राजस्थान में अच्छी बारिश के लिए साधु ने प्रचंड गर्मी में शुरू की हठ साधना

publiclive.co.in[edited by divya sachan]
प्रदेश के श्री गंगानगर में एक साधु 50 डिग्री के तापमान के बीच अग्नि जलाकर हठ साधना कर रहे है. हालांकि इसका मकसद कोई निजी स्वार्थ हल करना नहीं मकसद अगर कोई है तो वह है भारत का विकास राजस्थान का विकास किसानों के लिए फसलों के लिए बारिश की प्राथर्ना करना.

राजस्थान में इन दिनों पड़ रही जुलसा देने वाली गर्मी के बीच अगर आपको कोई कहे कि धूप में 2 मिनट खड़े हो जाए तो आपके पसीने छूट जाएंगे, लेकिन गंगानगर जिले का भारत-पाकिस्तान सीमावर्ती इलाके का गांव में एक साधु योगी पूर्णनाथ गुरु डॉक्टर योगी बिलासनाथ हठ साधना में व्यस्त है. उनके लिए 50 से 70 डिग्री का तापमान कोई मायने नहीं रखता.

बता दें कि पिछले 9 दिन से लगातार गोबर के थपेड़ों से बनी 32 धुनियो को जलाकर देश और प्रदेश की खुशहाली कि प्राथर्ना में जुटे हुए हैं. योगी पूर्णनाथ की यह हठ साधना पूरे 41 दिन तक चलेगी, जिसमे योगी पूर्णनाथ रोजाना तपती धूप में अपने आश्रम के आंगन में 12 बजे दिन की दोपहर में हठ साधना में लीन हो जाते है. वह 5 से 6 घण्टे लगातार हठसाधना करते है वो भी अपना कोई निजी स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि समाज के लिए.

गौरतलब है कि हठसाधना शारीरिक और मानसिक विकास के लिए विश्व की प्राचीनतम प्रणाली है, जिसका सदियों से भारत के योगियों द्वारा अभ्यास किया गया है. मनोकायिक व्यायामों की यह एक अनन्यतम विधि है. हठसाधना और हठयोग के आसन मानसिक प्रशांति, शारीरिक संतुलन और दिव्य प्रभाव के साथ प्रतिपादित होते हैं. इससे मेरुदंड लचीला बनता तथा स्नायु संस्थान के स्वास्थ्‍य में वृद्धि होती है, जिसके चलते हठ योग करने वाले साधू किसी भी परिस्थिति में साधना करने को तैयार हो जाते है.

हठ योग के नियमित अभ्यास से आप अपना खोया हुआ स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं. आत्मा की गुप्त शक्तियों को उद्घाटित कर अपनी संकल्पशक्ति में वृद्धि कर सकते हैं और जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर आत्मसाक्षात्कार के उत्कृष्ट शिखर पर आसीन हो सकते हैं. हठयोग के आसन मन एवं शरीर के सूक्ष्म संबंध के पूर्ण ज्ञान पर आधारित एक अद्धभुत मनोशारीरिक व्यायाम प्रणाली है. अन्य सभी उच्च योग जैसे- कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग की सिद्धि के लिए हठयोग एक साधन है. मन और शरीर ही सारे मानवीय प्रयत्नों आध्यात्मिक तथा भौतिक का आधार है.

वही वरिष्ठ पत्रकार हरदेव सिंह जीता का कहना है की हठयोग योग के कई प्रकारों में से एक है योग के अन्य प्रकार ये हैं- मंत्रयोग, लययोग, राजयोग. हठयोग के आविर्भाव के बाद प्राचीन ‘अष्टांग योग’ को राजयोग’. प्रोफेसर गुरमेज़ सिंह का कहना है की भारत वर्ष मे बहुत बढ़े बढ़े हठयोगी हुए है जिनकी योग साधना का फायदा राजा महाराजा भी अपने राज मे सुख समृद्धि के लिए साधुओ से तपस्या करवा लेते रहे है. जिसका मकसद यही होता था की इस साधना को करने के बाद साधू जैसा चाहते थे वेसा ही होता था. पर आज के समय मे ये सब नहीं हो रहा जिसका उदाहरण हमारे सामने है की 2 साल की बच्चियों से बलात्कार लूट डकैती हो रही है. ये सब इन चीजों से दूर होने का ही परिणाम है. उनका कहना है की साधू बन जाना आसान है पर हठयोगी बन जाना और वो भी दूसरे के फायदे के लिए यह बहुत मुश्किल है.

हठ योग की साधना पर श्री विजयंनगर बाबा बालक डेरा के संत का कहना है की जब 32 धुनिया मे एक साथ अग्नि प्रभाहित होती है उस वक़्त आप पास खड़े तक नहीं हो सकते तापमान अगर बाहर 50 डिग्री है तो अंदर 70 डिग्री से भी ज्यादा होता है और ये सब कोई जिद्दी साधु ही कर सकता है. कोई कुछ भी कहे पर साधू योगी पूर्णनाथ गुरु डॉक्टर योगी बिलासनाथ हठ साधना में जुटे है. अब 41 दिन बाद उनकी साधना जब पूरी होगी तब ही पता लग पाएगा की क्या इस साधना से क्या फायदा हुआ.

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