कर्नाटक: 2 निर्दलीय विधायकों ने जेडीएस-कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लिया, सरकार का संकट बढ़ा

publiclive.co.in[Edited by Ranjeet]
नई दिल्‍ली: कर्नाटक में एचडी कुमारस्‍वामी सरकार का संकट गहराता जा रहा है. दो निर्दलीय विधायकों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. समर्थन वापसी की चिट्ठी उन्‍होंने राज्‍यपाल को सौंपी. इस संबंध में निर्दलीय विधायक आर शंकर ने न्‍यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि आज मकर संक्रांति है. इस मौके पर हम सरकार में बदलाव चाहते हैं. जेडीएस-कांग्रेस सरकार विफल रही है जबकि सरकार सक्षम होनी चाहिए. इसलिए कर्नाटक सरकार से मैं अपना समर्थन वापस लेता हूं.

इसी कड़ी में दूसरे निर्दलीय विधायक एच नागेश ने कहा कि मैंने बेहतर और स्‍थायी सरकार के लिए गठबंधन को समर्थन दिया था लेकिन ऐसा नहीं हो सका. गठबंधन दलों में कोई तारतम्‍य नहीं है. इसलिए मैंने इस सरकार से समर्थन वापस लेकर स्‍थायी सरकार के लिए बीजेपी के पाले में जाने का फैसला लिया है.

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इसके साथ ही महाराष्ट्र में बीजेपी के कैबिनेट मंत्री राम शिंदे ने एक बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि आने वाले दो तीन दिन में कर्नाटक में बीजेपी की सरकार बनेगी. मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के पास बहुमत नहीं है. कर्नाटक में बीजेपी के साथ न्‍याय नहीं हुआ था. बहुमत बीजेपी को था लेकिन सरकार जेडीएस-कांग्रेस ने बनाई थी.

इस बदलते घटनाक्रम पर टिप्‍पणी करते हुए कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री एचडी कुमारस्‍वामी ने कहा कि सरकार पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. इसी तरह उपमुख्‍यमंत्री और कांग्रेस नेता जी परमेश्‍वर ने कहा कि बीजेपी धन और बल के दम पर हमारे विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है लेकिन सरकार को अस्थिर करने की उनकी कोशिशें सफल नहीं होंगी. हमारी सरकार को कोई खतरा नहीं है.

विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप
इससे पहले कर्नाटक में विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप-प्रत्यारोप का दौर सोमवार को उस वक्‍त एक बार फिर शुरू हो गया जब सत्तारूढ़ कांग्रेस-जदएस गठबंधन तथा भाजपा ने एक-दूसरे पर विधायकों को लालच देकर तोड़ने के आरोप लगाए. वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि स्थिर सरकार चलाने के लिए उनके पास ‘‘पर्याप्त संख्या बल’’है.

सूत्रों के मुताबिक इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस के छह से आठ विधायक भाजपा के साथ जाने के लिए तैयार हैं और कुछ विधायकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है. इस बीच, कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार में ‘‘अस्थिरता’’ का सवाल ही पैदा नहीं होता है.

‘ऑपरेशन कमल’
कांग्रेस – जदएस ने जहां भाजपा पर विधायकों को लालच देने के आरोप लगाए वहीं राज्य भाजपा के प्रमुख बीएस येदियुरप्पा ने इन खबरों को खारिज कर दिया कि सरकार गिराने के लिए उनकी पार्टी ‘ऑपरेशन कमल’ में लगी हुई है. उन्होंने कहा कि आरोपों में कोई सत्यता नहीं है और कहा कि कांग्रेस- जदएस गठबंधन उनकी पार्टी के विधायकों को लालच देने का प्रयास कर रहा है.

सोमवार को दिल्ली में भाजपा विधायकों और सांसदों से मुलाकात करने के बाद येदियुरप्पा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने नहीं, उन्होंने (जद एस – कांग्रेस) खरीद-फरोख्त की शुरुआत की है. हम एक-दो दिनों तक दिल्ली में रुकेंगे क्योंकि कुमारस्वामी हमारे विधायकों से संपर्क साधने के प्रयास में हैं और खरीद-फरोख्त शुरू हो गई है.’’

उन्होंने कहा कि भाजपा ‘‘सतर्क और सावधान’’ है क्योंकि मुख्यमंत्री ‘‘शक्ति और धन’’ का इस्तेमाल कर हमारे विधायकों को लुभाने का प्रयास कर रहे हैं. कांग्रेस ने भी कहा कि येदियुरप्पा, सरकार को अस्थिर करने का ‘‘व्यर्थ प्रयास’’ कर रहे हैं. 224 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 104 विधायक, कांग्रेस के 79, जद-एस के 37, बसपा, केपीजेपी और निर्दलीय के एक-एक विधायक हैं. बसपा, केपीजेपी और निर्दलीय विधायक गठबंधन सरकार का समर्थन कर रहे हैं. ‘ऑपरेशन कमल’ का जिक्र 2008 में भाजपा द्वारा विपक्ष के कई विधायकों का दल बदल करवाकर तत्कालीन बी एस येदियुरप्पा सरकार की स्थिरता सुनिश्चत कराने के लिए किया जाता है.

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