भारत जोड़ो यात्रा के वीडियो से एफआईआर, बनी सियासी हथियार

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भोपाल| मध्य प्रदेश से होकर गुजर रही कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के एक कथित वीडियो ने सियासत में हलचल मचा दी है और अब तो एफआईआर सियासी हथियार बन गया है। कांग्रेस और भाजपा ने एक दूसरे के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया है। राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान 25 नवंबर को एक वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में कथित तौर पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे सुनाई दिए। अब इसी वीडियो को लेकर दोनों राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं और एक दूसरे के मीडिया विभाग से जुड़े प्रमुखों पर थाने तक में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

वीडियो वायरल होने के बाद पहली रिपोर्ट कांग्रेस की ओर से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में दर्ज कराई गई। वहां यह रिपोर्ट कांग्रेस के विधि प्रकोष्ठ की ओर से दर्ज कराई गई है जिसमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश के भाजपा के मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पाराशर ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के वीडियो से छेड़छाड़ कर उकसाने, षड्यंत्र करने, दंगा भड़काने का प्रयास किया है। पाराशर पर आरोप है कि उन्होंने डाक्टर्ड वीडियो रिट्वीट किया था जिसमें पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे को जोड़ा गया है।

एक तरफ जहां कांग्रेस की ओर से भाजपा के मीडिया विभाग के प्रभारी पाराशर के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई गई तो दूसरी ओर भाजपा की ओर से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी पीयूष बबेले और आईटी विभाग के प्रमुख अभय तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है।

भाजपा के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी और सह मीडिया प्रभारी नरेंद्र शिवाजी पटेल ने यह शिकायत क्राइम ब्रांच में दर्ज कराई है, जिसमें कहा गया है कि कांग्रेस के राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कमलनाथ एवं संपूर्ण कांग्रेस पार्टी द्वारा भारत जोड़ो यात्रा की आड़ लेकर पूरे देश में देश विरोधी कृत्य किए जा रहे हैं एवं यात्रा में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जा रहे हैं ताकि देश की लोक शांति भंग हो सके।

दोनों ही राजनीतिक दलों की ओर से थानों में दर्ज कराई गई शिकायतों पर पुलिस ने मामले भी दर्ज कर लिए हैं। कुल मिलाकर एक कथित वीडियो ने राजनीतिक विद्वेष को और बढ़ा दिया है। साथ ही मामला पुलिस थाने तक भी पहुंच गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, राज्य में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और दोनों राजनीतिक दलों को इस बात का एहसास है कि अगले चुनाव में जीत हासिल करना उनके लिए बहुत आसान नहीं है, लिहाजा सियासी दांवपेच आजमाने से कोई पीछे नहीं रहने वाला, इस बात के संकेत अभी से मिलने लगे हैं।






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