श्रद्धा पथ पर बर्फ की चट्‌टानें:10 मई से शुरू होंगे श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन, बर्फ से भरे रास्ते को साफ करने में जुटे सेना के जवान

चंडीगढ़

श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा क - Dainik Bhaskar

श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा क

  • पवित्र यात्रा के रास्ते में दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई में हर साल बर्फ की मोटी परतें जम जाती है
  • श्री हेमकुंड साहिब की पवित्र यात्रा 10 मई से कोविड गाइड लाइन के बीच शुरू हो रही है।

(लखवंत सिंह). सिखों के पवित्र स्थान गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब जी के दर्शन इस बार श्रद्धालु 10 मई से कर सकेंगे। कोविड गाइड लाइन को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं को आना होगा। श्री हेमकुंड मैनेजमेंट ट्रस्ट के ट्रस्टी मनिंदरजीत सिंह बिन्द्रा की ओर से बताया गया कि इस बार गुरुघर गोविंदधाम से श्री हेमकुंड साहिब तक के दो किलोमीटर के रास्ते में बर्फ को हटाने के लिए भारतीय सेना की 418 इंडीपेंडेंट इंजीनियरिंग कोर के जवान पहुंच गए हैं।

उन्होंने इस मार्ग पर दिन-रात मेहनत से बर्फ को हटाने का काम शुरु कर दिया है। श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने इस पवित्र स्थान पर अपने पूर्व जन्म में तपस्या की थी। जिसके चलते यह स्थान पवित्र माना जाता है। इस स्थान के पास पर्वत की सात चोटियां हैं। जिसमें से आने वाले पानी से एक पवित्र सरोवर बनता है। इस समय यह सरोवर पूरी तरह से बर्फ से जमा हुआ है।

उत्तराखंड के चमौली जिले में 15 हजार 200 फीट की उंचाई पर गुरुघर है।

उत्तराखंड के चमौली जिले में 15 हजार 200 फीट की उंचाई पर गुरुघर है।

गुरुघर जाने वाले रास्ते पर हर साल बर्फ जम जाती है जिसे सेना के जवान हटाते हैं।

गुरुघर जाने वाले रास्ते पर हर साल बर्फ जम जाती है जिसे सेना के जवान हटाते हैं।

रास्ते पर 8 से 9 फीट बर्फ
बिन्द्रा ने बताया कि इस समय गुरुघर के पास 8 से 9 फीट तक बर्फ पड़ी हुई है। गुरुद्वारा, सरोवर और आस- पास का क्षेत्र पूरी तरह से बर्फ से ढका हुआ है। हालांकि, पिछले साल इन दिनों यहां 20 फीट से अधिक तक बर्फ जमी रहती थी, लेकिन इस बार बर्फ कम है। उन्होंने बताया कि यात्रा के अंतिम पड़ाव घांघरिया में बर्फ नहीं है, लेकिन अटलाकुड़ी से हेमकुंड साहिब तक चारों ओर बर्फ जमी है। उत्तराखंड के चमौली जिले में स्थित यह गुरुघर 15 हजार 200 फीट की उंचाई पर है।

इस समय गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब जाने के लिए इस तरह बर्फ जमी हुई है

इस समय गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब जाने के लिए इस तरह बर्फ जमी हुई है

सेना के जवान दिन-रात बर्फ हटाने का काम कर रहे है

सेना के जवान दिन-रात बर्फ हटाने का काम कर रहे है

यात्रा शुरू होने से 72 घंटे पहले का कोविड आरटीपीसीआर टेस्ट जरुरी
श्री हेमकुंड मैनेजमेंट ट्रस्ट के ट्रस्टी मनिंदरजीत सिंह बिन्द्रा ने बताया कि इस बार उत्तराखंड सरकार की ओर से इस पवित्र यात्रा में आने वाले यात्रियों को यात्रा से 72 घंटे पहले का कोविड आरटीपीसीआर का टेस्ट जरुरू होगा। इसके अलावा जिन यात्रियों ने वैक्सीन डोज की दोनों खुराक ले ली है। वे इस यात्रा में अपनी सर्टिफिकेट लेकर आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में जिस तरह से कोरोना संक्रमण का प्रभाव है उसे देखते हुए यात्रा के दौरान यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए कोविड गाइड लाइन जरूरी है।

