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इन दिनाें फिल्मों के टाइटल बड़ी बहस की वजह बन गए हैं। थोड़ा सा भी विवादित नाम आते ही सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो जाता है। किसी को टाइटल आपत्तिजनक लगता है। किसी को धार्मिक भावनाएं जुड़ी दिख जाती हैं। वहीं, कई लोग इसमें राजनीतिक संदेश भी खोज लेते हैं। यही वजह रही कि ‘द केरल स्टोरी 2’, ‘घूसखोर पंडित’ और ‘यादव जी की लव स्टोरी’ जैसी फिल्मों के मामले सीधे अदालत तक जा पहुंचे। अब इस मामले को लेकर अमर उजाला ने इन फिल्मों से जुड़े कलाकारों या मेकर्स से और कुछ जानकारों से बात की और पता लगाया कि कैसे तय होते हैं टाइटल?
कैसे तय होता है फिल्मों का टाइटल?
इंडस्ट्री में चार बड़े संगठन मिलकर यह नियम देखते हैं- इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, वेस्टर्न इंडिया फिल्म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स काउंसिल।
फिल्म निर्माताओं को अपना शीर्षक इन संस्थाओं में रजिस्टर कराना पड़ता है।
यदि कोई नाम पहले से किसी ने रजिस्टर करा रखा है, तो वह दूसरे को नहीं मिल सकता। इसके लिए एसोसिएशन से ‘क्लीयरेंस’ लेनी होती है।
बड़े प्रोडक्शन हाउस अपनी फिल्म के नाम और फ्रेंचाइजी (जैसे धूम, गोलमाल) को सुरक्षित रखने के लिए उसे ट्रेडमार्क के रूप में भी रजिस्टर कराते हैं।
हाल ही की विवादित फिल्मों पर अब तक क्या हुआ?
‘द केरल स्टोरी 2’ के मामले में केरल हाई कोर्ट ने कहा कि टाइटल दर्शकों को भ्रमित कर सकता है, इसलिए मामला साफ होने तक रिलीज राइट्स रोक दिए जाएं।
‘घूसखोर पंडित’ पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। विरोध बढ़ा तो मेकर्स ने टाइटल वापस ले लिया और नया नाम तय करने पर सहमति दी।
‘यादव जी की लव स्टोरी’ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि टाइटल से किसी समुदाय का अपमान नहीं होता ।कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
हालांकि, तीनों फिल्मों को लेकर सोशल मीडिया बहस अब भी जारी है।
फिल्म रिलीज से पहले ही मुझे धमकियां मिलने लगीं: डायरेक्टर अंकित भड़ाना
फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के निर्देशक अंकित भड़ाना कहते हैं, ‘फिल्म अभी रिलीज भी नहीं हुई है और कुछ लोग सिर्फ नाम देखकर फैसला सुना रहे हैं। मैंने नहीं सोचा था कि टाइटल पर इतनी गर्मी पैदा हो जाएगी। कई लोग बिना कहानी समझे ही माहौल बिगाड़ने में लगे हैं। मेरी गाड़ी पर हमला हुआ। मुझे थप्पड़ मारने के लिए इनाम रखा गया और जान से मारने की भी धमकी दी जा रही है। लेकिन सत्य को रोका जा सकता है, हराया नहीं। मुख्य किरदार अभीमन्यु यादव है। टाइटल उसी से है। इसे ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे पूरा समुदाय निशाने पर हो। यह सीधी-सीधी गलतफहमी फैलाना है। सिर्फ नाम देखकर किसी फिल्म को ‘कम्युनिटी टारगेट’ कहना नाइंसाफी है। फिल्म आएगी तब असली बात सामने होगी।’
मजेदार कहानी थी, पर टाइटल देखकर लोग कुछ और समझे: घूसखोर पंडित एक्टर सुमीत
‘ये एक मजेदार कहानी है। इतनी सीरियस बात नहीं थी। हमें खुद यकीन नहीं हुआ कि सिर्फ नाम पर इतना बड़ा विवाद हो सकता है। जब शूट कर रहे थे, हमें टाइटल तक नहीं पता था। बाद में पता चला तो विवाद शुरू हो चुका था। मनोज सर का किरदार बेहद फन-लविंग है, लेकिन टाइटल देखकर लोग कुछ और समझ बैठे। अब उम्मीद है कि नया टाइटल कहानी के हिसाब से होगा और अनावश्यक विवाद से बाहर निकलेगा।’
पहले इतना तमाशा नहीं होता था: अभय सिन्हा, इम्पा के अध्यक्ष
‘आज फिल्म का टाइटल पास करना सबसे मुश्किल काम हो गया है। पहले नामों पर इतना विवाद नहीं होता था। आज हर नाम पर लोग धार्मिक या राजनीतिक एंगल ढूंढ लेते हैं। इसके चलते हमें भी बहुत सावधानी रखनी पड़ती है।’
कुछ लोग 10–10 टाइटल बुक कर लेते थे: संग्राम शिर्के, अध्यक्ष, वेस्टर्न इंडिया फिल्म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन
‘टाइटल पर आज पहले से कहीं ज्यादा सतर्कता बरती जाती है। हम IMPAA के साथ मिलकर टाइटल बुक करते हैं। सबसे पहले देखते हैं कि कहीं दो फिल्मों का नाम एक जैसा न हो, वर्ना सीधे प्रोड्यूसर का नुकसान होता है। पहले तो कई लोग 10 टाइटल बुक कराकर बैठ जाते थे और बाद में दूसरों को ब्लैकमेल करते थे। ऐसे में अब हमने हर टाइटल को तीन साल के लिए ही मान्य कर दिया है। अगर फिल्म नहीं बनती तो टाइटल वापस ले लेते हैं।’
इन फिल्मों के नाम पर भी हुए विवाद
पद्मावती – इतिहास गलत दिखाने का आरोप, टाइटल बदलकर ‘पद्मावत’ रखा गया।
राम गोपाल वर्मा की ‘श्रीदेवी’ – श्रीदेवी और बोनी कपूर ने नोटिस भेजा, फिल्म रिलीज ही नहीं हुई।
बजरंगी भाईजान – वीएचपी और बजरंग दल की आपत्ति, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की।
सिंह साब द ग्रेट – एसजीपीसी ने आपत्ति जताई पर टाइटल नहीं बदला गया।
रैंबो राजकुमार – कॉपीराइट विवाद हुआ। नाम बदलकर ‘आर राजकुमार’ हुआ।
मैं हूं रजनीकांत – रजनीकांत ने कोर्ट में चुनौती दी, नाम बदलकर ‘मैं हूं रजनी’ हुआ।
लक्ष्मी बॉम्ब – धार्मिक विरोध के कारण नाम बदलकर ‘लक्ष्मी’ हुआ।
गोलियों की रासलीला राम-लीला – कोर्ट केस हुआ। रिलीज से 48 घंटे पहले टाइटल बदलकर राम-लीला किया गया।
पृथ्वीराज – ऐतिहासिक सम्मान दिखाने के लिए टाइटल ‘सम्राट पृथ्वीराज’ में बदला गया।
बिल्लू बार्बर – नाई समुदाय की आपत्ति के बाद ‘बार्बर’ हटाकर फिल्म का नाम ‘बिल्लू’ किया गया।

