पिता की मौत के बाद सड़क पर आया पूरा परिवार, खाने के पड़े लाले

publiclivenews.in[Edited by DIVYA SACHAN]
बांदीकुई उपखण्ड की खारवाल ढाणी का एक परिवार जो कुछ समय पहले भरा पूरा था, लेकिन विधाता की ऐसी मार हुई कि अचानक पति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. जिसके बाद मां पर तीनों बेटियों के लालन-पालन का भी संकट खड़ा हो गया. लेकिन बेबस मां के सामने ऐसी मजबूरी आ खड़ी हुई है कि अपनी तीनों बेटियों को अकेला छोड़कर मेहनत मजदूरी करने के लिए दूर नहीं जा सकती है. ऐसे में अपना और तीन बेटियां का जीवन-यापन का कोई सहारा नहीं होने के कारण रोजाना तीनों बहनें दिन की भूख आसपास के घरों से रोटी मांगकर करीब 7 माह से अपने पेट की आग बुझा रही है.

दरअसल दौसा जिले के बांदीकुई उपखण्ड की धनावड़ ग्राम पंचायत की खारवाल ढाणी निवासी गिर्राज पुत्र नहनु राम खारवाल उम्र करीब 30 वर्ष की करीब 7 माह पहले सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी. उसकी पत्नी शांति देवी के पास अपनी तीनो बेटियों की परवरिश व जीवन यापन करने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा है. यहां तक कि इस परिवार के पास कोई जमीन जायदाद भी नहीं है जिसमे कमाई करके वह दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर सकें. हर समाज के लोग जनसेवा करने का भले ही लंबे लम्बे दावे करते हो लेकिन इस बेबस मां व तीनों नन्ही बच्चियों के पास हाल पूछने आज तक कोई नहीं पहुंचा.

बेबस विधवा महिला शांति देवी ने बताया कि उनके पति जब तक जीवित थे तब तक परिवार में खूब हंसी खुशी से रह रहे थे वह मजदूरी करके हमारा जीवन यापन कर रहे थे, लेकिन पति की मौत के बाद दुखों का पहाड़ सा ऊपर टूटकर आ गया है. कोई भी रिश्तेदार हमारे पास नहीं आता है और नहीं कोई हमारी मदद कर रहा है. शांति देवी के पास ना ही रहने को पक्का मकान है और ना ही जमीन जायदाद है. वह अपना और तीनों बेटियों का टूटी झोपड़ी में जीवन यापन कर रही है. जिसमे बरसात के समय झोपड़ी में भी पानी भर जाता है. तब बेबस मां अपनी तीनों बेटियों को कलेजे से लगाकर बैठे बैठे रात गुजारती हैं.

पिता की मौत के बाद हालात ऐसे हैं कि तीनों बेटियां के पेट भरने का भी संकट हो गया है. वही इस भीषण गर्मी में फ़टे पुराने कपड़ों व बिना चप्पलों के ही नंगे पांव समय बिताना पड़ा है. बड़ी बेटी नीरज से जब पूछा गया की आपके पास कपड़े व चप्पल नहीं है तो उसका जवाब था कि पापा के चले जाने के बाद किसी ने दिलाए ही नहीं. शांति देवी ने बताया कि त्यौहार हो या ढाणी में शादी समारोह तो तीनों बेटियां दूसरे बच्चो के नए कपड़े व जूते चप्पल देखकर ही अपनी खुशी मना लेती है. अपनी पीड़ा सुनाते हुए शांति देवी की आंखों से आंसू आने लगे तो फफक-फफक कर रोने लगी.

वहीं शांति देवी सरकारी सुविधाओं का लाभ कैसे ले उस बारे में उसे कुछ पता नहीं है और न हीं वो इस बारे में समझती है. जिसके कारण आज तक कोई भी सरकारी सुविधाओ का लाभ नहीं मिला है. यहां तक कि उन्हें विधवा पेंशन भी नही मिल रही है और ना ही पालनहार योजना से नाम जोड़ा गया है तथा नही खाद्य राशन सामग्री मिल रही है. यहां तक कि उन्हें राशन डीलर द्वारा गेंहू, चीनी, तेल भी नहीं दिया जा रहा है.

हालांकि, इस समस्या से ग्राम पंचायत सचिव व सरपंच को अवगत भी करा दिया है. यदि सरकारी सुविधाओं का लाभ मिले तो जीवन यापन करने में कुछ मदद मिले. सरकार की ओर से गरीब असाहाय और कमजोर लोगों के लिए ढेरो योजनाए चलाई हुई है लेकिन उन योजनाओं का लाभ जरूरतमन्दो को कहीं मिलता हुआ नहीं दिख रहा है. उसकी वजह है प्रभावी मॉनेटरिंग नहीं होना. सरकारी योजनाओं का जरूरत मन्दो को लाभ मिले इसके लिए गांव के पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी सहित सरपंच की अहम जिम्मेदारी होती है. साथ ही अधिकारी भी समय समय पर सरकारी योजनाओं के संचालन की समीक्षा करते रहे तो ऐसे जरूरत मंद लोगो को उन योजनाओं का लाभ मिल सकता है.

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