उज्जैन के हॉस्पिटल में भीषण हादसा ;-फ्रीगंज स्तिथ पाटीदार हॉस्पिटल में देखते -देखते जल गया पूरा icu वार्ड, मरीज़ जान बचा कर भागे अस्पताल कर्मचारियो ने सुरक्षित निकलने में मरीज़ो की मदद की

उज्जैन

भगदड़, भीड़ और सामान्य-कोरोना मरीजों और बचाव दल की एक ही जगह मौजूदगी। - Dainik Bhaskar

भगदड़, भीड़ और सामान्य-कोरोना मरीजों और बचाव दल की एक ही जगह मौजूदगी।

  • आग से सुरक्षा के इंतजाम नहीं इसके लिए पाटीदार सहित 17 हॉस्पिटल को 3 महीने पहले मिला था नोटिस
  • प्रसूताएं बाहर, अंदर रह गए थे नवजात, डॉक्टरों ने निकाला

दोपहर का वक्त था। हॉस्पिटल में आग की शुरुआत आइसोलेशन वार्ड में एक पंखे से हुई। उस वक्त वार्ड बाॅय शीला चौहान मरीज को खाना दे रही थीं। उन्होंने बताया पास के बेड पर पंखे से धुआं और फिर आग निकली। मैं चिल्लाई तो गार्ड भैया आए और आग को बुझाने की कोशिश करने लगे। आग तेजी से फैल रही थी। देखते ही देखते बेड और वेंटिलेटर व एसी भी जलने लगे। चीख-पुकार मची तो कुछ मरीज उठकर भागने लगे। तब तक दूसरी मंजिल का स्टाफ भी दौड़कर आया। सभी बचे हुए मरीजों को वार्ड से बाहर निकालने में लग गए। चारों तरफ धुआं-धुआं हो गया था। भास्कर टीम पहुंची, तब तक सबकुछ जल चुका था। फायर ब्रिगेड की टीम कांच फोड़कर पानी फेंक रही थी। अस्पताल में कोरोना और सामान्य मरीजों की भगदड़ मची थी।

वार्ड में जले हुए उपकरण, दवाएं और खाना पड़ा था। गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पताल शिफ्ट किया जा रहा था। वहां मौजूद अस्पताल कर्मचारी मनोज चौधरी ने बताया अग्निशमन यंत्र से आग बुझाने का प्रयास किया। इस बीच कुछ कर्मचारियों ने खिड़की का कांच तोड़ उसमें से मरीजों को बाहर निकाला। फिर लाइट बंद होने से अंधेरा व धुआं हो गया। कुछ समझ नहीं आ रहा था। हमारा भी दम घुटने लगा था। फायर ब्रिगेड की टीम ने खिड़की से पानी फेंका, जिससे अंदर पानी ही पानी हो गया था। 2 भास्कर संवाददाता और 2 फोटोग्राफर धुएं, पानी और पॉजिटिव मरीजों बीच अंदर तक जा पहुंचे।

जब टीम 5वीं मंजिल पर पहुंची, वहां पांच नवजात के साथ प्रसूता व परिजन थे। सब घबरा रहे थे। माधवनगर थाने के पुलिसकर्मियों ने यहां पहुंचकर डॉक्टरों की मदद से सभी को छत पर ले जाने के बाद पड़ोस की निर्माणाधीन बिल्डिंग में भिजवाया। यहां से नीचे लाकर उन्हें एंबुलेंस की मदद से अन्य अस्पताल भेजा। ऑपरेशन के बाद भी महिलाएं जैसे-तैसे सीढ़ियों से उतर रही थीं। हम बाहर आए तो एक महिला चीखी। नाम पूछने पर रानी, निवासी राजगढ़ बताया। बोली- मेरा बच्चा अंदर ही रह गया है। वह एनआईसीयू में है। स्टाफ से बात करवाई, तो जवाब मिला घबराओ मत बच्चा सुरक्षित है। बाद में सभी बच्चों को सौंप दिया गया।

कोरोना संक्रमित और सामान्य मरीज सब एक ही एंबुलेंस में ले गए
आग की घटना के बाद अस्पताल में जिस तरह से अफरा-तफरी मची उसके बाद यह पता कर पाना मुश्किल हो गया कि कौन मरीज सामान्य है और कौन कोविड पेशेंट है। सभी को अस्पताल से बाहर एक साथ निकाला गया और एक ही एंबुलेंस से भेजते भी रहे। संकरी गली से जैसे-तैसे एंबुलेंस आ रही थी और हर मरीज को लोग स्ट्रेचर पर या पैदल सहारा देते हुए अन्य अस्पताल ले गए।

ब्रिज से सटा अस्पताल एंबुलेंस को जगह नहीं मिल पा रही थी
आग लगने की घटना के बाद यह बड़ी खामी भी सामने आई कि अस्पताल जीरो पाइंट ब्रिज से सटा होने के कारण एंबुलेंस को आने की जगह तक नहीं मिल पा रही थी। सरकारी अस्पताल और अन्य प्राइवेट अस्पताल की एंबुलेंसों को अस्पताल के दोनों रास्तों की तरफ से घूमकर आना पड़ा, इसमें देर लगी और गली जैसा रास्ता होने से मशक्कत भी अधिक हुई।

