Assam Election: यहां जापी और गमोसा का बड़ा भाव है, अच्छा! असम में चुनाव है

इस साल असम सहित चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. सभी राज्य की अपनी अलग सांस्कृतिक-सामाजिक पहचान होती है. चुनाव के दौरान वोर्टस को रिझाने के लिए सभी नेता राज्य की पारंपरिक संस्कृति को अपनाने या यूं कहें उसमें ढलने की कोशिश करते हैं. आइए एक नजर डालते हैं असम चुनाव में जापी (टोपी), गमोसा (गमछा) और जोराई (घंटी धातु) का क्या महत्व है

  • असम में शंकु के आकार की टोपी को जापी के नाम से जाना जाता है
  • असम में गमोसा का उपयोग मेहमानों के स्वागत के लिए किया जाता है

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Assam Election: यहां जापी और गमोसा का बड़ा भाव है, अच्छा! असम में चुनाव है

नई दिल्ली: असम में सत्ता हासिल करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस के अपनी तरफ से कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन वहां के लोग किस पार्टी को अपना नेता चुनते हैं यह 2 मई को साफ हो जाएगा. इस बार का चुनाव भाजपा के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. उनके लिए इस बार सबसे बड़ी चुनौती राज्य में अपने आप को स्थापित करना है.  

हर राज्य की अपनी सांस्कृतिक-सामाजिक पहचान होती है. सत्ता पर काबिज होने के लिए चुनाव के दौरान राजनेता उसी राज्य की संस्कृति को अपना लेते हैं. इन दिनों असम में कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है. कोई भी राजनेता जब किसी राज्य में चुनावी रैली को संबोधित करने के लिए जाते हैं, तो वहीं की वेष-भूषा को अपना लेते हैं और अपने राजनीतिक हित साधने में जुट जाते हैं.

ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि असम चुनाव में जापी (टोपी), गमोसा (गमछा) और जोराई (घंटी धातु) का क्या महत्व है? क्यों हर कोई राजनेता इसी राज्य की पारंपरिक संस्कृति में नजर आता है. क्या ये सब करने से पार्टी को लाभ मिलता है

असम की संस्कृति की बात की जाए तो वहां के लोगों के लिए के जापी यानी टोपी बहुत महतवपूर्ण है. असम में शंकु के आकार की टोपी को जापी के नाम से जाना जाता है. असम में चुनावी रैली के दौरान आपको कई राजनेता जापी पहने हुए जरूर दिखेगा.

अब इसका फायदा उसको होता है या नहीं यह तो 2 मई को ही स्पष्ट हो जाएगा. दरअसल, जापी का इस्तेमाल किसान खेतों में धूर से बचने के लिए करते हैं. आज असम के बजारों में आपको रंग-बिरंगी कई तरह की जापी मिल जाएंगी. हालांकि अकसर इस टोपी का इस्तेमाल मेहमानों के स्वागत के लिए किया जाता है. चुनाव के दौरान बजारों में जापी की बहार है.

असम में गमोसा का उपयोग मेहमानों के स्वागत के लिए किया जाता है. साल 1916-17 में यह गमोसा यानी कि गमछा असमिया राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में सामने आया था. इन दिनों असम में चुनावी रैली के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियकां गांधी सभी इस गमछे में नजर आएंगे.

गमोसा हाथ से बना लाल सफेद धारियों वाले बार्डर से बना गमछा होता है. अब बड़े-बड़े नेता इस गमोसा को पहन कर अपने आप को असम से जोड़ रहे हैं.

जोराई (घंटी धातु): दूसरा सबसे बड़ा हस्तशिल्प उद्योग

असम में जोराई प्रार्थना के दौरान उपयोग किया जाता है. यहां के हर घर में आपको जोराई यानी कि घंटी मिल जाएगी. बता दें कि घंटी धातु तांबे और टिन का एक मिश्र धातु है. इतना ही नहीं असम का घंटी धातु उद्योग, बांस शिल्प के बाद दूसरा सबसे बड़ा हस्तशिल्प उद्योग है.

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