डॉक्टरों की हड़ताल से मरीजों में मचा त्राहिमाम, इमरजेंसी में भी नहीं मिल पा रहा है सही से इलाज

publiclive.co.in[Edited by Arti singh]
पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों के विरोध की आंच में राजधानी लखनऊ के मरीज भी तप रहे हैं. केजीएमयू, एसजीपीजीआई, लोहिया संस्थान और सभी निजी अस्पतालों में आज हड़ताल है. एसजीपीजीआई में ओपीडी और सर्जरी पूरी तरह बंद है जबकि केजीएमयू और लोहिया संस्थान में संकाय सदस्यों के सहारे ओपीडी चलाने की बात कही जा रही थी लेकिन वहां भी पूरी बंदी है. इससे मरीज काफी परेशान हैं और उनके पर्चे नहीं बन पा रहे हैं.

प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर भी कर रहे हैं विरोध
कोलकाता में डॉक्टर्स के साथ अभद्रता के मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बेहद गंभीर होने के कारण सरकारी के साथ प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर्स के कार्य बहिष्कार का बड़ा असर उत्तर प्रदेश में भी पड़ा है. एसजीपीजीआइ सहित प्रदेश के बड़े अस्पताल के डॉक्टर्स हाथ पर काली पट्टी बांधकर कार्य बहिष्कार पर हैं. जिसके कारण प्रदेश में चिकित्सा सेवा ठप हो गई है. मरीज के साथ तीमारदार बेहद परेशान हैं.

केजीएमयू, लोहिया और एसजीपीजीआई के रेजीडेंटों ने कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया था. आज हड़ताल के चलते करीब 30 हजार मरीज प्रभावित हो सकते हैं. करीब ढाई हजार मरीजों का ऑपरेशन टलने के आसार हैं. सभी डॉक्टरों की मांग है कि कोलकाता में चिकित्सकों पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. चिकित्सकों को उनके कार्यस्थल पर सुरक्षा का प्रबंध किया जाए.

हड़ताल की वजह से जांच से लेकर सर्जरी तक प्रभावित हो रही है. केजीएमयू में प्रतिदिन करीब आठ से 10 हजार मरीज आते हैं. विभिन्न छोटी-बड़ी मिलाकर करीब दो सौ सर्जरी होती है. पीजीआई में करीब सौ से सवा सौ सर्जरी प्रतिदिन होती है.

लोहिया संस्थान में भी 50 से 80 सर्जरी का औसत रहता है. जबकि आईएमए के अनुमान के मुताबिक, राजधानी के विभिन्न निजी चिकित्सा संस्थानों में करीब दो हजार लोगों की सर्जरी होती है. इस तरह औसतन ढाई हजार मरीजों का ऑपरेशन टलना तय है. इसके अलावा ब्लड, कार्डियोलॉली व रेडियोलॉजी की जांचें भी प्रभावित हो रही है.

एसजीपीजीआई , केजीएमयू और लोहिया संस्थान में जूनियर डॉक्टर के कार्य बहिष्‍कार करने पर मरीज परेशान रहे. हड़ताल की घोषणा के बाद भी राजधानी में केजीएमयू और लोहिया संस्‍थान में मरीज आ रहे हैं और उनके बैरंग लौटने का सिलसिला जारी है. वहीं जांच के लिए भी मरीज भटकते रहे. केजीएमयू, पीजीआई और लोहिया संस्‍थान में मरीजों को नहीं देखा गया. वहीं मरीजों को जांच करवाने में भी पसीने छूट गए.

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