ऐसे बची मरीजों की जान; आईएमए और प्राइवेट डॉक्टर जुटे, आधे घंटे में मरीज शिफ्ट करवाए
आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन)के पदाधिकारी हादसे की सूचना मिलते ही पाटीदार हॉस्पिटल पहुंच गए। उन्होंने तत्काल मरीजों को शिफ्ट करवाना शुरू किया। डॉ. कात्यायन मिश्र, डॉ. जितेंद्र भटनागर, डॉ. सुधाकर वैद्य, डॉ. उमेश जेठवानी, डॉ. अजय खरे, डॉ. राजेंद्र बंसल आदि चिकित्सकीय धर्म निभाते हुए अपने यहां की एम्बुलेंस व स्टॉफ लगाया, साथ ही खुद भी पाटीदार हॉस्पिटल में मरीजों को शिफ्ट करवाने में लगे रहे।
पुलिस-प्रशासन की सक्रियता
घटना के तुरंत बाद फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासन एक्टिव हो गया। आग बुझाने के अलावा लोगों को बचाकर बाहर निकालने में भी तेजी दिखाई और तत्काल अन्य अस्पतालों में शिफ्ट करते गए। ऐसा नहीं होता, तो कई मरीजों की जान जा सकती थी। बल्कि इनमें कई कोरोना मरीज थे और अन्य में भी संक्रमण फैलने का खतरा था।

24 घंटे में रिपोर्ट देगी जांच कमेटी, पंखे की आग क्यों नहीं बुझा पाए?
अग्निकांड के बाद कलेक्टर ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है जिसे 24 घंटे में रिपोर्ट देना है। कमेटी पता लगा रही है कि जिस आईसीयू में आग लगी वह सबसे अधिक आक्सीजन थी। ऐसे में पंखे में लगी आग पर अस्पताल प्रबधन क्यों काबू नहीं कर पाया। अस्पताल में जले हुए पंखे के तार जब्त किए है।

पुलिसकर्मी व फायर ब्रिगेड कर्मचारी पहली मंजिल पर चढ़ गए, आग बुझाई
पुलिसकर्मियों व फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर हॉस्पिटल की पहली मंजिल तक चढ़ गए। उन्होंने खिड़की को तोड़ा और फायर फाइटर के पाइप को वार्ड में पहुंचा कर पानी की बौछार से आग बुझाई।

सीएम का ट्वीट- मुफ्त होगा इलाज
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा है कि पाटीदार हॉस्पिटल में शार्ट सर्किट से लगी आग में 80 मरीज फंसे थे। सबको आधे घंटे के अंदर रेस्क्यू किया गया है। चार लोगों के झुलसने की खबर है, जिनके नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था की गई है।
मंत्री बोले- ऐसे हादसे आगे से न हो
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने पाटीदार अस्पताल में आग लगने पर दु:ख जताते हुए कलेक्टर से कहा कि ऐसे हादसे आगे से नहीं हो, इसका ध्यान रखा जाए। हादसे की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। झुलसे मरीजों का इलाज करवाया जाए। इलाज के लिए इंदौर के अस्पताल से भी चर्चा की गई है।
कलेक्टर बोले- मरीजों को बचा लिया
^शॉर्ट सर्किट से पाटीदार हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में आग लगी थी, जिस पर काबू पा लिया गया। चार मरीज झुलसे हैं जिनमें से दो मरीजों की हालत गंभीर होने से उन्हें इंदौर रैफर किया है। बाकी मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है।
आशीष सिंह, कलेक्टर

कोविड के मरीजों के फेफड़ों में धुंआ भरा, सांस की तकलीफ और बढ़ी
पाटीदार हॉस्पिटल में इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को बाहर निकालने के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। ऐसे में मरीजों को बाहर निकालने में मुश्किल आई। हॉस्पिटल के एक ही रास्ते से लोग आते-जाते हैं। संकरे चढ़ाव से इमरजेंसी स्थिति में मरीजों को सुरक्षित ले जाना मुश्किल भरा रहा। खिड़कियों के कांच फोड़कर मरीजों को बाहर निकालना पड़ा।

हॉस्पिटल में भर्ती 80 मरीजों में से 25 मरीज कोरोना संक्रमित थे। उनके फेफड़े इंफेक्शन की वजह से खराब होने के बीच हॉस्पिटल में लगी आग के धुएं से उनके फेफड़ों में धुआं भर गया। इससे मरीजों के फेफड़े और डेमेज हो सकते हैं और उनकी जान का खतरा भी बढ़ गया है। हादसे की जानकारी लगते ही कलेक्टर आशीष सिंह,एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ल पाटीदार हॉस्पिटल पहुंचे थे।
13 एम्बुलेंस लगी, दो-दो राउंड में 54 मरीजों को शिफ्ट किया
पाटीदार हॉस्पिटल से 54 मरीजों को एम्बुलेंस से शिफ्ट किया गया। इसमें करीब 13 एम्बुलेंस लगाई गई। हर एम्बुलेंस से दो से तीन राउंड लगे। फ्रीगंज और आसपास के हॉस्पिटल के लिए दो से तीन राउंड तथा दूर के अस्पतालों के एक या दो राउंड ही लगे। इधर, बिजली कंपनी के एसई आशीष आचार्य ने बताया हॉस्पिटल की इंटरनल बिजली व्यवस्था में ही स्पार्किंग होने से आग लगी है।

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