केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया, देश में क्यों हुई कोयले की कमी, बढ़ाया जा रहा है स्टाक

देश के कई राज्यों में कोयला संकट के चलते बिजली की समस्या बनी हुई है। इस बीच कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी का अहम बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि बहुत ज्यादा बारिश होने के चलते कोयले की बीच में थोड़ी कमी हुई थी। इस कारण कोयले के अंतरराष्ट्रीय दाम अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गए थे। आयातित कोयले पर आधारित पावर प्लांट 15 से 20 दिन से लगभग बंद हो गए हैं या बहुत कम प्रोडक्शन जनरेट कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमने कल 1.94 मिलियन टन कोयला सप्लाई किया है, इतिहास में ये घरेलू कोयले की सबसे ज्यादा सप्लाई है। पहले जो 15 से 20 दिन का कोयले का स्टाक था वो कम हुआ है लेकिन कल कोयले का स्टाक बढ़ा है। मुझे विश्वास है कि कोयले का स्टाक आने वाले दिनों में और बढ़ेगा, घबराने की जरूरत नहीं है।

इससे पहले सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नार्थ ब्लाक में बिजली मंत्री आरके सिंह, कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ दोनों मंत्रालयों के आला अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की थी। बैठक में नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनटीपीसी) के शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति भी देखी गई थी।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री द्वारा आश्वासन दिए जाने के एक दिन बाद उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई थी कि बिजली संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति का स्टाक खपत से अधिक हो गया है, यह कहते हुए कि यह ईंधन स्टाक की स्थिति को धीरे-धीरे सुधारने में मदद करेगा।

महाराष्ट्र में कोयला संकट के बावजूद हो रही बिजली की आपूर्ति: नितिन राउत

इसी बीच, महाराष्ट्र के ऊर्जा मंत्री नितिन राउत ने कहा कि एक मंत्री के रूप में मैं गारंटी दे सकता हूं कि कोयला संकट के कारण राज्य में कोई लोड शेडिंग नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कोयला संकट के बावजूद हमने अपने नागरिकों को बिजली की आपूर्ति करने की कोशिश की है। राज्य में कोयले की कमी के बाद भी 27 बिजली उत्पादन इकाइयों में से केवल 4 ही बंद हुईं हैं।

बता दें कि केंद्र सरकार ने राज्य के स्वामित्व वाली कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) को दुर्गा पूजा अवधि के आसपास बिजली उत्पादकों को कोयले की आपूर्ति बढ़ाकर 1.55-1.6 मिलियन टन (MT) प्रतिदिन करने और 20 अक्टूबर के बाद इसे 1.7 मिलियन टन प्रतिदिन करने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी ने पहले कोयले की कमी के कारण बिजली गुल होने के आरोपों से इनकार किया था। बिजली मंत्रालय ने जोर देकर कहा था कि अंतर-मंत्रालयी उप-समूह सप्ताह में दो बार कोयला भंडार की स्थिति की निगरानी कर रहा है।

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