हमले के 24 घंटे टेकलगुड़ा पहुंची फोर्स:24 घंटे तक पड़े रहे शहीदों के शव; बाहर नक्सलियों की घेराबंदी, हेलीकॉप्टर पहुंचा तब भी किया ब्लास्ट

जगदलपुर/बीजापुर/

घटना के दूसरे दिन रविवार दोपहर जवानों के शवों को बाहर निकालने के लिए दोबारा ऑपरेशन लांच किया गया तो फिर से बैकअप पार्टी को निशाना बनाने के लिए नक्सलियों ने एक विस्फोट किया। - Dainik Bhaskar

घटना के दूसरे दिन रविवार दोपहर जवानों के शवों को बाहर निकालने के लिए दोबारा ऑपरेशन लांच किया गया तो फिर से बैकअप पार्टी को निशाना बनाने के लिए नक्सलियों ने एक विस्फोट किया।

  • गोलीबारी के बीच शहीदों के शव लेकर आई फोर्स

बीजापुर-सुकमा जिले की सरहद पर सुकमा जिले के जोनागुड़ा और टेकलगुड़ी के पास शनिवार को नक्सली हमले में 23 जवानों के शहीद होने के बाद कई भयावह खबरें आई हैं। सबसे चिंताजनक खबर यह है कि नक्सलियों के कोर एरिया में ऑपरेशन चलाने के बाद हमले में शहीद हुए जवानों के शवों को लाने के लिए 24 घंटे से ज्यादा समय लग गया। शहीद जवानों की लाशें 24 घंटे तक टेकलगुड़ा गांव में पड़ी रहीं।

हमले के बाद घायल जवानों को तो बैकअप फोर्स ने रात में ही जंगलों से बाहर निकाल लिया था, लेकिन शहीद जवानों के शव मौके पर ही पड़े हुए थे। दूसरे दिन हेलीकॉप्टर से शहीद जवानों के शवों लाने फोर्स गई थी इस दौरान भी नक्सलियों ने विस्फोट किया। बताया जा रहा है कि टेकलगुड़ा गांव में कुछ जवानों के शवों को नक्सलियों ने एक जगह जमा भी कर दिया था। हमले के बाद जब शनिवार को बैकअप फोर्स घायल जवानों को लेकर बीजापुर लौटी, तब दूसरी तरफ नक्सलियों ने शहीद हुए जवानों के शवों को जमा करना शुरू किया। कई शहीद जवानों के शव को नक्सलियों ने गांव में ही एक जगह जमा कर दिया। शहीद जवानों के हथियार और कारतूस भी नक्सलियों ने लूट लिए थे। इसके बाद शनिवार की पूरी रात और फिर रविवार की दोपहर 12 बजे तक शहीद जवानों के शव मौके पर ही पड़े रहे।

हेलीकॉप्टर से गई फोर्स, शहीदों के शवों को लाया
घटना के दूसरे दिन रविवार दोपहर जवानों के शवों को बाहर निकालने के लिए दोबारा ऑपरेशन लांच किया गया तो फिर से बैकअप पार्टी को निशाना बनाने के लिए नक्सलियों ने एक विस्फोट किया। इस घटना में एक जवान के घायल होने की भी खबर है। जवानों के शवों को जंगलों से बाहर निकालने के लिए वायु सेना के हेलीकॉप्टर की मदद ली गई और हेलीकॉप्टर के जरिए शहीद जवानों के शवों को जंगल से बाहर लाया गया।

घटनास्थल से जवानों के शवों को निकालकर जगदलपुर के मेडिकल कॉलेज लाया गया है पहले चरण में करीब 12 जवानों के शव मेकाज पहुंचे हैं जहां उनका पीएम किया जाएगा इसके बाद जवानों के शवों को उनके गृहग्राम के लिए रवाना किया जाएगा। देर शाम तक फोर्स सभी 23 शहीदों के शव लेकर आ चुकी थी। वहीं सीआरपीएफ का एक जवान लापता था। दरअसल शनिवार दोपहर जोनगुड़ा की पहाड़ियों के पास हमले के बाद जब घायल जवान टेकलगुड़ा गांव पहुंचे तो वहां भी नक्सलियों ने हमला कर दिया था।

5 बड़ी चूक; जिनके कारण इतना बड़ा नुकसान हुआ

1. बड़ी संख्या में एक साथ जवान
ऑपरेशन के लिए दो हजार से ज्यादा जवानों को जंगलों में उतारा गया। इनमें एक टुकड़ी 7 सौ की तो अन्य टुकड़ियों में भी सैकड़ों जवान। जो टुकड़ी नक्सलियों के बीच फंसी उसमें भी 450 जवान थे।

2. जवानों का फॉर्मेशन भी गलत
जिस दौरान हमला हुआ तब कई जवान एक साथ एक ही इलाके में मौजूद थे। ऐसे में नक्सलियों की गोलियां सीधे सामने चल रहे जवानों को लगी। ऑपरेशन के दौरान जंगल के नियमों का पूरा पालन भी नहीं।
3. ऑपरेशन पूरा हुआ ये समझकर लौट रहे थे
एंबुश में फंसने का एक बड़ा कारण यह है कि जवानों को जिस स्थान पर भेजा गया था वहां पहुंचने के बाद जवान निश्चिंत हो गए। नक्सलियों ने जवानों को पहले अंदर आने दिया और फिर फंसाया।

4. घायल जवान गांव की तरफ गए
जोनागुड़ा के निकट जवानों पर फायरिंग हुई यहां से घायल हुए जवान और अन्य पार्टी टेकलगुडा़ में घरों की तरफ आ गये घायल जवान और नक्सली। हमला झेल चुके जवान यह भूल गये कि गांव में भी नक्सली हो सकते हैं

5. बैकअप प्लान नहीं
सुबह 11 बजे मुठभेड़ शु़रू हुई जो 3 बजे तक चलती रही इन पांच घंटो में कोई बैकअप फोर्स घटनास्थल तक ही नहीं पहुंची। घायल अवस्था में जवान खुद ही बाहर निकले और घटनास्थल से कई किमी दूर बैकअप पार्टी जवानों को मिली।

घायल एएसआई आनंद कुसाम

घायल एएसआई आनंद कुसाम

घायल जवान की आंखों देखी; ऑपरेशन से लौटते वक्त हुआ हमला, 6-7 सौ नक्सली थे

मेरे साथ 450 जवानों की एक पार्टी थी, हमें जिस ऑपरेशन के लिए भेजा गया था उसे हम खत्म कर वापस लौट रहे थे। जब हम ऑपरेशन के लिए गए थे तब कोई नक्सली हलचल नहीं थी जब लौटे तो फायरिंग हो गई। नक्सली 6 सौ से 7 सौ की संख्या में थे। सुबह 11 बजे के मुठभेड़ शुरू हुई जो 3 बजे तक चलती रही। वापसी में हमारी मदद के लिए जो बैकअप पार्टी वह हमें दो किमी पहले मिली।

-जैसा कि हमले में घायल एएसआई आनंद कुसाम ने बताया

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