दिल्ली के बाद नोएडा में स्कूल बंद, इस वजह से लिया गया फैसला

नोएडा: दिल्ली के बाद अब नोएडा में भी स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया है. अगले आदेश तक प्राइवेट, सरकारी और सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे. DM गौतमबुद्ध नगर सुहास एल.वाई ने इस बाबत आदेश जारी किया है. ये फैसला बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लिया गया है. हालांकि इस दौरान ऑनलाइन क्लासेज जारी रहेंगी.

दिल्ली-एनसीआर में पॉल्यूशन का कहर

वहीं दिल्ली-एनसीआर में पॉल्यूशन को कम करने के लिए सरकारी और प्राइवेट दोनों कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम, दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में 11 थर्मल पावर प्लांट्स में से छह को बंद करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं. 21 नवंबर तक निर्माण गतिविधियों पर छूट के साथ प्रतिबंध लागू हैं और सभी स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों के खुलने पर अगले आदेश तक रोक जारी है. फिलहाल केवल ऑनलाइन क्लासेज चलेंगी हैं. हालांकि, इन तमाम निर्देशों में लॉकडाउन शामिल नहीं है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान सुझाव दिया था. 

दिल्ली में हुई थी इमरजेंसी मीटिंग 

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक एजेंसी, दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन ने मंगलवार को एक इमरजेंसी बैठक की थी. इस बैठक में सभी उद्योगों को बंद करने का निर्णय लिया गया. सभी एनसीआर राज्यों के लिए गैस फ्यूल, 21 नवंबर तक दिल्ली में आवश्यक सामान ले जाने वाले ट्रकों को छोड़कर ट्रकों की नो एंट्री, दिल्ली की सड़कों पर 15 साल से ज्यादा पुराने डीजल और पेट्रोल वाहन नहीं चलेंगे और पीयूसी सर्टिफिकेट के बारे में सख्त जांच के आदेश दिए गए हैं.

कोर्ट लगा चुका है फटकार

बैठक में दिन में तीन बार एंटी-स्मॉग गन, पानी की बौछार करना और धूल कम करने के लिए उपया करने को लेकर निर्देश दिए गए. बैठक में निर्णय लिया गया कि जीआरएपी के अनुसार सड़कों निर्माण और कचरे को ढेर करने वाले व्यक्तियों और संगठनों पर जुमार्ना लगाया जाएगा. इससे पहले, सोमवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों, विशेषकर दिल्ली सरकार को वायु प्रदूषण रोकने के लिए उपया किए जाने में असफल रहने के लिए फटकार लगाई थी, जो पिछले सप्ताह खतरनाक स्तर पर पहुंच गया था और वर्तमान में गंभीर स्तर पर बना हुआ है.

क्या हैं पॉल्यूशन के कारण?

बता दें, हर साल दिवाली के समय और उत्तर पश्चिम भारत में खरीफ फसल कटाई के साथ, वायु प्रदूषण बढ़ जाता है. कई कारणों में से, क्षेत्र में किसानों द्वारा पराली जलाने और मौसम संबंधी कारक मौजूदा वायु प्रदूषण को बढ़ाते हैं. शीर्ष अदालत ने राज्यों से आपात उपायों के बारे में मिलने और निर्णय लेने को भी कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण को रोकने के लिए लॉकडाउन का सुझाव दिया था. मंगलवार को हुई बैठक में उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के मुख्य सचिवों और प्रधान सचिवों को आमंत्रित बुलाया गया था.

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