सेना के जवान 20 से 25 दिनों तक बर्फ हटाने का काम करते है

सेना के जवान 20 से 25 दिनों तक बर्फ हटाने का काम करते है

ट्राईसिटी और पंजाब से हजारों की संख्या में जाती है संगत
पवित्र गुरुघर के दर्शन करने के लिए हर साल हजारों की संख्या में ट्राईसिटी व पंजाब के अलावा देश भर से संगत अपनी श्रद्धा लेकर जाती है। चंडीगढ़,मोहाली और पंचकूला से हजारों की संख्या में सिख संगत श्री हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए वहां जाते है। यात्रा ऋषिकेश गुरुघर से शुरू की जाती है। वहां से पहले गुरुद्वारा गोविंद घाट पहुंचा जाता है। उसके बाद पैदल या फिर घोड़े पर सवार होकर गुरुद्वारा गोविंदधाम पहुंचा जाता है। उसके बाद श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा उंचे पहाड़ों से होते हुए शुरू होती है। इस दौरान ग्लेशियर भी आता है जिसके रास्ते में 10-10 फिट की बर्फ की दीवारों से होकर पैदल जाना होता है। श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे में पहुंच कर वहां बर्फ से सराबोर पवित्र सरोवर में संगत स्थान करती है, जिससे सारी थकान मिट जाती है।

इस समय बर्फ इस तरह जमी हुई है

इस समय बर्फ इस तरह जमी हुई है

सेना की 418इंडीपेंडेंट इंजीनियरिंग कोर के जवान डटे हुए

गुरुघर गोविंदघाट के सेवादार सेवा सिंह ने बताया कि दर्शन के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। इस बार तीर्थयात्रा पंद्रह दिन पहले शुरू हो रही है, इसलिए अभी से यात्रा की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। गुरुद्वारों में रंग-रोगन का काम भी शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले दस सालों से 418 इंडीपेंडेंट इंजीनियरिंग कोर के जवान हेमकुंड साहिब और आस्था पथ से बर्फ हटाने का कार्य करते हैं। बर्फ हटाने के दौरान तेज गर्मी और ठंड के कारण सेना के जवानों के चेहरे की चमड़ी पूरी तरह से झुलस जाती है। जवान विपरीत परिस्थितियों में करीब 15 हजार फीट की उंचाई पर बर्फ हटाने का काम कर रहे है।

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब में बर्फ जमी रहती है

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब में बर्फ जमी रहती है

पिछले साल कोविड कारण एक महीना चली थी यात्रा

सेवादार सेवा सिंह ने बताया कि पिछले साल अधिक बर्फ और बाद में कोविड के कारण यात्रा केवल एक ही महीना चल पाई थी। लेकिन इस साल बर्फ कम है जिस कारण यात्रा की तैयारियों में कोई दिक्कत नहीं आएगी। इस बार हेमकुंड साहिब के कपाट 10 मई को खुल रहे हैं, जिसके लिए तैयारियां शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि मेनेजमेंट ट्रस्ट के अधीन आते गुरुघरों को पूरी तरह से सजाया जा रहा है और यहां आने वाली संगत को किसी तरह की कोई दिक्कत न हो उसके लिए व्यवस्था की जा रही है।

ग्लेशियर से होकर गुजरते है श्रद्धालु

श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों को आस्था पथ पर करीब दो किलोमीटर तक ग्लेशियर के बीच से होकर गुजरना पड़ेगा। हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा आस्था, उमंग और साहसिक होती है। यहां अटलाकुड़ी नामक स्थान पर करीब दो किलोमीटर तक ग्लेशियर पसरा हुआ है। ग्लेशियर से गुजरती संगत वाहे गुरु का जाप करते हुए अपना रास्ता पूरा करती है। किसी भी संगत को किसी प्रकार की दिक्कत ग्लेशियर पार करने में नहीं होती।

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