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काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर जारी तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने कंधार हवाई अड्डे के पास स्थित निजी एयरलाइन काम एयर के फ्यूल डिपो और रिहाइशी इलाकों को निशाना बनाया है। यह डिपो न केवल नागरिक उड़ानों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के विमानों को भी ईंधन की आपूर्ति करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल संकट के बीच अफगानिस्तान की रसद व्यवस्था को चोट पहुँचाने की कोशिश है।
अफगान अधिकारियों द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, पाकिस्तानी विमानों ने न केवल रणनीतिक ठिकानों बल्कि रिहाइशी इलाकों को भी अपना निशाना बनाया है। इस बमबारी में कई नागरिक आवास पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन का दावा है कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों सहित कई बेगुनाह लोगों की जान गई है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में बमबारी खाली रेगिस्तानी और निर्जन इलाकों में भी की गई है। तालिबान सरकार ने इस सैन्य कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे क्रूर आक्रामकता करार दिया है। बयान में कहा गया है कि रमजान के पवित्र महीने के अंतिम दस दिनों और ईद जैसे बड़े त्योहार के मुहाने पर इस तरह का हमला करना पाकिस्तानी शासन की नैतिक शून्यता को दर्शाता है। अफगान प्रवक्ता ने इसे एक घिनौना अपराध बताते हुए चेतावनी दी है कि इस क्रूरता का जवाब दिए बिना नहीं रहा जाएगा और पाकिस्तान को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से आर-पार की जंग जैसे हालात बने हुए हैं। इससे पहले जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के विभिन्न शहरों में हवाई हमले किए थे, तब उसने दावा किया था कि निशाने पर तालिबान सरकार के सैन्य ठिकाने थे।इसके उलट, अफगान सरकार ने दावा किया है कि उन्होंने पिछली एयरस्ट्राइक का मुंहतोड़ जवाब दिया था। अफगान सेना के आंकड़ों के अनुसार, उनकी जवाबी कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और उन्होंने सीमा पर स्थित 19 सैन्य चौकियों पर कब्जा कर लिया है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में भारी तनाव है और दोनों सेनाएं युद्ध के स्तर पर तैनात हैं।


