MP में SDO का खूनी खेल:बंदूक की नोंक पर बहू को 3 दिन से बनाया बंधक, समधी छुड़ाने पहुंचे तो मारी गोली; पुलिस पर भी फायरिंग

घायल समधी को अस्पताल में कराया गया भर्ती।

  • रीवा शहर का मामला,
  • पुलिस आधे किमी दूर से छोड़ने के लिए अनाउंसमेंट कर रही

रीवा में SDO ने बंदूक की नोंक पर अपनी ही बहू को बंदी बना लिया है। बेटी के फोन पर 3 दिन बाद छुड़ाने पहुंचे पिता पर 3 फायर कर दिए। एक गोली पैर में लगी। सूचना मिलते ही आसपास थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस जवान जैसे ही घर के अंदर जाने की कोशिश करने लगे, SDO ने फायरिंग कर दी। वह रुक-रुककर फायर कर रहा है। इसकी वजह से पुलिस आधे किलोमीटर दूर से महिला को छोड़ने की मिन्नत कर रही है।

डिंडौरी में तैनात SDO का बेटा भोपाल में रहता है। घर में सिर्फ बहू और ससुर रहते हैं। रीवा शहर के समान थाना स्थित नेहरू नगर के SDO सुरेश मिश्रा ने अपनी बहू को तीन दिन पहले बंधक बना लिया। महिला ने अपने पिता श्रीनिवास तिवारी (68) को फोन करके पूरी घटना बताई। गुरुवार दोपहर 12 बजे श्रीनिवास बेटी के ससुराल पहुंचे। उन्होंने समधी से बेटी को छोड़ने की मिन्नत की, लेकिन एसडीओ ने कुछ भी बात सुनने से इनकार कर दिया। कहा, मेरे घर से भाग जाओ नहीं तो गोली मार दूंगा। जब श्रीनिवास नहीं हटे तो उसने बंदूक से 3 फायर कर दिए। एक गोली गोली उनके पैर में लग गई। वह मौके पर ही गिर गए और देर तक छटपटाते रहे। कुछ रिश्तेदारों ने मदद करते हुए उनको संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया है। साथ ही समान पुलिस को सूचना दी है।

अंदर जाने पर कर रहा है फायरिंग
एसडीओ अंदर से लगातार फायर कर रहा है। ऐसे में कोई भी पास नहीं जा रहा है। अंत में पुलिस ने जिला प्रशासन को सूचना दी है। जहां से तहसीलदार मौके पर पहुंचकर अनाउंसमेंट कर रहे है। वहीं, पुलिस का रेस्क्यू भी नहीं हो पा रहा है। समान पुलिस का कहना है कि भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद है। कड़ाई नहीं कर सकते, क्योंकि उसके कब्जे में बहू है। ऐसे मिन्नतें कर रहे है कि शायद मान जाए।

पुलिस के पास नहीं कोई प्लान, भगवान भरोसे रेस्क्यू
बता दें कि सनकी एसडीओ किसी की बात नहीं सुन रहा है। फिर भी पुलिस प्रशासन हाथ पर हाथ रखे बैठे हुए है। पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी आधा किमी दूर से अनाउंसमेंट करा रहे हैं। ऐसे में घर के अंदर की बातें नहीं पता चल पा रही है। हालांकि अभी तक बंधक बनाने का कारण पता नहीं चल सका है।

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