बीजेपी का काम धर्म शास्त्रों के विरुद्ध, निर्माणाधीन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा गलत : दिग्विजय सिंह Public Live

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बीजेपी का काम धर्म शास्त्रों के विरुद्ध, निर्माणाधीन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा गलत : दिग्विजय सिंह

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रतलाम ।   मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि लोकसभा चुनाव में फायदा लेने के लिए भाजपा ने निर्माणाधीन मंदिर में ही प्राण प्रतिष्ठा कर दी। ये धर्म शास्त्रों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश में लोकसभा चुनाव में 10 से 15 सीटें जीत सकती है, अगर मशीन न हो तो, आप समझ सकते हैं। दरअसल दिग्विजय सिंह रतलाम के डेलनपुर में एक विवाह समारोह में शामिल होने आए थे।  दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा पूरे देश के सरकार गिराने और सरकार बनाने का काम कर रही है। खेला केवल बिहार में ही नहीं पूरे देश में हो रहा है। आपने देखा होगा कि अजित पवार जी के खिलाफ तीन दिन पहले कह रहे थे कि सात हजार करोड़ घोटाले वाले को जेल भेजेंगे और महाराष्ट्र में तीन दिन बाद मुख्यमंत्री बना दिया गया। पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसी प्रकार आसाम के मुख्यमंत्री जिनके बारे में पूरी भारतीय जनता पार्टी ने सबसे भ्रस्ट मुख्यमंत्री उपाधि दी थी। वही आज भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री बने हुए हैं। अभी आपने वीडियो देखे होंगे। आज से दो साल पहले नीतीश जी कह रहे थे कि मैं अपने जीवन के आखिरी सांस तक कभी बीजेपी से समझौता नहीं करूंगा। वहीं अमित शाह जी कह रहे हैं कि बता दीजिए नीतीश कुमार और लल्लन जी को कि आपके लिए भाजपा के दरवाजे सदैव के लिए बंद कर दिए गए हैं। 

अवसरवादिता में भाजपा माहिर

अवसरवादिता जो हे उसमें भारतीय जनता पार्टी माहिर है। नीतीश भारतीय जनता पार्टी के साथ चले गए ठीक है, लेकिन वे कब तक रहेंगे, ये न तो नीतीश कुमार को मालूम है न मोदी जी को और न ही अमित शाह जी को मालूम है।

भगवान राम को अपमानित कर रही भाजपा

कांग्रेस नेता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा भगवान राम को अपमानित कर रही है। धर्म का उपयोग राजनीति में करना भी अपराध है। सभी धर्म एक ही रास्ता बताते हैं वो रास्ता है इंसानियत का, भलमनसाहत का। हमारे धर्म के नारे भी वही है प्राणियों में सद्भावना हो। क्या भाजपा आरएसएस और विहिप जिस रास्ते पर जा रही है क्या यह सद्भावना का रास्ता है? राम मंदिर कभी इन का विषय नहीं रहा। राम मंदिर का विवाद तो 1850 से चल रहा है।