तीन लाख रुपये के डस्टबिन हो गए डस्टबिन

publiclivenews.in [Written by Aakansha, Edited by Imran]

ग्राम में नंबर पाने के लिए मथुरा के फरह ब्लॉक में लगभग तीन लाख रुपये से अधिक का बजट ठिकाने लग गया। ग्राम पंचायतों ने 500 से ज्यादा लगाए जिसमें से कुछ खुद ही बदल गए तो वही कुछ डस्टबिन पेपरों में ही रह गए। फरह ब्लॉक की 55 ग्राम पंचायतों में 6160 रुपये प्रति डस्टबिन के हिसाब से 500 से अधिक डस्टबिन खरीदे गए। जिनको दिल्ली की दो फर्मो से ग्राम पंचायतों में खरीदा गया है। दिल्ली की दो फर्मो से अधिकारियों ने खरीद  अपनी सेटिंग के हिसाब से की लेकिन नाम पंचायतों का हुआ।

स्टील की पॉलिश वाली लोहे के इतने हल्के व सस्ते डस्टबिन इतनी ज़्यादा कीमत में खरीदे गए कि ग्राम पंचायत में लगाने के कुछ महीने बाद ही डस्टबिन कूड़े में बदल गए और बाकी कूड़े से भरे जिसकी कभी सफाई नहीं हुई और कई ग्राम पंचायतों में कुछ एकाध डस्टबिन लगाए गए और बाकी केवल पेपरों में ही रह गए। सहायक विकास अधिकारी विनोद कुमार का कहना है कि डस्टबिनों की खरीद ग्राम पंचायतों द्वारा की गई है, उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए ग्राम पंचायतें को जिम्मेदार ठहराया गया।

स्वच्छता सर्वेक्षण ग्रामीण का अभियान एक से 31 अगस्त तक चला था। इसके तहत टीम को सर्वे करना था। इसमें सफाई से लेकर अन्य कार्यो के लिए नंबर मिलने थे। नंबर की चाहत में इतनी बड़ी अनदेखी कर दी गई। ऐसा भ्रष्टाचार देश को विकास की जगह विनाश पर पहुंचा सकता है जो कि मान्य नहीं है।

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