्डर ने 2016 में पज़ेशन देने का वादा किया लेकिन 2019 तक खड़े हैं तो सिर्फ स्ट्रक्चर. 47 एकड़ के इस प्रोजेक्ट में 35% फ्लैट ओरिस इंफ्रा ने बेचे जबकि 65% फ्लैट की बिक्री 3C ने की.

पजेशन में देरी और कंस्ट्रक्शन काम बंद होने के बाद घर ख़रीदारों ने हरियाणा रेरा का दरवाज़ा खटखटाया. हरियाणा रेरा ने बायर्स के हक में फैसला देते हुए कहा कि जनवरी 2019 से हर महीने 5 करोड़ डाले जाएं और जून के अंत तक फेज़ 1 का पज़ेशन दिया जाए और दिसंबर तक दूसरे फेज़ का हैंडओवर दे दिया जाए. साथ में बाकी बची 10 एकड़ की लैंड को भी अटैच किया गया और कहा गया कि जब तक पज़ेशन नहीं दिया जाएगा. बिल्डर इस ज़मीन को नहीं बेच पाएगा. इसके अलावा, जो बिना बिके मकान हैं और जितना पैसा बायर्स से आना है, उसका इस्तेमाल प्रोजेक्ट पूरा करने में किया जाए. बिल्डर की तरफ से अभी तक 5 करोड़ डाले गए लेकिन हरियाणा रेरा के फैसले को चैलेंज करते हुए हरियाणा रियल एस्टेट एपीलेट अथॉरिटी में अपील की.

ग्रीनोपोलिस के बायर ललित कुमार ने बताया कि करीब 1270 बायर्स ने इस प्रोजेक्ट में निवेश किया है और 2015 में बिल्डर ने आईडीसी और ईडीसी के लगभग 38 करोड़ इकट्ठा किया और सरकार को जमा नहीं किए. पेनल्टी लगाकर ये अमाउंट बढ़कर 120 करोड़ रुपये हो गया है, इसकी वजह से रेरा ने भी प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नहीं किया और इसका लाइसेंस भी रद्द हो चुका है. हालांकि, बायर्स ये भी आरोप लगा रहे हैं कि ओरिस का कहना है कि जो 10 एकड़ की लैंड है–उसे अलग किया जाए जबकि बायर्स कह रहे हैं कि 10 एकड़ लैंड इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा है.

घर ख़रीदार विजय राज का कहना है कि 3C और ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच विवाद के चलते घर ख़रीदारों की मुश्किलें बढ़ चुकी है. एक तरफ कंस्ट्रक्शन का काम पूरी तरह से बंद है तो दूसरी तरफ बिल्डर कोई सुनवाई नहीं कर रहा. रेरा के फैसले के बाद भी घर ख़रीदारों के हाथ पूरी तरह से खाली हैं. 80-90% पैसा देने के बाद भी घर ख़रीदार घरों के पज़ेशन की बाट जोह रहे हैं.

अब सवाल ये उठता है कि घर ख़रीदार जाएं तो जाएं कहां. सपनों का आशियाना बनाने के लिए पहले बिल्डर को पैसे दिए और घर मिलना तो दूर की बात अब पज़ेशन के लिए कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं. ऐसे में अब घर ख़रीदार इंसाफ के लिए 22 मई का इंतज़ार कर हैं.

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