आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक नीति के मुख्य ‎बिंदू Public Live

0
12

आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक नीति के मुख्य ‎बिंदू

PublicLive.co.in

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास द्वारा घोषित द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के मुख्य ‎बिंदू इस प्रकार हैं:

* नीतिगत दर या रेपो दर 6.5 प्रतिशत पर बरकरार।

* वित्त वर्ष 2024-25 के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो चालू वित्त वर्ष के 7.3 प्रतिशत के अनुमान से कम है।

* चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति औसतन 5.4 प्रतिशत रहेगी। 2024-25 में यह घटकर 4.5 प्रतिशत पर आ जाएगी।

* ब्याज दरों में कटौती का लाभ अभी पूरी तरह उपभोक्ताओं को नहीं मिली है।

* मौजूदा आर्थिक गति अगले वित्त वर्ष में भी बरकरार रहेगी।

* रबी बुवाई में सुधार, विनिर्माण क्षेत्र में निरंतर लाभप्रदता, 2024-25 में आर्थिक गतिविधि का समर्थन करने के लिए सेवाएं मजबूत।

* निवेश चक्र गति पकड़ रहा है, निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में सुधार के संकेत।

* भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, निरंतर वृद्धि पथ पर आत्मविश्वास से प्रगति कर रही है।

* सरकार राजकोषीय के सुदृढ़ीकरण पथ पर कायम है; घरेलू आर्थिक गतिविधियां मजबूत।

* खाद्य पदार्थों की कीमतों में अनिश्चितता का मुख्य मुद्रास्फीति पर प्रभाव जारी है।

* भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से आपूर्ति शृंखला पर असर पड़ रहा है, जिससे जिंस की कीमतों पर दबाव पड़ रहा है।

* विदेशी मुद्रा भंडार 622.5 अरब अमेरिकी डॉलर; विदेशी दायित्वों को पूरा करने के लिए संतोषजनक।

* घरेलू वित्तीय प्रणाली स्वस्थ बही-खाते के साथ मजबूत बनी हुई है।

* विनियमित संस्थाओं को अनुपालन, उपभोक्ता हित संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

* आरबीआई खराब या सीमित इंटरनेट संपर्क वाले क्षेत्रों में लेनदेन के लिए सीबीडीसी-रिटेल में एक ऑफ लाइन कार्यक्षमता शुरू करेगा।

* चालू वित्त वर्ष में भारतीय रुपये की विनिमय दर काफी स्थिर रही।

* मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अगली बैठक तीन से पांच अप्रैल को होगी।

Previous articleपिज्जा आउटलेट पर सफाई कर रहे  युवक की करंट लगने से हुई मौत Public Live
Next articleअब स्वामी प्रसाद मौर्य बोले- क्या राम निर्जीव थे जो उनकी प्राण प्रतिष्ठा करनी पड़ी  Public Live
समाचार सेवाएं समाज की अहम भूमिका निभाती हैं, जानकारी का प्रसार करने में समर्थन करती हैं और समाज की आंखों और कानों का कार्य करती हैं। आज की तेज गति वाली दुनिया में ये समय पर, स्थानीय और वैश्विक घटनाओं के बारे में समय पर सटीक अपडेट्स के रूप में कार्य करती हैं। ये सेवाएं, चाहे वे पारंपरिक हों या डिजिटल, घटनाओं और जनजागरूकता के बीच का सेतु बनाती हैं। ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स के आगमन के साथ, समाचार वितरण को तत्काल बनाए रखने का सुनहरा अवसर है, जिससे वास्तविक समय में बदला जा सकता है। हालांकि, गलत सूचना और पक्षपात जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, जो सत्यापनीय पत्रकारिता की महत्वपूर्णता को अधीन रखती हैं। सत्य के परकी रखने वाले रूप में, समाचार सेवाएं केवल घटनाओं की सूचना नहीं देतीं, बल्कि जानकारी की अखंडता को भी बनाए रखती हैं, एक जागरूक और लोकतांत्रिक समाज के लाभ में योगदान करती हैं।