कामाख्या देवी मंदिर परिसर में मिली सिर कटी लाश, नरबलि की आशंका

publiclive.co.in[edited by divya sachan]
असम की राजधानी गुवाहाटी के पश्चिम छोर पर स्थित नीलांचल पर्वत पर प्रसिद्ध शक्ति पीठ कामाख्या मंदिर परिसर के पास नवदुर्गा मंदिर की सीढ़ियों पर बुधवार मध्य रात एक महिला की सिर कटी लाश बरामद होने से इलाके में सनसनी फ़ैल गई हैं. हैरानी की बात हैं कि आगामी 22 जून से शुरू होने जा रही कामाख्या धाम में प्रसिद्ध अम्बुवासी मेले की तैयारियों में जुटे प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के बावजूद मंदिर परिसर के पास मिली सिर कटी लाश से 24 घंटे चौकसी के दावें पर सवालिया निशान खड़ा हो गया हैं .

गुवाहाटी कामरूप मेट्रो पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार के साथ पुलिस की टीम घटनास्थल पहुंच कर क्षेत्र का मुयाना करने के बाद जानकारी देते हुए बताया की लाश के पास से पूजन सामग्री भी बरामद हुई हैं . इस बीच पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया हैं.

अभी तक लाश की पहचान नहीं हो पाई हैं. नीलांचल पहाड़ स्तिथ कामाख्या धाम क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने संदेह जताया हैं की ये नर बलि की घटना हो सकती हैं. बता दें की हिन्दुओं के 51 शक्ति पीठों में से एक कामरूप कामाख्या मंदिर विशेष रूप से तंत्र साधना के लिए जाना जाता हैं.

मंदिर में सदियों से चली आ रही है बलि परंपरा
ये गुवाहाटी के पश्चिम छोर पर स्थित कामाख्या जंक्शन से केवल 6 किलोमीटर की दूरी पर समुद्री तल से 800 फ़ीट की ऊंचाई पर नीलांचल पर्वत पर स्तिथ हैं. मान्यता हैं कि तांत्रिकों को तंत्र मन्त्र की सिद्धि कामाख्या धाम में पूजा अर्चना और भैंस ,बकरी की बलि देने के बाद ही पूर्ण होती है.

चूंकि मंदिर में आज भी बकरी, भैसों की बलि प्रथा कायम हैं और शायद इसीलिए स्थानीय लोग कामाख्या धाम में सिर कटी मिली लाश से ये कयास लगा रहे हैं कि सदियों पहले समाप्त हो चुके नर बलि परंपरा में अब भी कई तांत्रिकों को विश्वास होने के चलते भी ये नर बलि की घटना हो सकती हैं . फिलहाल पुलिस ने इस मामले पर कुछ भी बताने से इंकार करते हुए बताया हैं की जांच जारी हैं और मंदिर परिसर में अम्बुवासी मेले के निगरानी में लगे 300 सीसीटीवी कैमरें की फुटेज खंगालने की बात कही हैं.

क्या है अंबूबाची मेला
आपको बता दें कि नीलांचल पर्वत स्तिथ कामाख्या धाम में हर साल की तरह इस वर्ष आगामी 22 जून मध्य रात्रि से प्रसिद्ध अंबूबाची मेला शुरू हो रहा हैं, इस दौरान 3 दिनों तक देवालय के सभी द्वार बंद रखा जाता हैं , इसके 3 दिनों के पश्चात 26 जून की सुबह 6 बजे पूजा अर्चना के बाद भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर का द्वार खोल दिया जायेगा.

अंबूबाची मेले की ये मान्यता हैं की इस दौरान माँ कामाख्या की रक्त स्राव होती हैं, इसलिए इस दौरान मंदिर का द्वार 3 दिनों तक बंद रखा जाता हैं . इस बार अंबूबाची मेला में 25 लाख श्रद्धालुओं की समावेश होने की आस लगाई जा रही हैं .

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