यूपी में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने की तैयारी, यह 10 जिले बनेंगे मैन्युफैक्चरिंग हब, बढ़ेगा रोजगार, घटेगा प्रदूषण

इलेक्ट्रिक गाड़ियों की नीति को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू हो गई है। इससे एक ओर जहां रोजगार बढ़ेगा वहीं हवा में प्रदूषण फैलने से रोकेगा। शासन ने इलेक्ट्रिक वाहनों की नीति को लागू कराने के लिए परिवहन विभाग को कार्य योजना भेजी हैं। जिसमें भारत सरकार की नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन योजना 2020 शुरू करने की बात कहीं गई है।

लखनऊ समेत प्रदेश के दस महानगरों में कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, आगरा, मेरठ, झांसी, फतेहपुर व गोरखपुर में मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा। यहां आटोमोबाइल कंपनियां हाईबिड इलेक्ट्रिक बसों का मॉडल तैयार करेंगी। वाहन की डिजाइन इस प्रकार की जाएगी कि चार्जिंग घर पर भी हो सके। इससे 50 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।

लखनऊ में बिजली से चलने वाले वाहन
बैटरी चलित ई रिक्शा-22, 715
मोटर साइकिल व स्कूटर-630
चार पहिया मोटर कार-30
चार पहिया यात्री वाहन-40

फैक्ट फाइल
-प्रदेश के दस शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों की निर्माण इकाई लगेगी
-इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर उप्र तीसरा बड़ा राज्य बनेगा

नादरगंज स्कूटर इंडिया में वाहन बनना शुरू
आरटीओ (प्रशासन) आरपी द्विवेदी बताते है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के कार्ययोजना के अनुसार लखनऊ के नादरगंज में स्कूल इंडिया की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन शुरू हो गया। वहीं आधा दर्जन कंपनियों के मैन्युफैक्चरिंग प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

इलेक्ट्रिक वाहन नीति का उद्देश्य
-राज्य के महानगरों को हरित पर्यावरण बनाना
-वाहनों के मैन्युफैक्चरिंग से रोजगार पैदा करना
-पेट्रोल-डीजल के बजाए बिजली से काम लेना

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