वाइको ने की जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के लिए याचिका दाखिल

publiclivenews.in [edited by Pragya Simoniya]
एमडीएमके चीफ वाइको की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया. इस मामले में सरकार से 30 सितंबर तक जवाब देने को कहा है. वहीं, सीतराम येचुरी की अर्जी और पत्रकार अनुराधा भसीन समेत जम्मू-कश्मीर से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई.

वाइको की याचिका में कहा गया है कि 15 सितंबर को चेन्नई में पूर्व मुख्यमंत्री अन्नादुरई के 111वीं जन्मशताब्दी समारोह आयोजित होना है. इसमें शामिल होने के लिए पूर्व सीएम फ़ारूक़ अब्दुल्ला तैयार हो गए थे, लेकिन जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को हटाने के फैसले के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. उनको ग़ैर क़ानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया है.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फ़ारूक़ अब्दुल्ला को हिरासत में लिए जाने की कोई जानकारी नहीं है. दरअसल वाइको ने फारूक अब्दुल्ला से मिलने की इजाजत भी अथॉरिटी से मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया. ऐसे में उन्होंने कहा कि अदालत केंद्र सरकार को निर्देश दे कि वो फारूक को पेश करें ताकि वह इस समारोह में शामिल हो सकें.

– जम्मू-कश्मीर की जेलों में नाबालिगों के शोषण के एक मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला गंभीर है. सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा,” मैं व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से बात करूंगा. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से रिपोर्ट मिलने के बाद ज़रूरत पड़ी तो मैं खुद कश्मीर जाऊंगा.”

– सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वे इस बारे में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करें कि हाईकोर्ट मुकदमों के लिए सुलभ है या नहीं.

– सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 5 अगस्त के बाद जम्मू कश्मीर में एक भी गोली नहीं चली है, एक भी शख्स की जान नहीं गई है जबकि 1990 से लेकर 5 अगस्त तक यहां 41866 लोग जान गंवा चुके हैं. 71038 हिंसा की घटनाएं हुई हैं, जिनमें 15292 सुरक्षा बलों को जान गंवानी पड़ी.

– सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल ने कहा कि साल 2016 में एक आतंकी की मौत के बाद पूरा जम्मू कश्मीर हिंसा की आग में झुलस गया था. तब भी हालत को देखते हुए मोबाइल- इंटरनेट सर्विस पर राज्य सरकार को प्रतिबंध लगाने पड़े थे.

गुलाम नबी आजाद को कश्मीर जाने की इजाजत
सुप्रीम कोर्ट ने गुलाम नबी आजाद को श्रीनगर, जम्मू, अनंतनाग और बारामुला जाने की अनुमति दी, जिससे कि वे अपने क्षेत्र के लोगों का हालचाल ले सकें. इससे पूर्व कोर्ट में कांग्रेस नेता के वकील ने कहा कि हमें अपने लोगो से मिलने के लिए श्रीनगर, अनंतनाग और बारामूला जाना है. आजाद ने कहा कि हम वहां राजनीतिक रैली नहीं करने जा रहे हैं. हमें तीन बार एयरपोर्ट से वापस कर दिया गया. हमें अपने गृह जिले में नहीं जाने दिया गया.

पत्रकार अनुराधा भसीन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाई है कि जम्मू कश्मीर में पत्रकारों पर बंदिशें लगा दी गई हैं. उन्होंने देश की सबसे बड़ी अदालत से अपील की है कि जम्मू-कश्मीर में पत्रकारों को अपनी मर्जी से काम करने की इजाजत दी जाए. कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से इन आरोपों पर पूछा कि क्या ऐसा है कि इस तरह की पाबंदी है? एजी का जवाब- मीडिया को सारी सुविधाएं दी जा रही हैं. उनको इंटरनेट और टेलीफोन की सुविधा मुहैया कराई जा रही है. नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया जा रहा है. कश्मीर में न्यूज़ पेपर 5 अगस्त से पब्लिश हो रहा है, दूरदर्शन और कई लोकल टीवी चैनल टेलीकास्ट हो रहे हैं, इसके अलावा कई रेडियो भी ब्रॉडकास्ट हो रहे हैं, मीडिया कर्मियों को सुविधाएं दी जा रही हैं. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि 15 सितंबर तक 10.52 लाख लोगों ने OPD सुविधा ली है.

सीतराम येचुरी की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी पार्टी के नेता यूसुफ तारीगामी को जम्मू कश्मीर लौटने की इजाजत तो दे दी, लेकिन उन्हें जम्मू कश्मीर में बिना किसी रोक के घूमने या फिर सुरक्षा मुहैया कराने पर कोई आदेश देने से इंकार किया.

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