Air Pollution से जंग जीत चुके दुनिया के इन 7 शहरों से क्या सीख सकती है दिल्ली?

Delhi pollution: दमघोंटू हवा, यमुना नदी के पानी में जहरीला सफेद फोम और अमोनिया की बहुलता वाला नदी का पानी… दिल्ली जैसे बड़े शहरों की समस्याएं भी बड़ी हैं. लेकिन क्या हम इन हालातों से निपट सकते हैं? हां… लेकिन अगर ये संभव है तो कैसे? जानने के लिए हमें देखना होगा दुनिया के उन शहरों के तौर-तरीकों को जिन्होंने प्रदूषण से जंग जीतकर दिखाया ?

भारत में सबसे गंभीर हालात अभी Air Pollution को लेकर कहीं है तो वो दिल्ली में है. देश की राजधानी दिल्ली दुनिया का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है यानी दिल्लीवालों की सांसों पर सबसे बड़ा खतरा है. Air Quality Index सुधर नहीं रहा, अस्पतालों में सांस की तकलीफ, लंग्स और स्किन से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है. हालात को देखते हुए शहर में स्कूल-कॉलेज बंद किए जा चुके हैं, कंस्ट्रक्शन के काम पर रोक है, गैस आधारित उद्योगों को छोड़कर बाकी इंडस्ट्री पर बैन लग चुका है, शहर में ट्रकों की एंट्री बंद हो चुकी है हालात और बिगड़े तो गाड़ियों के ऑड-ईवन के नियम को भी फिर से लाने की चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं. लेकिन इन तात्कालिक कदमों को छोड़ दें तो सरकारों और पर्यावरण एजेंसियों के पास इस हालात से निपटने का कोई स्थायी और ठोस प्लान दिख नहीं रहा > पॉल्यूशन की समस्या गंभीर क्यों है? इसे समझने के लिए कुछ आंकड़े समझ लेने बहुत जरूरी हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के अनुसार दुनिया में हर साल 70 लाख लोगों की मौत Air Pollution से जुड़ी बीमारियों के कारण हो जाती है. सांस में जहरीली हवा लेने का नुकसान भारत में भी कम नहीं है. दुनिया के 10 सबसे खराब हवा वाले शहरों की लिस्ट में शामिल हैं. भारत में वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों के कारण हर साल लगभग 20 लाख लोगों की मौत हो जाती है. Greenpeace Southeast Asia और स्विस फर्म IQAir की एक स्टडी के मुताबिक साल 2020 में दिल्ली में Air Pollution के कारण 54000 लोगों की जान चली गई ?

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