कांग्रेस में उठी मांग, सोनिया गांधी फिर से संभालें अध्यक्ष पद की कमान

publiclivenews.in[Edited by DIVYA SACHAN]
लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद से अध्यक्ष पद को लेकर असमंजस की स्थिति से जूझ रही कांग्रेस पार्टी से अब नई जानकारी सामने आ रही है. सूत्रों के हवाले से खबर कि पार्टी के कुछ नेता चाहते हैं कि एक बार कांग्रेस की कमान सोनिया गांधी के हाथों में सौंप देनी चाहिए. ऐसा बताया जा रहा है कि राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद पार्टी के हालातों को देखते हुए कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सोनिया गांधी से दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष पद की कमान संभालने की अपील की है, हालांकि सोनिया गांधी ने इस मामले पर बोलने से मना कर दिया है.

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस पार्टी को मिली हार की जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. लंबे नाटक के बाद कांग्रेस पार्टी को आखिरकार राहुल गांधी का इस्तीफा मंजूर करना पड़ा था. राहुल गांधी ने इससे पहले कांग्रेस वर्किंग कमेटी को नया अध्यक्ष चुनने के लिए 1 महीने का समय भी दिया था लेकिन कांग्रेस वर्किंग कमेटी ऐसा नहीं कर सकी और कांग्रेस नेताओं द्वारा बार बार राहुल गांधी से पद पर बने रहने की गुहार लगाई गई.

राहुल गांधी ने अपने इस्तीफे के दौरान कहा था कि कांग्रेस का अध्यक्ष नेहरू-गांधी परिवार से बाहर का व्यक्ति बने. लेकिन पार्टी के भीतर के लोगों ने बार बार प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी का ही नाम लिया. अब सोनिया गांधी को दोबारा कांग्रेस की कमान सौंपे जाने की खबर ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि कांग्रेस में गांधी परिवार से बाहर अध्यक्ष बनाने को लेकर अभी तक कोई सहमति नहीं बन सकी है.

कांग्रेस अध्‍यक्ष पद की दौड़ में मनमोहन सिंह और मुकुल वासनिक का नाम सबसे आगे: सूत्र
कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर तलाश अभी खत्म नहीं हो पाई है. तमाम विकल्पों पर पार्टी विचार कर रही है. सूत्रों के मुताबिक मौजूदा समय में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस महासचिव पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल वासनिक के नाम पर के नाम पर गंभीर चर्चा चल रही है. हालांकि अभी तक इस पर सहमति नहीं बन पाई है.

सूत्रों के मुताबिक मनमोहन सिंह का नाम पार्टी के कुछ सीनियर नेताओं की तरफ से उछाला गया है और यह दलील दी जा रही है कि मनमोहन सिंह को अध्यक्ष बनाकर उनके नीचे 4 वर्किंग प्रेसिडेंट बना दिए जाएं जो कि चार अलग-अलग रीजन का प्रतिनिधित्व करते हों और अलग-अलग जातियों के हों. मनमोहन सिंह के साथ के साथ प्लस पॉइंट यह है कि उनकी छवि साफ-सुथरी और ईमानदार व्यक्ति की है. अगर वह अध्यक्ष बनते हैं तो उनके नीचे काम करने में कांग्रेस पार्टी के किसी नेता को परेशानी नहीं होगी और गुटबाजी पर भी लगाम लगेगी.

हालांकि मनमोहन सिंह का नाम आगे बढ़ाने में जो चीज फेवर नहीं कर रही है, वह है उनकी उम्र. मनमोहन सिंह की उम्र तकरीबन 86 साल है. कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर उन्हें तमाम राज्यों के दौरे करने पड़ेंगे. पब्लिक मीटिंग्स को एड्रेस करना पड़ेगा. उनकी सेहत को देखते हुए परेशानी हो सकती है. अगर मनमोहन सिंह कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं तो उन पर रबड़ स्टांप होने का भी आरोप लग सकता है, क्योंकि बीजेपी प्रधानमंत्री रहते उन पर ये आरोप लगा चुकी है.

मुकुल वासन‍िक भी हो सकते हैं पहली पसंद
मनमोहन सिंह के अलावा कांग्रेस महासचिव मुकुल वासनिक के नाम पर भी विचार हो रहा है. उनके बारे में दलील दी जा रही है कि मुकुल वासनिक का संगठन में काम करने का 40 साल का अनुभव है. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के तमाम पदों पर सफलतापूर्वक काम किया है. इसके अलावा मुकुल वासनिक साफ-सुथरी छवि के दलित नेता है. उन पर आज तक गुटबाजी या करप्शन का कोई आरोप नहीं लगा है. मुकुल वासनिक लोकसभा के दो बार सांसद सांसद रह चुके हैं. वह मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे थे.

तम‍िलनाडु, केरल और पुडुचेरी में कांग्रेस का अच्‍छा प्रदर्शन
उनके पक्ष में यह बात भी है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में वह तमिलनाडु पुडुचेरी और केरल जैसे राज्यों में पार्टी के इंचार्ज रहे जहां पार्टी ने लोकसभा में अच्छा परफॉर्मेंस किया है. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और मुकुल वासनिक के अलावा सुशील कुमार शिंदे, मल्‍ल‍िकार्जुन खड़गे समेत तमाम नामों पर चर्चा हुई थी, लेकिन खड़गे और सुशील कुमार शिंदे के नाम पर फिलहाल सहमति बनती नहीं दिखाई दे रही है.

हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने किसी युवा नेता को अध्यक्ष बनाए जाने का सुझाव पार्टी को दिया था. ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट मिलिंद देवड़ा के नाम पर भी विचार हुआ था. लेकिन सूत्रों के मुताबिक गांधी परिवार के करीबी कुछ सीनियर नेता किसी युवा को अध्यक्ष बनाए जाने पर सहमत नहीं है. उनको लगता है कि अगर कोई नौजवान अध्यक्ष बना तो पार्टी में गुटबाजी बढ़ सकती है. पार्टी पर नियंत्रण के लिए सीनियर और जूनियर नेताओं में लड़ाई भी छिड़ सकती है, जिससे कांग्रेस का और ज़्यदा नुकसान हो सकता है.

महाराष्‍ट्र और हरियाणा जैसे राज्‍यों में हो सकता है नुकसान
आनिर्णय की स्थिति से कांग्रेस कमजोर होती जा रही है. आगामी कुछ महीनों में महाराष्ट्र झारखंड दिल्ली हरियाणा जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव है. जहां पार्टी तैयारी शुरू नहीं कर पाई है.

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