गांधी जयंती : झीलों की नगरी भोपाल से बापू का था गहरा नाता

publiclivenews.in(edited by shubham tawar)
भोपाल। यूं तो ये गांधी का देश है,इसकी रूह में बसते हैं गांधी, लेकिन देश के दिल से झीलों की नगरी से बापू का एक खास नाता है। उनकी 150 वीं जयंती पर भोपाल से जुड़ी महात्मा गांधी की यादें फिर ताज़ा हो उठी हैं। वो नवाबों का दौर था, देश अंग्रेजों का गुलाम था और इसी बीच आजादी की अलख जगाने बापू तीन दिन तक भोपाल में ठहरे। 8 सितंबर 1929 को भोपाल आए महात्मा गांधी ने यहां रामराज्य लाने की अलख जगाई थी।

सच में हर तरह से महान हैं गांधी, वो जैसे ही मध्यप्रदेश और खासतौर पर भोपाल की धरती पर पहुंचे तो आते ही यहां की गंगा-जमुनी तहज़ीब को भांपा और यहां रामराज्य लाने की बात की। वो दौर था जब बापू देशभर में घूम-घूम कर भारत की आजादी का अलख जगा रहे थे। इसी दौरान वो मध्य प्रदेश पहुंचे । उन्होंने भोपाल,इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, देवरी, इटारसी, बैतूल, मुलताई, सागर और दमोह तक पहुंचे। 90 साल पहले 1929 में आठ से दस सितंबर तक गांधीजी,भोपाल नवाब के आवास अहमदाबाद पैलेस के करीब बनी राहत इमारत में ठहरे। उस समय स्वदेसी की पहचान हुआ करती था खादी। सो कोठी को खासतौर पर खादी के कपड़ों से सजाया गया। खादी के पर्दे,खादी के चादरें,खादी के तकियों से सुसिज्जत किया गया। वैसे अब उस दौर सी शान-औ-शौकत नहीं है इस कोठी की…अब ये केवल एक मैदान का रूप ले चुकी है।

दरअसल,हुआ ये कि..इंग्लैंड में होने वाली कॉफ्रेंस में इंडियन नेशनल कांग्रेस को नहीं बुलाया गया …भोपाल नवाब हमीदउल्ला खां चैंबर ऑफ प्रिंसली के अध्यक्ष थे,तो गांधीजी ने अपनी बात उस कांफ्रेस तक पहुंचाने के लिए नवाब से भोपाल में आकर मुलाकात की …भोपाल आने के तीसरे दिन बापू ने बेनजीर ग्राउंड पर सभा की जिसका चर्चा सारे देश में हुआ।.वैसे तो बापू को सुनना हमेशा से क्रांतिकारी रहता था लेकिन ये सभा इसीलिए भी खास हो गई क्योंकि यहां बापू ने राम राज्य पर लंबा भाषण दिया था। वो जानते थे कि ये नवाबों का शहर है,यहां की फिज़ा में एक अलग तासीर है तो उन्होंने साफ किया कि रामराज्य का मतलब हिंदू राज्य कतई नहीं है…रामराज्य यानि ईश्वर का राज…बापू ने कहा, मेरे लिए राम और रहीम में कोई अंतर नहीं है।मेरे लिए सत्य और सतकार्य ही ईश्वर है।

इतना ही नहीं गांधी के ऐतिहासिक भाषण के बाद भोपाल की आवाम ने खादी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें तब 1035 रुपए भेंट किए थे। वैसे गांधी जी को भोपाल आना दो बार हुआ एक जब 1933 में महात्मा गांधी हरजन यात्रा पर निकले। भोपाल रेलवे स्टेशन पर गाड़ी बदलने के लिए रुके थे। उन्हें देखने-सुनने के लिए रेलवे स्टेशन भारी भीड़ जुटी..जब बापू ने लोगों से देशहित में दान की अपील की तो एक छोटी बालिका ने अपनी अंगूठी दे दी थी। इतिहासकारों के मुताबिक 1929 में भोपाल में हुई सभा में गांधीजी ने कहा था कि वो देश के लिए जिस रामराज्य सोच रखते हैं उसकी झलक उन्हें भोपाल में दिखाई देती है।
गांधीजी की 150वीं जयंती पर आज फिर भोपाल को वो मैदान,वो इमारत,वो स्टेशन बापू को याद कर रहा है। साथ ही इंतजार है उसी रामराज्य की स्थापना का जिसका सपना बापू ने ना केवल भोपाल के लिए बल्कि देश के लिए देखा था…।

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